अवचेतन मन और उसकी शक्ति – भाग १

न्यूटन ने गज़ब की खोजें की, आइंस्टीन ने अपनी खोजो से इतिहास रच दिया, गैलीलियो और उनकी खोजो के बारे में कौन नहीं जनता है, कभी आपने सोचने की कोशिश की कौन था उनकी खोजो और अविष्कारो के पीछे, ऐसे आविष्कार जिन्होंने सारी दुनिया को चमत्कृत कर दिया और विश्व को एक नयी क्रांति से अवगत कराया। ये सारा खेल उनके अवचेतन मन का था, जी हां सुनने में आपको अजीब जरूर लगेगा, लेकिन यही वो कटु सत्य है जिसके दम पर वो इन उचाईयो को छूने में कामयाब हो सके।

हमारा दिमाग ही हमारा शत्रु है और वही हमारा मित्र है, वो हमें ऐसी चीज़े ला कर दे सकता है जो हमारी सोच से भी पर हो, बस शर्त ये है की हम उसे कैसे प्रयोग करते है और कैसे उसे उसकी मनचाही खुराक देते है आइये सबसे पहले ये समझने की कोशिश करे की हमारा अवचेतन मन होता क्या है? हमारा दिमाग 3 हिस्सो में बटा हुआ है चेतन (Conscious) मन, अवचेतन (Subconscious) मन, अचेत (Unconscious) मन।

चेतन मन हमें हमारे दैनिक कार्यो में मदद करता है जैसे की किसी बात को सुनना, उसका तार्किक निर्णय करना इत्यादि, लेकिन अवचेतन मन के पास कोई तर्कशक्ति नहीं होती ये तो आपकी बातो को यथावत मान लेता है बिना किसी तर्क के, उदहारण के लिए सांस लेने के लिए आपको सोचना नहीं पड़ता है ये तो नींद में भी अबाध गति से चलता रहता है, अगर अचानक कोई पिन आपके शरीर में चुभ जाए तो अवचेतन मन तुरंत ही आपको उस खतरे से सावधान करता है वो तर्क नहीं करता अपितु वो अपने पुराने अनुभवो से ये मान चूका होता है की सुई चुभने से आपको दर्द होगा, वो बेशक आपके लिए सही हो या गलत उसे इस बात से कोई मतलब नहीं होता है।

आपको शायद ये जान कर आश्चर्य होगा की आप अपने दिमाग का लगभग ९० से ९५% हिस्सा प्रयोग ही नहीं करते है और आप अपने रोजमर्रा के कार्यो में अधिकतम ५% दिमाग का ही इस्तेमाल करते है और इतने बड़े बड़े कार्य निपटा डालते है, हो सकता है इसे पढ़ कर आप ये सोचे की अगर हम इतना ही प्रयोग कर पाते है तो बाकी दिमाग का फायदा क्या है?

मित्रो, हमारा दिमाग एक कंप्यूटर की हार्ड डिस्क के सामान है जिसमे की इतना डाटा भरा हुआ जिसे हम प्रयोग ही नहीं कर पाते, आपके जन्म जन्मांतर की बाते इस दिमाग में छुपी हुई है, उदाहरण के तौर पर कई बार ऐसा होता है की हम किसी इंसान से पहली बार मिलते है लेकिन उसे देखते ही हमारे अंदर एक क्रोध या प्यार का भाव आता है, क्या आपने ये सोचने की कोशिश की, कि ऐसा होता क्यों हैं, जब हम उस इंसान को जानते नहीं पहचानते नहीं तो ऐसा भाव अचानक से क्यों पैदा हो जता है हमारे दिमाग में, ये है आपके अवचेतन मन कि शक्ति, वो अपने भीतर समाहित जानकारियो में से उस व्यक्ति विशेष के बारे में जानकारी निकालता है और आपको सचेत करता हैई आइये अवचेतन मन में विस्तार पूर्वक जानने से पहले उसकी कुछ और विशेषताएं जान लेते है, मान लीजिये आप गाडी ड्राइव करते है और उसी समय आप पड़ोस में बैठे अपने मित्र से बाते भी करते रहते है, लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा कि बाते करते हुए भी आप जिन रास्तो से परिचित है उनपर आपकी गाडी अपने आप मुड़ती चली जाती है ये कमाल आपके अवचेतन मन का होता हैI

कभी आपने सोचा कि अँधेरा होने के बावजूद भी आप आराम से खाना खा सकते है आपका हाथ भोजन का ग्रास उठाते ही सीधे आप के मुंह पर पहुचता है कभी भी पेट पर या कही और नहीं क्योंकि समय के साथ आपके अवचेतन मन ने ये मान लिया होता है कि थाली में से भोजन उठाते ही आपके मुँह तक पहुचना है और फिर आपके पेट तक, अब मान लीजिये कि आपने सामने राखी थाली से कुछ भी उठाया वो तो मुँह तक पहुंच ही जाएगा लेकिन आपकी इंद्रिया तुरंत आपके चैतन्य मन को ये बता देगी कि ये भोजन ग्रहण करने योग्य है या नहीं, वो तर्क करेंगी लेकिन अगर कोई उनींदी अवस्था में हो तो उसकी तर्क शक्ति काम नहीं करेगी।

