<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" ?><!-- generator=Zoho Sites --><rss version="2.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"><channel><atom:link href="https://www.jaymahakaal.com/blogs/tag/अष्टमी/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><title>Jaymahakaal Centre of Occult Sciences - Blog ##अष्टमी</title><description>Jaymahakaal Centre of Occult Sciences - Blog ##अष्टमी</description><link>https://www.jaymahakaal.com/blogs/tag/अष्टमी</link><lastBuildDate>Fri, 10 Apr 2026 09:24:31 +0530</lastBuildDate><generator>http://zoho.com/sites/</generator><item><title><![CDATA[चैत्र नवरात्रि घटस्थापना महुरत 2021]]></title><link>https://www.jaymahakaal.com/blogs/post/chaitranavratri-ghatsthapna-mahurat-2021</link><description><![CDATA[भारत में नवरात्रि मुख्य रूप से दो बार मनाई जाती है। एक शारदीय नवरात्रि जो नवंबर के महीने में आती है। इस नवरात्रि में महाअष्टमी और महानवमी का त्यौहार आ ]]></description><content:encoded><![CDATA[
<div class="zpcontent-container blogpost-container "><div data-element-id="elm_HK__JBBvTPKIrsm8wKQWqA" data-element-type="section" class="zpsection "><style type="text/css"></style><div class="zpcontainer"><div data-element-id="elm_umtU7gkiQV2ClkT90bOwIg" data-element-type="row" class="zprow zpalign-items- zpjustify-content- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_q46s-8ovRiupzttXuh1cxg" data-element-type="column" class="zpelem-col zpcol-12 zpcol-md-12 zpcol-sm-12 zpalign-self- "><style type="text/css"></style><div data-element-id="elm_bOJJSgBUQPmtI8J8NXN7EA" data-element-type="text" class="zpelement zpelem-text "><style></style><div class="zptext zptext-align-center " data-editor="true"><div><strong>भारत</strong> में नवरात्रि मुख्य रूप से दो बार मनाई जाती है। एक <strong>शारदीय नवरात्रि</strong> जो नवंबर के महीने में आती है। इस नवरात्रि में <strong>महाअष्टमी</strong> और <strong>महानवमी</strong> का त्यौहार आता है। वहीं, एक <strong>चैत्र नवरात्रि</strong> जो मार्च या अप्रैल के महीने में मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि में राम नवमी का पर्व आता है। दोनों ही नवरात्रि में <strong>मां दुर्गा</strong> के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि में हम मां दुर्गा की मूर्तियां भले ही न बैठाते हों लेकिन विधान के अनुसार, हम उनकी पूरे श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल, 2021 को शुरू हो रही है। इस बार दुर्गा अष्टमी 20 अप्रैल, 2021 को होगी और <strong>श्रीराम नवमी</strong> 21 अप्रैल, 2021 को होगी. हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार हर साल चैत्र महीने के पहले दिन से ही <strong>नव वर्ष</strong> की शुरुआत हो जाती है। साथ ही इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाती हैं। इसे महाराष्ट्र में <strong>गुड़ी पड़वा</strong> के तौर पर भी जाना जाता है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस पर्व को <strong>उगादि</strong> के रूप में मनाया जाता है। इस साल नवरात्रि के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग आदि शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। &nbsp; <strong>घटस्थापना के दिन शुभ मुहूर्त-</strong> अमृतसिद्धि योग - 13 अप्रैल की सुबह 06 बजकर 11 मिनट से दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक। सर्वार्थसिद्धि योग - 13 अप्रैल की सुबह 06 बजकर 11 मिनट से 13 अप्रैल की दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक। अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से&nbsp; दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक। अमृत काल - सुबह 06 बजकर 15 मिनट से 08 बजकर 03 मिनट तक। ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 35 मिनट से सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक। &nbsp; <strong>नवरात्रि </strong><strong>की</strong><strong>अंखड</strong><strong>ज्योति</strong><strong>: </strong>नवरात्रि की अखंड ज्योति का बहुत महत्व होता है। आपने देखा होगा मंदिरों और घरों में नवरात्रि के दौरान दिन रात जलने वाली ज्योति जलाई जाती है। माना जाता है हर पूजा दीपक के बिना अधूरी है और ये ज्योति ज्ञान, प्रकाश, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होती है। <strong>नौ </strong><strong>दिन</strong><strong>या</strong><strong>रात</strong><strong>: </strong>अमावस्या की रात से अष्टमी तक या प्रतिपदा से नवमी की दोपहर तक व्रत-नियम चलने से नौ रात यानी 'नवरात्र' नाम सार्थक है। यहां रात गिनते हैं इसलिए नवरात्र यानी नौ रातों का समूह कहा जाता है। रूपक द्वारा हमारे शरीर को 9 मुख्य द्वारों वाला कहा गया है। इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है। इन मुख्य इन्द्रियों के अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारु रूप से क्रियाशील रखने के लिए 9 द्वारों की शुद्धि का पर्व 9 दिन मनाया जाता है। शरीर को सुचारु रखने के लिए विरेचन, <strong>सफाई या शुद्धि प्रतिदिन</strong> तो हम करते ही हैं किंतु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर 6 माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है। <strong>सात्विक आहार</strong> के व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि, साफ-सुथरे शरीर में शुद्ध बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुद्ध होता है। स्वच्छ मन-मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है। नवरात्र पर्व से जुड़े यदि समस्या, सवाल हो तो आप हमें <a href="mailto:askus@jaymahakaal.com">askus@jaymahakaal.com</a> पर या नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। ओरिजिनल रत्न, रुद्राक्ष, क्रिस्टल, कुंडली खरीदने हेतु या रेकी और कुंडली से जुड़ी समस्या के लिए आप हमसे <a href="tel:9152203064">9152203064</a> पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही जुड़े रहे हमसे @jaymahakaal01 पर और विजिट करते रहें&nbsp; <a href="http://localhost:10004/">www.jaymahakaal.com</a> &nbsp; &nbsp;</div></div>
</div></div></div></div></div></div> ]]></content:encoded><pubDate>Sun, 11 Apr 2021 17:46:32 +0530</pubDate></item><item><title><![CDATA[चैत्र नवरात्रि घटस्थापना महुरत 2021]]></title><link>https://www.jaymahakaal.com/blogs/post/chaitranavratri-ghatsthapna-mahurat-2021-1</link><description><![CDATA[भारत में नवरात्रि मुख्य रूप से दो बार मनाई जाती है। एक शारदीय नवरात्रि जो नवंबर के महीने में आती है। इस नवरात्रि में महाअष्टमी और महानवमी का त्यौहार आ ]]></description><content:encoded><![CDATA[
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