गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त रूप से देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को ‘शक्ति’ के रूप में जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि के पीछे मुख्य कारण क्या है जानते है आईये, कि देवी की पूजा गुप्त रूप से की जाती है, जो बाकी दुनिया से छिपी होती है।

यह मुख्य रूप से साधुओं और तांत्रिकों द्वारा शक्ति की देवी को प्रसन्न करने के लिए व तंत्र साधना के लिए मनाया जाता है जो हमेशा से गलत सोच है ओर कारण भी गुप्त नवरात्रि हो या नवरात्रि हमेशा साधक या सिद्ध संत ,तांत्रिक हमेशा जो साधनाये करते है उनको गुप्त रखा जाता है यही सत्य है उनको उजागर ना करके गोपनियता बनाये रखता है । जिनकी चर्चा केवल गुरू शिष्य मे हो सकती है यह आम आदमी भी कर सकते है । जिनमे सेवा ओर परोपकार की दृष्टिकोण हो पर हमेशा ध्यान रहे सिद्धियो के पीछे भागने से सिद्धियाँ नही मिलती बस आप कर्म करते रहे उनकी कृपा मिल ही जाती है, ।

मित्रो गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त अनुष्ठान किए जाते हैं जहां देवी दुर्गा की पूजा इस समय के दौरान देवी दुर्गा के नव रूपो या सिद्ध दसमहाविधा के रूपों को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। इनके अलावा ग्रहण, तीज त्योहार, पर्व मे भी साधनाये होती है जो अति गुप्त रहती है जिनको उजागर नही किया जाता यही सत्य है नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर।

और मित्रो ऐसा माना जाता है कि इस त्यौहार के दौरान भक्त देवी की पूजा करके अपनी सभी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं लेकिन अनुष्ठानों को गुप्त रखने की आवश्यकता होती है क्योंकि पूजा की सफलता इसके पीछे गोपनीयता की मात्रा पर निर्भर करती है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजी जाने वाली देवी दुर्गा के विभिन्न रूप हैं-

  1. माँ कालिके
  2. तारा देवी
  3. त्रिपुर सुंदरी
  4. भुवनेश्वरी
  5. माता चित्रमस्ता
  6. त्रिपुर भैरवी
  7. माँ धूम्रवती
  8. माता बगलामुखी
  9. मातंगी
  10. कमला देवी

इस शुभ अवसर के दौरान मंत्रों का जाप, देवी दुर्गा की उत्पत्ति का वर्णन करते हैं और राक्षस महिषासुर का मुकाबला करने के लिए कैसे सभी देवताओं की शक्तियां देवी में समाहित हुईं ताकि वह उसका वध कर सकें, और दुनिया की बुरी शक्तियों पर उनकी जीत हो।

पूजा के दौरान प्रथाऐं – गुप्त नवरात्रि
गुप्त नवरात्रि के दौरान, तंत्र मंत्र साधना में विश्वास करने वाले, अपने गुप्त तांत्रिक क्रियाकलापों के साथ-साथ सामान्य नवरात्रि की तरह ही उपवास करते हैं और अन्य अनुष्ठान करते हैं।

9 दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जाती है।

कलश स्थापन 2021:

देवी दुर्गा के सामने दुर्गा सप्तशती मार्ग और मार्खदेव पुराण का पाठ किया जाता है।
नवरात्रि के सभी दिनों में उपवास या सात्विक आहार का सेवन किया जाता है।

गुप्त नवरात्रि व्रत का पालन करने के लाभ:

गुप्त नवरात्रि, जिसे गायत्री नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ महीने के दौरान मनाया जाता है जो आमतौर पर जून-जुलाई के बीच आता है। इस 9-दिवसीय धार्मिक क्रिया के दौरान देवी दुर्गा को प्रसन्न करने का मुख्य तरीका तंत्र विद्या के मंत्रों के साथ देवी के शक्तिशाली आह्वान को मंत्रमुग्ध करना है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना शामिल है।

गुप्त नवरात्रि की पूजा शैतानी ताकतों के प्रभाव को खत्म करने के लिए की जाती है? जिसे भक्तों के दिलों से बुराई के डर को दूर करने के लिए शक्तिशाली माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा को शक्तिशाली मंत्र और गुप्त तंत्र विद्या व तांत्रिक साधनाओं के रूप में गुप्त पूजा की पेशकश की जाती है, जो भक्तों को सभी इच्छाओं और आशाओं को पूरा करने के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त करने में मदद करती हैं। ओर दसवे दिन भैरव बाबा की पुजा होती है यह केवल जानकार या गुरू गाम्य शिष्य करते है,।
कुछ पुजा अर्चना के संबंध मे जानकारी, और मुर्हत,।

नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री

● माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र
● लाल चुनरी
● आम की पत्तियाँ
● चावल
● दुर्गा सप्तशती की किताब
● लाल कलावा
● गंगा जल
● चंदन
● नारियल
● कपूर
● जौ के बीच
● मिट्टी का बर्तन
● गुलाल
● सुपारी
● पान के पत्ते
● लौंग
● इलायची

नवरात्रि पूजा विधि

● सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें
● ऊपर दी गई पूजा सामग्री को एकत्रित करें
● पूजा की थाल सजाएँ
● माँ दर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र में रखें
● मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोयें और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें
● पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें। इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियाँ लगाएं और उपर नारियल रखें। कलश को लाल कपड़े से लपेंटे और कलावा के माध्यम से उसे बाँधें। अब इसे मिट्टी के बर्तन के पास रख दें
● फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें
● नौ दिनों तक माँ दुर्गा से संबंधित मंत्र का जाप करें और माता का स्वागत कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें
● अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं
● आखिरी दिन दुर्गा के पूजा के बाद घट विसर्जन करें इसमें माँ की आरती गाएं, उन्हें फूल, चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं,। नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी

अब मुहूर्त के बारे मे जानते है।

नवरात्रि शुरू : 12 फरवरी 2021, दिन शुक्रवार

नवरात्रि समाप्त : 21 फरवरी 2021, दिन रविवार

कलश स्थापना मुहूर्त सुबह : 08:34 AM से 09:59 AM

अभिजीत मुहूर्त दिन में : 12:13 PM से 12:58 PM

हमारे facebook लिंक https://www.facebook.com/JayMahakal01/ को लाइक और शेयर करें ट्विटर और इंस्टाग्राम पर फॉलो करे हमारा handle है @jaymahakaal01 और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए www.jaymahakaal.com

हिन्दू संस्कृति या सनातन धर्म के बारे में, व्रत, त्योहार की तिथि नियम जैसे किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने हेतु अथवा रेकी, नुमेरोलॉजी, हीलिंग, रुद्राक्ष, क्रिस्टल, कुंडली, वास्तु, हस्त रेखा, विवाह, घर, धन में कमी, प्रमोशन, नौकरी इत्यादि से सम्बंधित कोई समस्या हो तो आप हमें इस नंबर पर व्हाट्सप्प कर सकते हैं 9152203064

हमारी ईमेल आईडी askus@jaymahakaal.com पर संपर्क कर सकते है।

Tagged With:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Now!
Select your currency
INRIndian rupee