<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" ?><!-- generator=Zoho Sites --><rss version="2.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"><channel><atom:link href="https://www.jaymahakaal.com/blogs/tag/बुद्धि/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><title>Jaymahakaal Centre of Occult Sciences - Blog ##बुद्धि</title><description>Jaymahakaal Centre of Occult Sciences - Blog ##बुद्धि</description><link>https://www.jaymahakaal.com/blogs/tag/बुद्धि</link><lastBuildDate>Fri, 10 Apr 2026 13:05:30 +0530</lastBuildDate><generator>http://zoho.com/sites/</generator><item><title><![CDATA[सात मुखी रुद्राक्ष( 7 Mukhi Rudraksha- Amazing Benefits)के महत्त्व,लाभ एवं धारण मंत्र]]></title><link>https://www.jaymahakaal.com/blogs/post/7-mukhi-rudraksha-importance-its-benefits-and-mantra</link><description><![CDATA[रुद्राक्ष के बीजों में सात मुखी रुद्राक्ष को सबसे ज्‍यादा शुभ माना जाता है। इस रुद्राक्ष पर धन की देवी मां लक्ष्‍मी की कृपा बरसती है। सात नंबर को अंकज ]]></description><content:encoded><![CDATA[
<div class="zpcontent-container blogpost-container "><div data-element-id="elm_zeqyH16mTSyc8quXb0eIiA" data-element-type="section" class="zpsection "><style type="text/css"></style><div class="zpcontainer"><div data-element-id="elm_eg5Fbj4VRfS4U7STD5kkYQ" data-element-type="row" class="zprow zpalign-items- zpjustify-content- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_E0P2LNPaSPS9txZa0UuIwA" data-element-type="column" class="zpelem-col zpcol-12 zpcol-md-12 zpcol-sm-12 zpalign-self- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_j7LDA_x9SJKlWVioHy1hvg" data-element-type="text" class="zpelement zpelem-text "><style></style><div class="zptext zptext-align-center " data-editor="true"><div><figure class="wp-block-image aligncenter size-full"><img src="http://localhost:10004/wp-content/uploads/2021/12/7-Mukhi-Rudraksha-Jaymahakal.jpg" alt="" class="wp-image-13582"/></figure><p>रुद्राक्ष के बीजों में सात मुखी रुद्राक्ष को सबसे ज्‍यादा शुभ माना जाता है। इस रुद्राक्ष पर धन की देवी मां लक्ष्‍मी की कृपा बरसती है। सात नंबर को अंकज्‍योतिष में सबसे ज्‍यादा भाग्‍यशाली अंक माना जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्‍यक्‍ति कला में निपुण बनता है और उसे सौंदर्य, सुख और प्रसिद्धि की प्राप्‍ति होती है। इस रुद्राक्ष के स्‍वामी ग्रह शुक्र देवता होते हैं इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करने से शुक्र से संबंधित सभी दुष्‍प्रभाव दूर हो जाते हैं।</p><p><strong>सात मुखी</strong> रूद्राक्ष की सतह पर सात ऊर्ध्वाधर रेखाएं (मुख) होती हैं, इस रूद्राक्ष का प्रतिनिधित्व स्वयं <strong>माँ लक्ष्मी</strong> द्वारा किया जाता है , जैसा की हमारे पुराणों में वर्णित है माँ लक्ष्मी धन धान्य का प्रतिनिधित्व करती है, उनका आसान <strong>कमल का पुष्प</strong> है, उनके ऊपर हाथियों द्वारा लगातार <strong>जल </strong>की <strong>वर्षा</strong> की जाती रहती है, जो दर्शाता है की माँ लक्ष्मी की कृपा से मनुष्य अपनी पुरानी यादो से बाहर आकर वर्तमान में जीवन जीना प्रारम्भ करता है और दिन प्रतिदिन अपनी परेशानियों से ऊपर उठते हुए एक नयी दुनिया का निर्माण करता है।</p><p>व्‍यापारियों, नौकरीपेशा, वक्‍ता और लेखकों को ये रुद्राक्ष सबसे अधिक लाभ पहुंचाता है। सात नदियों से संबंधित होने के कारण इस रुद्राक्ष को धारण करने से समुद्र जैसी शांति और कोमतला की प्राप्‍ति होती है। अगर आप आर्थिक तंगी या किसी मानसिक विकार से परेशान हैं तो इस रुद्राक्ष को आप धारण कर सकते हैं। पूरे विधि-विधान के बाद लाल धागे में पिरोकर 7 मुखी रुद्राक्ष को धारण से इसका पूर्ण फल प्राप्‍त होता है।