आइये अब कोशिश करते है इस सारी बातो के पीछे छिपे रहस्य अर्थात अवचेतन मन कि शक्ति को समझने की। क्या है हमारा अवचेतन मन? कैसे काम करता है ये? क्या है इसके प्रयोग? क्या फायदा है हमारे अवचेतन मन का? कैसे जागृत करे इसे और पूर्ण फायदा लें इस अवचेतन मन का? क्रमवार बात करते है इस बारे में –

१. क्या है हमारा अवचेतन मन: अवचेतन मन हमारे दिमाग का वो हिस्सा है जिसे अमूमन एक साधारण इंसान कभी प्रयोग ही नहीं करता है, और हमारा अवचेतन मन सिर्फ और सिर्फ हमारी दैनिंक जरूरतों में उपयोग होता रहता है जहाँ हमारे चैतन्य मन का कोई योगदान नहीं होता है, जैसे की सांस लेना, ह्रदय का अपने सीमित अंतराल पर धड़कन, ये क्रियाये हम किसी भी अवस्था में रहे इसके लिए सोचते नहीं है लेकिन ये सतत जारी रहती है।

२. कैसे काम करता है हमारा अवचेतन मन: हमारा अवचेतन मन किसी भी बात को बिना किसी तर्क के मान लेता है और उसी दिशा में कार्य करने लगता है, हमारे चेतन मन की तरह तार्किक शक्ति नहीं होती है, इसे ये नहीं पता होता है जो आप सोच रहे है वो आपके लिए सही है या गलत, ये तो उस आग के सामान है जिसे आप जैसी खुराक देंगे वो उसे हज़म कर जाएगा और उसी के अनुरूप आपको परिणाम भी देगा, इसलिए इसे अगर हम सकारात्क सोच देते है तो ये सकारात्क परिणाम देगा अन्यथा जैसी आपकी सोच आप वैसे ही बनते चले जाएंगे।

३. क्या है इसके प्रयोग: कई बार हम बैठे बैठे उदास हो जाते है, कोई काम करने की इक्षा नहीं होती है, क्या आपने कभी सोचा की ऐसा क्यों होता है? क्योंकि आपने अपने अवचेतन मन को लगातार वो खुराक दी है और इसलिए वो आपके सामने ऐसी परिस्थितियां लाया हैI कैसे करे इसके साथ प्रयोग या इसका सदुपयोग, आपने कई बार देखा होगा की आप अगर किसी चीज़ के लिए परेशान होते है और लगातार उसी बारे में सोचते रहते है तो अचानक से आपके सामने उस काम की राहे खुलती चली जाती है शर्त ये है की आपने उस परेशानी का हल खोजा हो, अगर आप ने ये सोचा की ये काम तो कभी हो ही नहीं पायेगा तो आपका अवचेतन मन उस काम को होने देने के सारे रास्ते बंद करना शुरू कर देगा, उदहारण के लिए अगर आप को सुबह ६ बजे किसी जरुरी काम से उठना है तो आपका अवचेतन मन आपको ६ बजे या उससे पहले ही उठा देता है, इन उदाहरणों से हमें ये समझ में आता है कि अगर इसका प्रयोग हम अपने फायदे के लिए करे तो ये हमें वो सारी चीज़े दे सकता है जिनकी हमने कल्पना ही कि हो।

४. क्या फायदे है हमारे अवचेतन मन के: हमारा अवचेतन मन हमें वो सारी चीज़े ला कर दे सकता है जो हम अपने जीवन से पाना चाहते है, उदहारण के लिए हमारे एक मित्र जो कि अभियंता है लेकिन उन्होंने अपने जीवन के लिए कुछ और ठान रखा था, उन्हें किसी कि नौकरी नहीं करनी थी, इसके लिए कई बार उन्होंने व्यापार करने कि कोशिश कि लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी।

उनसे बात हुई इस बारे में और फिर पता चला कि वो खुद अपनी सफलता के प्रति विश्वास से लबरेज़ नहीं थे, उनसे वार्ता के दौरान मैंने उन्हें बताया कि आप अपने मन से ये बात निकाल दीजिये कि आप व्यापार नहीं कर पाएंगे आप तो बने ही है व्यापार के लिए नौकरी आपके लिए नहीं है और आप विश्वास रखिये कि ये काम हो जाएगा, उनके विचारो को और बल देने के लिए मैंने उन्हें एक मन्त्र भी दे दिया, ऐसा होते ही कुछ ही दिनों में उनका दिमाग ये मानने लगा कि वो जल्दी ही बड़े व्यापारी बनेंगे, आप विश्वास नहीं करेंगे आज मेरे वो मित्र अपना व्यापार कर रहे है, शुरूआती दौर में थोड़ी दिक्कतों का सामना किया उन्होंने लेकिन आज उनका व्यापार काफी अच्छा हो चुका है और उनके मातहत कई लोग कार्य कर रहे है।

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