क्या है धर्म?

धर्म एक नींव है जो धरती की तरह है,जमीन को कूड़ा करकट और गंदगी फेंकने से न ही जमीन खतम हो जाती है और न ही जिसका जमीन है उसका नाम ही,भले ही वह अपने जमीन पर न जाये।

और जहां तक मानने न मानने की बात है तो भारत का सनातन धर्म न ही खत्म था न ही होगा,भले ही कोई मानता हो या नहीं, जब उसकी जगह किसी एक ब्यक्ति विशेष को प्रणेता मानकर उसके पीछे भागेंगें तो उसे धर्म का नाम देकर उसे जीवंत नहीं रख सकते।

और जहां तक मास मदिरा का सवाल है तो यह धर्म के विरूद्ध किया गया कार्य है ,धर्म केवल मनुष्य के लिए है जानवर के लिए नहीं अब यह मनुष्य की सोच है कि वह इंसान ही बना रहे या जानवर ,मजबूरी का आधार भी एक अपराधी को जन्म दे सकता है या फिर एक संत को।

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