</p><p>सात मुखी रुद्राक्ष <strong>शुक्र ग्रह</strong> से समन्धित है, शुक्र ग्रह हमारे भौतिक सुखो की वृद्धि करते हुए हमें प्यार और धन की नई उचाईया प्रदान करता है। सात मुखी रूद्राक्ष मनका पहनने वाले को कई शक्तियां प्रदान करता है। धारक किसी प्रकार के विषाक्तता से प्रभावित नहीं है। चोरी, नशीली दवाओं के दुरुपयोग, व्यभिचार से उत्पन्न पापों को निकालता है। इसे धारण करने वाले को छिपा खजाना मिल सकता है। विपरीत लिंग की तरफ से आकर्षण को बढ़ाता है, दुश्मनों और उनकी <strong>शक्ति</strong> को अशक्त बनाता है, <strong>देवी महालक्ष्मी</strong> की कृपा का पात्र बनता हैं। दुर्भाग्य हटाता है <strong>स्वास्थ्य और धन</strong> प्रदान करता है।</p><p></p><h2 class="wp-block-heading"><strong>7 मुखी रुद्राक्ष पहनने से क्या होता है?</strong></h2><figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img src="http://localhost:10004/wp-content/uploads/2021/11/7-Mukhi-Rudraksha-Seven-Faced-Nepali-Rudraksh-Pendant-for-Men-and-Women.jpg" class="wp-image-16425" style="width:397px;height:auto;"/></figure><p><strong>7 मुखी रुद्राक्ष</strong>&nbsp;उन सभी लोगों द्वारा पहना जाता है जो जीवन में बाधाओं का सामना करते हैं और विफलताएं प्राप्त करते हैं. शुक्र धोशा वाले लोगों द्वारा सात&nbsp;<strong>मुखी</strong>&nbsp;भी पहनी जाती है. सात&nbsp;<strong>मुखी रुद्राक्ष पहनने</strong>&nbsp;से व्यक्ति नाम, प्रसिद्धि और धन की प्रचुरता के साथ जीवन में तेजी से प्रगति करता है.</p><h3 class="wp-block-heading"><br/><strong>सात मुखी</strong><strong>रूद्राक्ष</strong><strong>के</strong><strong>महत्त्व:</strong></h3><figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img src="http://localhost:10004/wp-content/uploads/2021/11/1-to-21-Mukhi-Rudraksha-Benefits-Influence-of-The-Mukhis-1.jpg" class="wp-image-16426" style="width:394px;height:auto;"/></figure><p><br/> १. शुक्र, शनि और राहु ग्रह के बुरे प्रभाव को कम करता है।<br/> २. पहनने वाले की भौतिक सुखो में अचानक गिरावट को दूर करता है।<br/> ३. सात मुखी रुद्राक्ष धारक को समृद्धि, खुशी और संतोष देता है।<br/> ४. यह शुक्र, शनि और राहु के नकारात्मक प्रभाव और विपत्तियों को शांत करता है।</p><h3 class="wp-block-heading"><br/><strong><strong>सात मुखी रुद्राक्ष के लाभ</strong></strong></h3><figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img src="http://localhost:10004/wp-content/uploads/2021/11/7-Mukhi-Rudraksha-Seven-Face-Rudraksha-7-Face-Rudraksh-bead-From-Nepal-Lab-Certified-Stress-free-life-Om-Meditation-Yoga-jewelry.jpg" class="wp-image-16427" style="width:471px;height:auto;"/></figure><p><br/> १. सात मुखी रुद्राक्ष, व्यापारी वर्ग, प्रशाशनिक अधिकारियों इत्यादि को उनके कार्य क्षेत्र में नई उचाईया प्रदान करता है।<br/> २. धारक को सभी दुखो से दूर करता है और उन्हें सकारात्मक बनाता हैु<br/> ३. यह रुद्राक्ष धारक के लिए धन, किस्मत और प्यार सम्बन्धी नए अवसर प्रदान करता है।<br/> ४. इसे पहनने से धारक की बुद्धि का विकास होता है, एकाग्रता और तर्क शक्ति बढ़ती है।<br/> ५. यह रुद्राक्ष धारक को मन की शांति, धन-दौलत और रिश्ते में सामंजस्य देता है।</p><h3 class="wp-block-heading"><br/><strong><strong>सात मुखी रुद्राक्ष के</strong></strong><strong>चिकित्स्कीय लाभ:</strong></h3><figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img src="http://localhost:10004/wp-content/uploads/2021/11/6-mm-To-7-mm-Rudraksh-Bead-Size-5-Mukhi-Face-Rudraksha-Bracelet-Yoga-Healing-Beaded.jpg" class="wp-image-16428" style="width:552px;height:auto;"/></figure><p><br/> १. यह पाचन तंत्र के कामकाज को विनियमित करता है, अपच का इलाज करता है, गैस की समस्या को दूर करता है।<br/> २. सात मुखी रुद्राक्ष कमर दर्द में राम बाण की तरह कार्य करता है और जोड़ो के दर्द जैसे रोगो से मुक्ति दिलाता है।<br/> ३. मोटापा दूर करता है।<br/> ४. सात मुखी रुद्राक्ष पेट, जिगर, अग्न्याशय और अधिवृक्क ग्रंथि की बीमारी को कम करता है।<br/> ५. सात मुखी रुद्राक्ष नपुंसकता, पैर रोग, श्वसन विकार और पुरानी बीमारियां दूर करने में सहायक है।</p><p></p><h3 class="wp-block-heading"><strong>7 मुखी रुद्राक्ष के लाभ</strong></h3><ul class="wp-block-list"><li>करियर और व्‍यापार में लाभ पाने के लिए सात मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाता है।