कौन है भगवान शिव? – जय महाकाल

शिव कौन हैं? क्या वे भगवान हैं? या वे एक मिथक हैं? या फिर शिव का एक गहरा अर्थ है, जो केवल उन्हीं के लिए उपलब्ध है जो सत्य के खोजी हैं?


भगवान शंकर जिसके आराध्य हों या फिर अगर कोई साधक भगवान शंकर का ध्यान करता हो तो उनके बारे में कई भाव मन में प्रस्फुटित होते हैं। भगवान शिव सौम्य प्रकृति एवं रौद्र रूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। यह सबसे भोले देवता है जो शीघ्र प्रसन्न हो जाते है

शिव में ‘शि’ ध्वनि का अर्थ मूल रूप से शक्ति या ऊर्जा होता है। भारतीय जीवन शैली में, हमने हमेशा से स्त्री गुण को शक्ति के रूप में देखा है। मजेदार बात यह है कि अंग्रेजी में भी स्त्री के लिए ‘शी’(she) शब्द का ही इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यदि आप सिर्फ “शि” का बहुत अधिक जाप करेंगे, तो वह आपको असंतुलित कर देगा। इसलिए इस मंत्र को मंद करने और संतुलन बनाए रखने के लिए उसमें “व” जोड़ा गया। “व” “वाम” से लिया गया है, जिसका अर्थ है प्रवीणता। ‘शि-व’ मंत्र में एक अंश उसे ऊर्जा देता है और दूसरा उसे संतुलित या नियंत्रित करता है।

दिशाहीन ऊर्जा का कोई लाभ नहीं है, वह विनाशकारी हो सकती है। इसलिए जब हम ‘शिव’ कहते हैं, तो हम ऊर्जा को एक खास तरीके से, एक खास दिशा में ले जाने की बात करते हैं।

सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। तांत्रिको और अघोरियो के यह परम आराध्य है | इन्होने अनेको अवतार जनकल्याण के लिए लिया है
आज हम जिसे योगिक विज्ञान के रूप में जानते हैं, उसके जनक शिव ही हैं। योग का अर्थ अपने सिर पर खड़े होना या अपनी सांस को रोकना नहीं है। योग, इस जीवन की मूलभूत रचना को जानने, और इसे इसकी परम संभावना तक ले जाने, का विज्ञान और तकनीक है।

वसे शिव जी के बारे में तो ये ही कहा जाता है कि शिव की नहीं कोई शुरुआत है और ना ही कोई अंत!

बम बम भोले!

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