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९ मुखी रुद्राक्ष लाभ, शक्तियां और महत्व

नौ मुखी रुद्राक्ष माँ दुर्गा द्वारा शाषित रुद्राक्ष है, नौ मुखी रुद्राक्ष के बारे में पुराणों में जो वर्णन मिलता है उसके अनुसार नौ मुखी रुद्राक्ष नव दुर्गा की शक्तियों को अपने अंदर समाहित करता है, माँ दुर्गा या शक्ति रूप के पुजारियों को यह रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए, यह रुद्राक्ष सारे पापो से दूर करते हुए हमें भौतिक सुखो की प्राप्ति कराता है और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने के बाद अगर श्रीयंत्र की पूजा की जाती है तो माँ लक्ष्मी की कृपा जातक को अवश्य ही प्राप्त होती है। नौ मुखी रुद्राक्ष में माँ दुर्गा के नवो रूप का समावेश माना जाता है इसलि

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११ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तियाँ और महत्व

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष रूद्र के ग्यारहवे अवतार हनुमान जी का प्रतिनिधित्व करता है, इस रुद्राक्ष के धारक को शनि गृह से होने वाली विपत्तियों से छुटकारा मिलता है और शनि की साढ़े साती के समय भी धारक को नुकसान नहीं उठाना पड़ता है। इस रुद्राक्ष के धारक को भगवान् शिव और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। ११ मुखी रुद्राक्ष विशुद्धि चक्र का नियंत्रक होता है, इस चक्र द्वारा ही हमें सुनने और बोलने की कला में पारंगतता प्राप्त होती है, ये चक्र हमारे शरीर का शुद्धि केंद्र होता है और इसी चक्र द्वारा हमें ज्ञान, इच्छाशक्ति, सच्चाई और पसंद की शक्ति प्राप्त होती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने

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१२ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तिया और महत्व

बारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपति देवता भगवान् सूर्य को माना जाता है। जिस प्रकार सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है, सूर्य की रोशनियाँ ही हमें सिखाती है कि जो भी है वो आज और अभी है, सूर्य जिस प्रकार हमें यह शिक्षा प्रदान करते है कि समय से बड़ा कुछ भी नहीं है और जो कुछ है वो वर्तमान समय ही है, उसी प्रकार यह रुद्राक्ष हमें यह शक्ति प्रदान करता है कि जो कुछ है अभी है, हमारा वर्तमान ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। १२ मुखी रुद्राक्ष हमें आज और अभी का महत्व समझाता है और उसी पर ध्यान केंद्रित कर, उसे सुधरने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। जिस प्रकार से सूर्य कि किरणे सारे अंधेरो को चीरते

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रुद्राक्ष धारण करने का सही तरीका क्या है?

रुद्राक्ष स्वभाव से ही प्रभावी होता है, लेकिन यदि उसे विशेष पद्धति से सिद्ध किया जाए तो उसका प्रभाव कई गुना अधिक हो जाता है। अगर जप के लिए रुद्राक्ष की माला सिद्ध करनी हो तो सबसे पहले उसे पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है) में डुबोएं, फिर साफ पानी से धो लें। हर मनके पर 'ईशान: सर्वभूतानां' मंत्र का 10 बार जप करे। यदि रुद्राक्ष के सिर्फ एक मनके को सिद्ध करना हो तो पहले उसे पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है।) से स्नान कराएं और उस पर गंगाजल का छिड़काव करें। उसक

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