</li><li>मुश्किल परिस्थिति में भाग्‍य का साथ पाने हेतु इस रुद्राक्ष को पहन सकते हैं।</li><li>घर से गरीबी दूर करने और आर्थिक रूप से संपन्‍नता पाने के लिए सात मुखी रुद्राक्ष बहुत लाभकारी होता है।</li><li>शनि की कुदृष्टि से बचने एवं शनि देव को प्रसन्‍न करना है तो आप सात मुखी रुद्राक्ष पहन सकते हैं।</li><li>जोड़ों में दर्द और मानसिक तनाव से ग्रस्‍त व्‍यक्‍ति को भी सात मुखी रुद्राक्ष पहनना चाहिए।</li><li>7 मुखी रुद्राक्ष पहनने वाले को बहुत सारा धन और समृद्धि प्राप्त होती है।</li><li>यह नौकरी की संभावनाओं को बढ़ाता है और नौकरी में पदोन्नति को सक्षम बनाता है।</li><li>यह पहनने वाले को किसी भी प्रकार की मानसिक, शारीरिक और मौद्रिक समस्याओं से बचाता है।</li><li>7 मुखी रुद्राक्ष शनि (शनि देव) के बुरे प्रभाव को दूर करता है और साढ़े साती दशा के दौरान बहुत उपयोगी होता है।</li><li>यह व्यवसायी के लिए सफलता और धन लाता है।</li><li>सात मुखी रुद्राक्ष व्यापार, सेवा और करियर जैसे जीवन के सभी क्षेत्रों में धन देता है जिससे समृद्धि और खुशहाली आती है।</li><li>यह रुद्राक्ष गुड फॉर्च्यून, बढ़ी हुई मुनाफे, वित्तीय सुरक्षा, रचनात्मकता और संवर्धित अंतर्ज्ञान को भी आकर्षित करता है।</li><li>यह प्राचीन वैदिक ग्रंथों के अनुसार, विशेष रूप से गठिया के कारण उत्पन्न मांसपेशियों के दर्द का इलाज और कम करने के लिए उपयोग किया जाता है।</li><li>यह रुद्राक्ष शनि और उसके “साढ़े सती” काल के पुरुष प्रभाव को जीतने में मदद करता है।</li><li>पहनने वाले को वैवाहिक सुख मिलता है। यौन शक्ति बढ़ाता है और विपरीत लिंग को आकर्षित करें।</li></ul><h3 class="wp-block-heading">सात मुखी रुद्राक्ष के स्वास्थ्य को लाभ</h3><ul class="wp-block-list"><li>प्राचीन वैदिक ग्रंथों के अनुसार, सात मुखी रुद्राक्ष को नपुंसकता, पैर की बीमारियों, श्वसन विकार और पुरानी बीमारियों जैसे शनि से प्रेरित रोगों के इलाज में बहुत प्रभावी माना जाता है।</li><li>प्राचीन वैदिक ग्रंथों के अनुसार, 7 मुखी रुद्राक्ष अस्थमा, लकवा, नपुंसकता, पैरों से संबंधित बीमारियों, कमजोरी, पेट दर्द, मिर्गी, मंदता, गर्भपात, महिलाओं में समस्याओं, गठिया, शुक्राणुओं की शुद्धि और प्रवाह के उपचार में बेहद फायदेमंद है। ओजस (दिव्य ऊर्जा), श्वसन संबंधी विकार आदि।</li></ul><p></p><h3 class="wp-block-heading"><strong><strong>सात मुखी रुद्राक्ष </strong></strong>- <strong>कैस करें धारण</strong></h3><figure class="wp-block-image aligncenter size-full is-resized"><img src="http://localhost:10004/wp-content/uploads/2021/12/7-mukhi-rudraksha-kaise-kare-dharan-Jaymahakaal.jpg" alt="" class="wp-image-13584" style="width:301px;height:323px;"/><figcaption class="wp-element-caption"> सात मुखी रूद्राक्ष कैस करें धारण </figcaption></figure><p>सात मुखी रुद्राक्ष के दो बीजों को एक काले रंग के धागे में पिरोकर धारण कर सकते हैं।</p><h4 class="wp-block-heading"><strong>किस दिन करें सात मुखी रुद्राक्ष धारण</strong></h4><p>7 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का सबसे अच्‍छा दिन सोमवार या शनिवार है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में इसे धारण करें।</p><h3 class="wp-block-heading"><strong>सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के नियम</strong></h3><ul class="wp-block-list"><li>सुबह और शाम कम से कम 9 बार ‘ ऊं हूं नम:’ मंत्र का जाप करें।</li><li>रुद्राक्ष को धारण करने के बाद झूठ ना बोलें और शराब, मांस आदि का सेवन ना करें।</li><li>सोमवार और शनिवार के दिन शिव मंदिर जाएं या घर पर ही इन दिनों पर शिव की उपासना करें।</li></ul><p></p><h3 class="wp-block-heading">रुद्राक्ष पहनकर क्या नहीं करना चाहिए? <strong>जानिए कब और किसे धारण&nbsp;नहीं करना चाहिए&nbsp;'रुद्राक्ष'</strong></h3><ol class="wp-block-list"><li>करते हैं मदिरा का सेवन तो न पहनें: अगर आप मदिरा या तामसिक भोजन के सेवन के शौकीन हैं और उन्हें छोड़&nbsp;<strong>नहीं</strong>&nbsp;सकते तो फिर आपको&nbsp;<strong>रुद्राक्ष</strong>&nbsp;धारण&nbsp;<strong>नहीं करना चाहिए</strong>। ...