Special 40% Discount for First 10 Customers use Coupon Code: FIRST10

११ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तियाँ एवं महत्व

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष रूद्र के ग्यारहवे अवतार हनुमान जी का प्रतिनिधित्व करता है, इस रुद्राक्ष के धारक को शनि गृह से होने वाली विपत्तियों से छुटकारा मिलता है और शनि की साढ़े साती के समय भी धारक को नुकसान नहीं उठाना पड़ता है। इस रुद्राक्ष के धारक को भगवान् शिव और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। ११ मुखी रुद्राक्ष विशुद्धि चक्र का नियंत्रक होता है, इस चक्र द्वारा ही हमें सुनने और बोलने की कला में पारंगतता प्राप्त होती है, ये चक्र हमारे शरीर का शुद्धि केंद्र होता है और इसी चक्र द्वारा हमें ज्ञान, इच्छाशक्ति, सच्चाई और पसंद की शक्ति प्राप्त होती है।

इस रुद्राक्ष को धारण करने से सैकड़ो शत्रुओ पर भी विजय प्राप्त होती है साथ ही साथ यह रुद्राक्ष हर प्रकार के तांत्रिक प्रयोगो से भी धारक की रक्षा करता है। ऐसा भी माना जाता है की इस रुद्राक्ष ११ रुद्रो द्वारा शाषित है इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला मनुष्य आध्यात्मिक तथा भौतिक सुखो का उपभोग करता है। यह रुद्राक्ष धारक को जागरूकता के उच्च स्तर, दिव्य चेतना, ज्ञान और सही निर्णय लेने में मदद करता है। इस रुद्राक्ष का कोई स्वामी ग्रह नहीं होता है अतः यह रुद्राक्ष सभी ग्रहो के दुष्प्रभाव को कम करता है।

महत्त्व:
१. इस रुद्राक्ष के धारण करने वाले जातक को हनुमान जी की कृपा हासिल होती है।
२. घर में भूत-प्रेत की बाधा हो तो इस रुद्राक्ष को धारण करने की सलाह दी जाती है।
३. यह वृद्धि की एकाग्रता, स्मृति और रचनात्मकता में मदद करता है।

लाभ:
१. यह धारक को मजाकिया, बोल्ड, तार्किक, अभिव्यंजक और बुद्धिमान बनाता है।
२.हर प्रकार की मुसीबतो से छुटकारा दिलाता है।
३. प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने वालो के लिए यह रुद्राक्ष अति उत्तम माना जाता है।
४.इस रुद्राक्ष को धारण करने से मुनष्य की संपूर्ण कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।

चिकित्स्कीय लाभ:
१. स्वसन तंत्र की बीमारियों और अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों को आराम दिलाता है।
२. ब्रोंकाइटिस से पीड़ित व्यक्तियों के लिए अति उत्तम माना जाता है।
३.यह थायरॉइड ग्रंथि के कार्य को नियंत्रित करता है और प्रतिरक्षा में सुधार करता है।

कौन करे धारण:
रूद्र और हनुमान जी की उपासना करने वाले सभी जातकों को ग्यारह मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।

रुद्राक्ष मंत्र:
इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं हूं नमः” है । इसको धारण करने के पश्चात नित्य प्रति पांच माला “ॐ नमः शिवाय” या तीन माला ऊपर लिखे हुए मंत्र की या एक माला मृत्युंजय मंत्र की जाप करनी चाहिए ताकि भगवान शिव के ग्यारह रुद्रों सहित मर्यादा पुरषोत्तम प्रभु श्री राम जी के अनन्य भक्त श्री हनुमान जी की भी कृपा प्राप्त की जा सके । पांच मुखी रुद्राक्ष की माला में ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को सुमेरु के रूप में लगाकर धारण करना अति उत्तम कहा गया है ।

Click & Buy 11 Mukhi Rudraksha at Jaymahakaal.

हिन्दू संस्कृति या सनातन धर्म के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने हेतु या जानने हेतु आप हमसे हमारी ईमेल आईडी [email protected] पर संपर्क कर सकते है। हमारे फ़ेसबुक लिंक

https://www.facebook.com/JayMahakal01/ को लाइक एवं शेयर करें  और इंस्टाग्राम पर फॉलो करे हमारा हॅंडल है

jaymahakaal01 और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए

 www.jaymahakaal.com

रुद्राक्ष, क्रिस्टल्स, इत्यादि के बारे में जानकारी या खरीदने हेतु, आप हमसे इस नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं +91 – 9324801420 पर Check Jay Mahakaal’s Rudraksh Online Store.

Like this article?

Share on facebook
Share on Facebook
Share on twitter
Share on Twitter
Share on linkedin
Share on Linkdin
Share on pinterest
Share on Pinterest