किन्हें पहनना चाहिए हीरा?

नवरत्नों में हीरा सबसे अधिक महंगा और लग्जरीयस रत्न है। यह ऐश्वर्य का प्रतीक है। इसे पहनना स्टेटस सिंबल है, इसलिए आजकल कई लोग हीरा आभूषण के रूप में पहनने लगे हैं।


हीरा सभी के लिए नहीं है। बिना सोचे समझे और बिना उचित ज्योतिषीय सलाह के धारण किया गया हीरा जातक के पतन का कारण भी बन सकता है। हीरे का संबंध शुक्र से है और शुक्र प्रेम, सौंदर्य, आकर्षण, दांपत्य जीवन और यौन सुख का प्रतिनिधि ग्रह है। जिन लोगों की कुंडली में शुक्र मजबूत स्थिति में होता है उनके लिए हीरा पहनना अत्यंत शुभ होता है। ऐसे लोगों को जीवन के समस्त ऐश्वर्य, सुख और भोग-विलास के साधन प्राप्त हो जाते हैं

शुक्र ऐश्वर्य, विलासिता, भोग, वाहन, राजसुख, स्त्री व इंद्रिय सुख आदि का प्रतिनिधित्व करता है। यानि संसार के समस्त भौतिक सुख शुक्र से प्राप्त होते हैं। जिस भी जातक की जन्म कुंडली में शुक्र बलवान होता है, उसे ऐसे समस्त सुख मिल जाते हैं। लेकिन विपरीत व नकारात्मक शुक्र की दशा में ठीक इससे विपरीत हालात होते हैं। जन्म कुंडली में यदि शुक्र नीच, अस्त, शत्रु गृही अथवा कुंडली के छठे, आठवें और बारहवें भाव में हो तो यह सबसे खराब होता है।

मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न में हीरा पहनना शुभ नहीं होता है। इनमें से वृश्चिक लग्न के जातको को तो हीरा भूल से भी नहीं पहनना चाहिए। हालांकि वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न में हीरा बहुत शुभ होता है। वृषभ और तुला लग्न के जातको के लिए हीरा सदा लाभकारी होता है!

हीरा धारण करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इसके साथ मोती, माणिक्य या पीला पुखराज धारण करने से भी यह अशुभ फलदायक हो सकता है।

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