</li><li>सोते समय उतार दें&nbsp;<strong>रुद्राक्ष</strong>: सोने से पहले&nbsp;<strong>रुद्राक्ष</strong>&nbsp;को उतार देना&nbsp;<strong>चाहिए</strong>।</li></ol><h3 class="wp-block-heading">7 मुखी रुद्राक्ष की पहचान कैसे करें?</h3><figure class="wp-block-gallery has-nested-images columns-default is-cropped"><figure class="wp-block-image size-large"><img src="http://localhost:10004/wp-content/uploads/2021/11/108-Beads-Knotted-Japa-Rudraksha-Mala-5-Face-Rudraksha-Knotted-Mala-108-Prayer-Mala-Rudraksha-Shiva-Meditation-Buddhist-Prayer-Beads-Etsy-1.jpg" class="wp-image-16430"/></figure></figure><p>पद्म पुराण के अनुसार&nbsp;<strong>7 मुखी रुद्राक्ष</strong>&nbsp;के मुखो में अनंत, कर्कट, पुण्डरीक, तक्षक, शंखचूड़,वशोशिबन व करोष आदि का वास होता है इसलिए धारणकर्ता सर्पभय से मुक्त हो जाता है। इसमें ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वराही, इन्द्राणी, चामुंडा नामक सप्तमातृका भी वास करती है जो धारणकर्ता पर सभी सांसारिक सुखों की वर्षा करती है।</p><p><br/><strong>राशि विशेष:</strong><br/> मकर और कुम्भ राशि वाले जातको के लिए ये रुद्राक्ष विशेष रूप से उत्तम माना जाता है।</p><h3 class="wp-block-heading"><strong>सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि</strong></h3><p>पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें और सात मुखी रुद्राक्ष को एक थाली में रखें। इसक बीजों पर चंदन का पेस्‍ट लगाएं और 108 बार इस मंत्र का जाप करें :</p><h3 class="wp-block-heading"><br/><strong>सात मुखी रुद्राक्ष मन्त्र:</strong></h3><p>७ मुखी रुद्राक्ष को धारण करने का मन्त्र है:<br/> “ॐ हूँ नमः”<br/> “ॐ महालक्ष्मी नमः”<br/> “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥”</p><p></p><p><strong>क्या मैं 7 मुखी रुद्राक्ष पहन सकता हूँ?</strong></p><p>सात मुखी रुद्राक्ष पहनने वाले को अच्छा स्वास्थ्य और धन मिलता है। सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति व्यवसाय और सेवा में अधिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। जो लोग शरीर, स्वास्थ्य, वित्त और मनोवैज्ञानिक तंत्र से संबंधित दुखों से पीड़ित हैं, उन्हें सात मुखी रुद्राक्ष पहनना चाहिए।</p><p></p><p><strong>ओरिजिनल एवं सही मूल्य पर रुद्राक्ष खरीदें ने के लिए संपर्क करें </strong></p><p></p><p><strong><strong><a href="http://localhost:10004/product/seven-mukhi-rudraksha/">अभी खरीदें 7 मुखी रुद्राक्ष</a><a href="http://www.astrovidhi.com/hindi/product/7-mukhi-rudraksha-pendant/?utm_source=blog&amp;utm_medium=linkclick&amp;utm_campaign=7mukhipendantblog" target="_blank" rel="noreferrer noopener">&nbsp;</a></strong></strong></p><p></p><p>हिन्दू संस्कृति या सनातन धर्म के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने हेतु या जानने हेतु आप हमसे हमारी ईमेल आईडी&nbsp;askus@jaymahakaal.com&nbsp;पर संपर्क कर सकते है।</p><p>हमारे&nbsp;<a href="https://www.facebook.com/JayMahakal01/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">फ़ेसबुक</a>&nbsp;लिंक&nbsp;को लाइक एवं शेयर करें&nbsp;और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए&nbsp;<a href="http://localhost:10004/"><strong>www.jaymahakaal.com</strong></a></p><p>रुद्राक्ष, क्रिस्टल्स, इत्यादि के बारे में जानकारी या खरीदने हेतु, आप हमसे इस नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं&nbsp;<a href="tel:9152203064">+91 – 9324801420&nbsp;</a>पर</p><p><strong><mark>👉👉<a href="http://localhost:10004/shop/">आज ही असली और प्रमाणित रुद्राक्ष खरीदें।</a></mark></strong></p><p>यदि आपको हमारा आर्टिकल पसंद आए हो, तो नीचे दिए गये कॉमेंट बॉक्स में अपनी राय हमें अवश्य दें</p><p><strong>जय महाकाल।।</strong></p><p></p></div></div>
