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१२ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तिया और महत्व

बारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपति देवता भगवान् सूर्य को माना जाता है। जिस प्रकार सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है, सूर्य की रोशनियाँ ही हमें सिखाती है कि जो भी है वो आज और अभी है, सूर्य जिस प्रकार हमें यह शिक्षा प्रदान करते है कि समय से बड़ा कुछ भी नहीं है और जो कुछ है वो वर्तमान समय ही है, उसी प्रकार यह रुद्राक्ष हमें यह शक्ति प्रदान करता है कि जो कुछ है अभी है, हमारा वर्तमान ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। १२ मुखी रुद्राक्ष हमें आज और अभी का महत्व समझाता है और उसी पर ध्यान केंद्रित कर, उसे सुधरने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। जिस प्रकार से सूर्य कि किरणे सारे अंधेरो को चीरते

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रुद्राक्ष धारण करने का सही तरीका क्या है?

रुद्राक्ष स्वभाव से ही प्रभावी होता है, लेकिन यदि उसे विशेष पद्धति से सिद्ध किया जाए तो उसका प्रभाव कई गुना अधिक हो जाता है। अगर जप के लिए रुद्राक्ष की माला सिद्ध करनी हो तो सबसे पहले उसे पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है) में डुबोएं, फिर साफ पानी से धो लें। हर मनके पर 'ईशान: सर्वभूतानां' मंत्र का 10 बार जप करे। यदि रुद्राक्ष के सिर्फ एक मनके को सिद्ध करना हो तो पहले उसे पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है।) से स्नान कराएं और उस पर गंगाजल का छिड़काव करें। उसक

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