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११ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तियाँ और महत्व

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष रूद्र के ग्यारहवे अवतार हनुमान जी का प्रतिनिधित्व करता है, इस रुद्राक्ष के धारक को शनि गृह से होने वाली विपत्तियों से छुटकारा मिलता है और शनि की साढ़े साती के समय भी धारक को नुकसान नहीं उठाना पड़ता है। इस रुद्राक्ष के धारक को भगवान् शिव और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। ११ मुखी रुद्राक्ष विशुद्धि चक्र का नियंत्रक होता है, इस चक्र द्वारा ही हमें सुनने और बोलने की कला में पारंगतता प्राप्त होती है, ये चक्र हमारे शरीर का शुद्धि केंद्र होता है और इसी चक्र द्वारा हमें ज्ञान, इच्छाशक्ति, सच्चाई और पसंद की शक्ति प्राप्त होती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने

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रुद्राक्ष धारण करने का सही तरीका क्या है?

रुद्राक्ष स्वभाव से ही प्रभावी होता है, लेकिन यदि उसे विशेष पद्धति से सिद्ध किया जाए तो उसका प्रभाव कई गुना अधिक हो जाता है। अगर जप के लिए रुद्राक्ष की माला सिद्ध करनी हो तो सबसे पहले उसे पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है) में डुबोएं, फिर साफ पानी से धो लें। हर मनके पर 'ईशान: सर्वभूतानां' मंत्र का 10 बार जप करे। यदि रुद्राक्ष के सिर्फ एक मनके को सिद्ध करना हो तो पहले उसे पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है।) से स्नान कराएं और उस पर गंगाजल का छिड़काव करें। उसक

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