</div></div></div></div></div></div> ]]></content:encoded><pubDate>Wed, 10 Nov 2021 09:41:28 +0530</pubDate></item><item><title><![CDATA[गुप्त नवरात्रि कब से है? आईये जानते हैं इसकी विशेषता एवं पूजन]]></title><link>https://www.jaymahakaal.com/blogs/post/when-is-gupta-navaratri-and-from-when-it-starts</link><description><![CDATA[गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त रूप से देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को ‘शक्ति’ के रूप में जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि के पीछे मुख्य कारण क्या है जानते ]]></description><content:encoded><![CDATA[
<div class="zpcontent-container blogpost-container "><div data-element-id="elm_CAbHrruBS1m5xT5X_NnGCA" data-element-type="section" class="zpsection "><style type="text/css"></style><div class="zpcontainer"><div data-element-id="elm_21bM0C4JQlO6wps8qTdQWg" data-element-type="row" class="zprow zpalign-items- zpjustify-content- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_EzDcytsoSiunJXm8qI07vQ" data-element-type="column" class="zpelem-col zpcol-12 zpcol-md-12 zpcol-sm-12 zpalign-self- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_DZP4QhBASfah002KC2v0GA" data-element-type="text" class="zpelement zpelem-text "><style></style><div class="zptext zptext-align-center " data-editor="true"><div>गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त रूप से देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को ‘शक्ति’ के रूप में जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि के पीछे मुख्य कारण क्या है जानते है आईये, कि देवी की पूजा गुप्त रूप से की जाती है, जो बाकी दुनिया से छिपी होती है। यह मुख्य रूप से साधुओं और तांत्रिकों द्वारा शक्ति की देवी को प्रसन्न करने के लिए व तंत्र साधना के लिए मनाया जाता है जो हमेशा से गलत सोच है ओर कारण भी गुप्त नवरात्रि हो या नवरात्रि हमेशा साधक या सिद्ध संत ,तांत्रिक हमेशा जो साधनाये करते है उनको गुप्त रखा जाता है यही सत्य है उनको उजागर ना करके गोपनियता बनाये रखता है । जिनकी चर्चा केवल गुरू शिष्य मे हो सकती है यह आम आदमी भी कर सकते है । जिनमे सेवा ओर परोपकार की दृष्टिकोण हो पर हमेशा ध्यान रहे सिद्धियो के पीछे भागने से सिद्धियाँ नही मिलती बस आप कर्म करते रहे उनकी कृपा मिल ही जाती है, । मित्रो गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त अनुष्ठान किए जाते हैं जहां देवी दुर्गा की पूजा इस समय के दौरान देवी दुर्गा के नव रूपो या सिद्ध दसमहाविधा के रूपों को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। इनके अलावा ग्रहण, तीज त्योहार, पर्व मे भी साधनाये होती है जो अति गुप्त रहती है जिनको उजागर नही किया जाता यही सत्य है नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर। और मित्रो ऐसा माना जाता है कि इस त्यौहार के दौरान भक्त देवी की पूजा करके अपनी सभी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं लेकिन अनुष्ठानों को गुप्त रखने की आवश्यकता होती है क्योंकि पूजा की सफलता इसके पीछे गोपनीयता की मात्रा पर निर्भर करती है। <strong>गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजी जाने वाली देवी दुर्गा के विभिन्न रूप हैं-</strong><ol><li>माँ कालिके</li><li>तारा देवी</li><li>त्रिपुर सुंदरी</li><li>भुवनेश्वरी</li><li>माता चित्रमस्ता</li><li>त्रिपुर भैरवी</li><li>माँ धूम्रवती</li><li>माता बगलामुखी</li><li>मातंगी</li><li>कमला देवी</li></ol> इस शुभ अवसर के दौरान मंत्रों का जाप, देवी दुर्गा की उत्पत्ति का वर्णन करते हैं और राक्षस महिषासुर का मुकाबला करने के लिए कैसे सभी देवताओं की शक्तियां देवी में समाहित हुईं ताकि वह उसका वध कर सकें, और दुनिया की बुरी शक्तियों पर उनकी जीत हो। पूजा के दौरान प्रथाऐं - गुप्त नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के दौरान, तंत्र मंत्र साधना में विश्वास करने वाले, अपने गुप्त तांत्रिक क्रियाकलापों के साथ-साथ सामान्य नवरात्रि की तरह ही उपवास करते हैं और अन्य अनुष्ठान करते हैं। 