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Dakshinavarti Shankh – Benefits, Usage and importance

WHAT IT IS? Dakshinavarti Shankh is a sacred Hindu object also known as conch shell in English. As per the Shastras and religion, this shell holds a lot of importance in our sect. This shell is found in the Indian ocean from the shell of a large sea snail and that too from the one that has the very rare reverse turning spiral. It has been named Dakshinavarti as when it is held with the spout (siphonal canal) pointed up, this conch's spiral twists rightwards (dakshinavarti) rather than very much more common form, which twists leftwards (vamavarti). Importance of Da

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Why we immerse idol in water

Due to Chaitanya in Idols of Shri Ganapati on immersion it purifies the water. With the flowing water, this Chaitanya reaches far and wide and many people benefit from them. This water evaporates, too; hence, it makes the atmosphere sattvik (Sattva-predominant). A. ‘Donation of Idol’ is unscientific, ‘immersion of Idol’ is most appropriate : It is mentioned in the scriptures, that immersion of Shri Ganesh Idol should necessarily be done in flowing water or a reservoir. However, some people view the immersion of the Idol as an act that causes water pollution, famine etc.

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गणपति की कौनसी मूर्ति है सही?

गाजे बाजे के साथ गणपति बप्पा हमारे द्वार पर दस्तक देने आ रहे हैं। अधिकतर घरों में गणेशजी की प्रतिमा स्थापित कर 10 दिन तक उत्सव की पूरी तैयारी है, लेकिन गणेश प्रतिमा को लेकर कुछ बिंदु ऎसे हैं, जिन्हें लेकर असमंजस की स्थिति रहती है। जैसे भगवान की सूंड किस तरफ होना चाहिए, प्रतिमा खड़ी हुई होना चाहिए या बैठे हुए विग्रह की स्थापना की जाना चाहिए। मूषक या रिद्धि-सिद्धि साथ हो या ना हो। इसे लेकर हमने विद्वानों से बात कि, उनका मानना है कि दोनों ही तरफ की सूंड वाले गणेश जी शुभ होते हैं? दाई और की सूंड वाले सिद्धि विनायक कहलाते हैं तो बाई सूंड वाले वक्रतुंड हालांकि शास्त्रों में द

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क्यों मनाते हैं गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी बुद्धि एवं ज्ञान के देवता भगवान गणेश की पूजा का सबसे बड़ा दिन माना जाता है, गणेशोत्सव भारत के सबसे बड़े हिन्दू पर्वों में से एक है। गणेशोत्सव देश भर में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसकी धूम कुछ ज्यादा ही होती है। इस त्योहार में हिन्दू धर्म के प्रथम पूज्य देवता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को इसे मनाया जाता है। नारद पुराण के अनुसार भगवान शिव ने देवी पार्वती द्वारा उत्पन्न बालक की गर्दन काट दी थी, जिसके बाद माता पार्वती के कहने पर भगवान शिव ने उस बालक के धड़ में एक हाथी का सिर लगा दिया

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