क्यों गर्भवती महिला को रहना होता है सतर्क ग्रहण से?

भारत वर्ष में ग्रहण के लिए कई बातें बताई गई है, ग्रहण सदा से हमारे देश मे एक बुरी चीज मानी जाती रही है।गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर निकलने की मनाही सदैव ही रही है, आम जनमानस हेतु भी खाना और बनाना सदैव वर्जित रहा है, हमारी मान्यता के अनुसार ग्रहण काल मे ऐसा करने से गर्भस्थ शिशु के ऊपर बुरा प्रभाव पड़ता है।अब हम ये कैसे पता कर की ये मिथक है या सत्य? लोगो का ऐसा मानना है कि ग्रहण काल मे किये गए कई कार्य गर्भवती स्त्री और गर्भ में पल रहे गर्भस्थ शिशु के लिए हानिकारक है, आइए जानने की कोशिश करते है कि गर्भवती स्त्रियों को ले कर क्या क्या कार्य ग्रहण काल के दौरान वर्जित माने गए है –

  1. ऐसी मान्यता है कि यदि गर्भवती स्त्री ग्रहण काल मे बाहर निकलती है तो उससे गर्भस्थ शिशु के शरीर मे विकृतियां हो सकती है।
  2. ऐसी भी मान्यता है कि यदि गर्भवती स्त्री ग्रहण काल मे चाकू या कैंची का प्रयोग करती है तो गर्भस्थ शिशु के होंठ कटे फटे हो सकते है, या शरीर पर कोई निशान भी हो सकता है।
  3. ऐसी भी मान्यता है कि ग्रहण काल मे ना तो कुछ पकाना चाहिए और ना ही खाना, ये मान्यता सिर्फ गर्भवती स्त्री के लिए ही नही अपितु जन मानस हेतु मानी जाती है।
  4. ग्रहण काल मे कोई भी कार्य आरंभ ना करे, यथाशक्ति मंत्रो का जप करे, सोये ना।
  5. खिड़कियों पर पर्दे लगा कर रखे ताकि ग्रहण के समय की किरणें आप तक न पहुंच सके।

ग्रहण के समाप्ति पर स्नान करनाऐसी कई मान्यताएं है जो आदि काल से हमारे साथ चली आ रही है, जिनमे जनमानस के साथ गर्भवती स्त्रियों के लिए विशेष सावधानियां बरतने की बात कही गई है, हालांकि इनमें से कुछ बातों को मानने में कोई बुराई नही है अंततः ये हमे और हमारे परिवार को सुकून ही पहुचाती हैं, जैसे कि आज का विज्ञान भी ये मानता है कि ग्रहण काल मे सूर्य या चंद्र को नंगी आंखों से नही देखना चाहिए, ऐसा करना से यदि आज नही, तो समय के साथ आपकी आंखें खराब हों सकती है, हालांकि सुरक्षा के साथ कोई भी ग्रहण को देख सकता है।

वैसे भी गर्भवती स्त्री को आराम की ज्यादा आवश्यकता होती है तो क्यो ना रोजमर्रा के कामो से हटकर इस समय का लाभ उठाएं और आराम करते हुए भगवत भजन का लाभ उठाएं? सोने जाने से पहले स्नान शरीर को तरोताजा कर के सुकून की नींद लाने में मददगार होता है इसलिए ऐसा करने में हमारी नज़र में कोई बुराई नही है, हाँ ग्रहण काल मे खाने पीने का परहेज आप अपने हिसाब से करे क्योंकि ऐसा करने से आपके शरीर मे ग्लूकोज़ की मात्रा कम हो सकती है जो की गर्भस्थ शिशु और माँ दोनो के लिए हानिकारक है, हालांकि आज तक विज्ञान ने इन किदवंतियो को प्रमाणित नही किया है, लेकिन ऐसा भी नही है कि विज्ञान ने इन बातों पर शोध कर के इन्हें नकार दिया हो, इसलिए आपसे जो संभव हो करें, आखिरकार आपका परिवार आपकी और आपके गर्भस्थ शिशु की भलाई ही चाहता है इसलिए मान्याताओं को दरकिनार न करते हुए यथासंभव अपनी और अपने गर्भस्थ शिशु की सेहत का ध्यान रखे और ग्रहण काल मे बिना किसी जोखिम के स्वयं और अपने परिवार का ख्याल रखते हुए ग्रहण काल का भरपूर लाभ ले।

जय महाकाल

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