9 दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जाती है। <strong>कलश स्थापन 2021:</strong> देवी दुर्गा के सामने दुर्गा सप्तशती मार्ग और मार्खदेव पुराण का पाठ किया जाता है। नवरात्रि के सभी दिनों में उपवास या सात्विक आहार का सेवन किया जाता है। <strong>गुप्त नवरात्रि व्रत का पालन करने के लाभ:</strong> गुप्त नवरात्रि, जिसे गायत्री नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ महीने के दौरान मनाया जाता है जो आमतौर पर जून-जुलाई के बीच आता है। इस 9-दिवसीय धार्मिक क्रिया के दौरान देवी दुर्गा को प्रसन्न करने का मुख्य तरीका तंत्र विद्या के मंत्रों के साथ देवी के शक्तिशाली आह्वान को मंत्रमुग्ध करना है। गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना शामिल है। गुप्त नवरात्रि की पूजा शैतानी ताकतों के प्रभाव को खत्म करने के लिए की जाती है? जिसे भक्तों के दिलों से बुराई के डर को दूर करने के लिए शक्तिशाली माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा को शक्तिशाली मंत्र और गुप्त तंत्र विद्या व तांत्रिक साधनाओं के रूप में गुप्त पूजा की पेशकश की जाती है, जो भक्तों को सभी इच्छाओं और आशाओं को पूरा करने के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त करने में मदद करती हैं। ओर दसवे दिन भैरव बाबा की पुजा होती है यह केवल जानकार या गुरू गाम्य शिष्य करते है,। कुछ पुजा अर्चना के संबंध मे जानकारी, और मुर्हत,। नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री ● माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र ● लाल चुनरी ● आम की पत्तियाँ ● चावल ● दुर्गा सप्तशती की किताब ● लाल कलावा ● गंगा जल ● चंदन ● नारियल ● कपूर ● जौ के बीच ● मिट्टी का बर्तन ● गुलाल ● सुपारी ● पान के पत्ते ● लौंग ● इलायची <strong>नवरात्रि पूजा विधि </strong> ● सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें ● ऊपर दी गई पूजा सामग्री को एकत्रित करें ● पूजा की थाल सजाएँ ● माँ दर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र में रखें ● मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोयें और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें ● पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें। इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियाँ लगाएं और उपर नारियल रखें। कलश को लाल कपड़े से लपेंटे और कलावा के माध्यम से उसे बाँधें। अब इसे मिट्टी के बर्तन के पास रख दें ● फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें ● नौ दिनों तक माँ दुर्गा से संबंधित मंत्र का जाप करें और माता का स्वागत कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें ● अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं ● आखिरी दिन दुर्गा के पूजा के बाद घट विसर्जन करें इसमें माँ की आरती गाएं, उन्हें फूल, चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं,। नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी अब मुहूर्त के बारे मे जानते है। नवरात्रि शुरू : 12 फरवरी 2021, दिन शुक्रवार नवरात्रि समाप्त : 21 फरवरी 2021, दिन रविवार कलश स्थापना मुहूर्त सुबह : 08:34 AM से 09:59 AM अभिजीत मुहूर्त दिन में : 12:13 PM से 12:58 PM <p lang="en-IN">हमारे facebook लिंक <a href="https://www.facebook.com/JayMahakal01/">https://www.facebook.com/JayMahakal01/</a> को लाइक और शेयर&nbsp;करें ट्विटर&nbsp;और इंस्टाग्राम पर फॉलो करे हमारा handle है @jaymahakaal01 और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए <a href="http://localhost:10004">www.jaymahakaal.com</a></p> हिन्दू संस्कृति या सनातन धर्म के बारे में, व्रत, त्योहार की तिथि नियम जैसे किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने हेतु अथवा रेकी, नुमेरोलॉजी, हीलिंग, रुद्राक्ष, क्रिस्टल, कुंडली, वास्तु, हस्त रेखा, विवाह, घर, धन में कमी, प्रमोशन, नौकरी इत्यादि से सम्बंधित कोई समस्या हो तो आप हमें इस नंबर पर व्हाट्सप्प कर सकते हैं 9152203064 <span lang="en-IN">हमारी </span><span lang="hi">ईमेल</span><span lang="hi">आईडी</span><span lang="en-IN">askus@jaymahakaal.com </span><span lang="en-IN">पर </span><span lang="hi">संपर्क</span><span lang="hi">कर</span><span lang="hi">सकते</span><span lang="hi">है।</span></div></div>
