क्यों कहते हैं हर मंत्र के पहले ‘हरी ॐ’

वेद पाठ के प्रारंभ में मंत्रोच्चारण से पूर्व ‘हरि ओऽम’ का उच्चारण करना वैदिक परंपरा है। वेद के अशुद्ध उच्चारण में ‘महापातक’ नामक दोष लगता है। इस संभावित दोष की निवृत्ति हेतु आदि और अंत में ‘हरि ओऽम’ शब्द का उच्चारण करना अनिवार्य है। श्री मद्भागवत में भी लिखा है कि – ‘‘सर्वं करोति निश्छिद्रं नाम संकीर्तनं हरेः।’ मंत्रोच्चार, विधि-विधान, देशकाल और वस्तु की कमी के कारण धर्मानुष्ठान में जो भी कमी हो, हरि नाम का संकीर्तन करने से वे सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

प्रश्न: प्रथम गणेश पूजन क्यों? उत्तर: सनातन हिंदू धर्म में कोई ऐसा कार्य नहीं, जो कि गणपति पूजन के बिना प्रारंभ किया जाता हो, फलतः प्रारंभ का पर्याय ‘श्री गणेश’ हो गया। इसका कारण यह है कि गणेश, गणपति एवं सभी देवगणों के गणाध्यक्ष कहलाते हैं। ये अपनी विलक्षण बुद्धिमत्ता के कारण सभी देवताओं में अग्रपूज्य हैं।

याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार गणपति की पूजा करके, विधिपूर्वक नवग्रह पूजन करना चाहिए, जिससे समस्त कार्यों का शुभ फल प्राप्त होता है तथा लक्ष्मी की भी प्राप्ति होती है।

यदि आपके पास पूजा एवं साधना से संबंधित समस्या हो या सवाल हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं, हमारा ईमेल id है @jaymahakaal01@gmail.com

साथ ही आप हमारे फेसबुक, ट्विटर, और इंस्टाग्राम पेज @jaymahakaal01 को like और share करें और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए www.jaymahakaal.com

Like us on facebook:

हमें अपनी राय से अवगत कराये ताकि हम आपको आपके हिसाब से आर्टिकल्स दे सके। जय महाकाल।।