गुण मिलान करते समय यदि वर और वधू की नाड़ी अलग-अलग हो तो उन्हें नाड़ी मिलान के 8 में से 8 अंक प्राप्त होते हैं, जैसे कि वर की आदि नाड़ी तथा वधू की नाड़ी मध्य अथवा अंत। किन्तु यदि वर और वधू की नाड़ी एक ही हो तो उन्हें नाड़ी मिलान के 8 में से 0 अंक प्राप्त होते हैं तथा इसे नाड़ी दोष का नाम दिया जाता है। नाड़ी दोष की प्रचलित धारणा के अनुसार वर-वधू दोनों की नाड़ी आदि होने की स्थिति में तलाक या अलगाव की प्रबल संभावना बनती है तथा वर-वधू दोनों की नाड़ी मध्य या अंत होने से वर-वधू में से किसी एक या दोनों की मृत्यु की प्रबल संभावना बनती है।

1 -वर कन्या की एक राशि हो, लेकिन जन्म नक्षत्र अलग अलग हों या जन्म नक्षत्र एक ही हों परन्तु राशियां अलग अलग हों तो नाड़ी दोष नही होता है, यदि जन्म नक्षत्र एक ही हों चरण भेद हो तो अति आवश्यकता अर्थात सगाई हो गई हो, एक दूसरे को पसंद करते हों तब इस स्थिति में विवाह किया जा सकता है।
2 -विशाखा, अनुराधा, धनिष्ठा, रेवति, आद्रा, पूर्वभाद्रपद इन आठ नक्षत्रों मे वर कन्या का जन्म हो तो नाड़ी दोष नही रहता है।
3 – उत्तराभाद्रपद, रेवती, रोहणी, विषाखा, आद्रा, श्रवण, पुष्य, मघा, इन नक्षत्र में भी वर कन्या का जन्म नक्षत्र पड़े तो नाड़ी दोष नही रहता है।
4 – वर कन्या के राशिपति यदि बुध, गुरू एवं शुक्र में से कोई एक या अथवा दोनों के राशि पति एक ही हों तो नाड़ी दोष नही रहता है।
5 – ज्योतिष के अनुसार नाड़ी दोष विप्र वर्ण पर प्रभावी माना जाता है। यदि वर कन्या दोनो जन्म से विप्र हो तो उनमे नाड़ी दोष प्रभावी माना जाता है । अन्य वर्णो पर नाड़ी दोष पूर्ण प्रभावी नही होता है। यदि विप्र वर्ण पर नाड़ी दोष प्रभावी माने तो नियम का हनन होता है। क्योकिं बृहस्पति एवं शुक्र को विप्र वर्ण का माना गया है। यदि वर कन्या के राशि पति विप्र वर्ण ग्रह हों तो इनके अनुसार नाड़ी दोष नही रहता है। विप्र वर्ण की राशियों में भी बुध व शुक्र राशिपति बनते हैं।
6 -सप्तमेश स्वगृही होकर शुभ ग्रहों के प्रभाव में हों एवं वर कन्या के जन्म नक्षत्र चरण में भिन्नता हो तो नाड़ी दोष नही रहता है।

इन परिहारों के अलावा कुछ प्रबल नाड़ी दोष के योग भी बनते हैं , जिनके होने पर विवाह न करना ही उचित रहता है।
यदि वर कन्या की नाड़ी एक हो एवं निम्न मे से कोई युग्म वर कन्या का जन्म नक्षत्र हो तो विवाह न करें;
अ – आदि नाड़ी -अश्विनी -ज्येष्ठा, हस्त-शतिभषा, उ फा -पू फा, अर्थात वर का नक्षत्र अश्विनी हो तो वधु का नक्षत्र ज्येष्ठा होने पर प्रबल नाड़ी दोष होगा।इस प्रकार कन्या का नक्षत्र अश्विनी हो तो वर का नक्षत्र ज्येष्ठा होने पर प्रबल नाड़ी दोष होगा। इसी प्रकार आगे के युग्मों से भी अभिप्राय समझें।
ब – मध्यनाड़ी- भरणी-अनुराधा , पूर्वा फाल्गुनी -उत्तराफाल्गुनी, पुष्य-पूर्वाष्णढ़ , मृगशिरा -चित्रा , चित्रा-धनिष्ठा, मृगशिरा-धनिष्ठा
स – अंत्य नाड़ी- कृतिका-विशाखा, रोहणी- स्वाति , मघा-रेवती ,

इस प्रकार की स्थिति में प्रबल नाड़ी दोष होने के कारण विवाह करते समय अवश्य ध्यान रखें।
सामान्य नाड़ी दोष होने पर किस प्रकार के उपाय दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

नाड़ी दोष के उपाय
1 – वर एवं कन्या दोनों मध्यनाड़ी में उत्पन्न हो तो पुरूष को प्राण भय रहता है । इसी स्थिति में पुरूष को महा मृत्युंजय जाप इत्यादि अति आवश्यक है।यदि वर एवं कन्या दोनों की नाड़ी आदि या अंत हो तो स्त्री को प्राण भय की संभावना रहती है, इसलिये इस स्थिति में कन्या महामृत्युंजय अवश्य करे।
2 – नाड़ी दोष होने पर संकल्प लेकर किसी ब्राह्मण को गोदान या स्वर्णदान करना चाहिये ।
3 – अपनी सालगिरह पर अपने वजन के बराबर अन्नदान करें , एवं साथ में ब्राह्मण भोज करायें ।
4 – नाड़ी दोष के प्रभाव को दूर करने के लिये अनुकूल आहार दान करें । अर्थात आर्युवेद मतानुसार जिस दोष की अधिकतम बने उस दोष को दूर करने वाले आहार का सेवन करें ।
5 – वर एवं कन्या में से जिसे मारकेश की दशा चल रही हो उसको दशानाथ का उपाय दशाकाल तक अवश्य करना चाहिये

हिन्दू संस्कृति या सनातन धर्म के बारे में, व्रत, त्योहार की तिथि नियम जैसे किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने हेतु अथवा कुंडली, वास्तु, हस्त रेखा, विवाह, घर, धन में कमी, प्रमोशन, नौकरी इत्यादि से सम्बंधित कोई समस्या हो तो आप हमें इस नंबर पर व्हाट्सप्प कर सकते हैं +91- 9152203064

साथ हमें नित्य फॉलो करें हमारे फसेबुक http://www.facebook.com/jaymahakaal01/, ट्विटर, इंस्टाग्राम के पेज @jaymahakaal01 पर और विज़िट करते रहें http://www.jaymahakaal.com

Tagged With:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Now!
Select your currency
INRIndian rupee