</div></div></div></div></div></div> ]]></content:encoded><pubDate>Thu, 28 Jan 2021 14:00:50 +0530</pubDate></item><item><title><![CDATA[गुप्त नवरात्रि कब से है? आईये जानते हैं इसकी विशेषता एवं पूजन]]></title><link>https://www.jaymahakaal.com/blogs/post/when-is-gupta-navaratri-and-from-when-it-starts-1</link><description><![CDATA[गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त रूप से देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को ‘शक्ति’ के रूप में जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि के पीछे मुख्य कारण क्या है जानते ]]></description><content:encoded><![CDATA[
<div class="zpcontent-container blogpost-container "><div data-element-id="elm_7iJjYpQCTc-skCRvSGxW5A" data-element-type="section" class="zpsection "><style type="text/css"></style><div class="zpcontainer"><div data-element-id="elm_J0Y2FJvUTdqhbNe5vygbuA" data-element-type="row" class="zprow zpalign-items- zpjustify-content- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_4XyqXZDlQ9W8T3KGMT__kA" data-element-type="column" class="zpelem-col zpcol-12 zpcol-md-12 zpcol-sm-12 zpalign-self- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_KaAhzhxtTGmRx5aZwdQHlQ" data-element-type="text" class="zpelement zpelem-text "><style></style><div class="zptext zptext-align-center " data-editor="true"><div>गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त रूप से देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को ‘शक्ति’ के रूप में जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि के पीछे मुख्य कारण क्या है जानते है आईये, कि देवी की पूजा गुप्त रूप से की जाती है, जो बाकी दुनिया से छिपी होती है। यह मुख्य रूप से साधुओं और तांत्रिकों द्वारा शक्ति की देवी को प्रसन्न करने के लिए व तंत्र साधना के लिए मनाया जाता है जो हमेशा से गलत सोच है ओर कारण भी गुप्त नवरात्रि हो या नवरात्रि हमेशा साधक या सिद्ध संत ,तांत्रिक हमेशा जो साधनाये करते है उनको गुप्त रखा जाता है यही सत्य है उनको उजागर ना करके गोपनियता बनाये रखता है । जिनकी चर्चा केवल गुरू शिष्य मे हो सकती है यह आम आदमी भी कर सकते है । जिनमे सेवा ओर परोपकार की दृष्टिकोण हो पर हमेशा ध्यान रहे सिद्धियो के पीछे भागने से सिद्धियाँ नही मिलती बस आप कर्म करते रहे उनकी कृपा मिल ही जाती है, । मित्रो गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त अनुष्ठान किए जाते हैं जहां देवी दुर्गा की पूजा इस समय के दौरान देवी दुर्गा के नव रूपो या सिद्ध दसमहाविधा के रूपों को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। इनके अलावा ग्रहण, तीज त्योहार, पर्व मे भी साधनाये होती है जो अति गुप्त रहती है जिनको उजागर नही किया जाता यही सत्य है नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर। और मित्रो ऐसा माना जाता है कि इस त्यौहार के दौरान भक्त देवी की पूजा करके अपनी सभी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं लेकिन अनुष्ठानों को गुप्त रखने की आवश्यकता होती है क्योंकि पूजा की सफलता इसके पीछे गोपनीयता की मात्रा पर निर्भर करती है। <strong>गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजी जाने वाली देवी दुर्गा के विभिन्न रूप हैं-</strong><ol><li>माँ कालिके</li><li>तारा देवी</li><li>त्रिपुर सुंदरी</li><li>भुवनेश्वरी</li><li>माता चित्रमस्ता</li><li>त्रिपुर भैरवी</li><li>माँ धूम्रवती</li><li>माता बगलामुखी</li><li>मातंगी</li><li>कमला देवी</li></ol> इस शुभ अवसर के दौरान मंत्रों का जाप, देवी दुर्गा की उत्पत्ति का वर्णन करते हैं और राक्षस महिषासुर का मुकाबला करने के लिए कैसे सभी देवताओं की शक्तियां देवी में समाहित हुईं ताकि वह उसका वध कर सकें, और दुनिया की बुरी शक्तियों पर उनकी जीत हो। पूजा के दौरान प्रथाऐं - गुप्त नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के दौरान, तंत्र मंत्र साधना में विश्वास करने वाले, अपने गुप्त तांत्रिक क्रियाकलापों के साथ-साथ सामान्य नवरात्रि की तरह ही उपवास करते हैं और अन्य अनुष्ठान करते हैं। 9 दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जाती है। <strong>कलश स्थापन 2021:</strong> देवी दुर्गा के सामने दुर्गा सप्तशती मार्ग और मार्खदेव पुराण का पाठ किया जाता है। नवरात्रि के सभी दिनों में उपवास या सात्विक आहार का सेवन किया जाता है। <strong>गुप्त नवरात्रि व्रत का पालन करने के लाभ:</strong> गुप्त नवरात्रि, जिसे गायत्री नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ महीने के दौरान मनाया जाता है जो आमतौर पर जून-जुलाई के बीच आता है। इस 9-दिवसीय धार्मिक क्रिया के दौरान देवी दुर्गा को प्रसन्न करने का मुख्य तरीका तंत्र विद्या के मंत्रों के साथ देवी के शक्तिशाली आह्वान को मंत्रमुग्ध करना है। गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना शामिल है। गुप्त नवरात्रि की पूजा शैतानी ताकतों के प्रभाव को खत्म करने के लिए की जाती है? जिसे भक्तों के दिलों से बुराई के डर को दूर करने के लिए शक्तिशाली माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा को शक्तिशाली मंत्र और गुप्त तंत्र विद्या व तांत्रिक साधनाओं के रूप में गुप्त पूजा की पेशकश की जाती है, जो भक्तों को सभी इच्छाओं और आशाओं को पूरा करने के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त करने में मदद करती हैं। ओर दसवे दिन भैरव बाबा की पुजा होती है यह केवल जानकार या गुरू गाम्य शिष्य करते है,। कुछ पुजा अर्चना के संबंध मे जानकारी, और मुर्हत,। नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री ● माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र ● लाल चुनरी ● आम की पत्तियाँ ● चावल ● दुर्गा सप्तशती की किताब ● लाल कलावा ● गंगा जल ● चंदन ● नारियल ● कपूर ● जौ के बीच ● मिट्टी का बर्तन ● गुलाल ● सुपारी ● पान के पत्ते ● लौंग ● इलायची <strong>नवरात्रि पूजा विधि </strong> ● सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें ● ऊपर दी गई पूजा सामग्री को एकत्रित करें ● पूजा की थाल सजाएँ ● माँ दर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र में रखें ● मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोयें और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें ● पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें। इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियाँ लगाएं और उपर नारियल रखें। कलश को लाल कपड़े से लपेंटे और कलावा के माध्यम से उसे बाँधें। अब इसे मिट्टी के बर्तन के पास रख दें ● फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें ● नौ दिनों तक माँ दुर्गा से संबंधित मंत्र का जाप करें और माता का स्वागत कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें ● अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं ● आखिरी दिन दुर्गा के पूजा के बाद घट विसर्जन करें इसमें माँ की आरती गाएं, उन्हें फूल, चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं,। नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी अब मुहूर्त के बारे मे जानते है। नवरात्रि शुरू : 12 फरवरी 2021, दिन शुक्रवार नवरात्रि समाप्त : 21 फरवरी 2021, दिन रविवार कलश स्थापना मुहूर्त सुबह : 08:34 AM से 09:59 AM अभिजीत मुहूर्त दिन में : 12:13 PM से 12:58 PM <p lang="en-IN">हमारे facebook लिंक <a href="https://www.facebook.com/JayMahakal01/">https://www.facebook.com/JayMahakal01/</a> को लाइक और शेयर&nbsp;करें ट्विटर&nbsp;और इंस्टाग्राम पर फॉलो करे हमारा handle है @jaymahakaal01 और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए <a href="http://localhost:10004">www.jaymahakaal.com</a></p> हिन्दू संस्कृति या सनातन धर्म के बारे में, व्रत, त्योहार की तिथि नियम जैसे किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने हेतु अथवा रेकी, नुमेरोलॉजी, हीलिंग, रुद्राक्ष, क्रिस्टल, कुंडली, वास्तु, हस्त रेखा, विवाह, घर, धन में कमी, प्रमोशन, नौकरी इत्यादि से सम्बंधित कोई समस्या हो तो आप हमें इस नंबर पर व्हाट्सप्प कर सकते हैं 9152203064 <span lang="en-IN">हमारी </span><span lang="hi">ईमेल</span><span lang="hi">आईडी</span><span lang="en-IN">askus@jaymahakaal.com </span><span lang="en-IN">पर </span><span lang="hi">संपर्क</span><span lang="hi">कर</span><span lang="hi">सकते</span><span lang="hi">है।</span></div></div>
</div></div></div></div></div></div> ]]></content:encoded><pubDate>Thu, 28 Jan 2021 14:00:50 +0530</pubDate></item></channel></rss>