हाथों में शुक्र ग्रह का स्थान।

सुंदरता, काया और माया
ऐश्वर्य, परिजन, जीवन-साथी;
अंगूठे का आधार सूर्य है,
सुख-भोग कराता है प्राप्ति ।


शुक्र सँवर कर सुख को लाता
जीवन सौम्य,समाज करे;
सांसों की डोरी को थामे
जीवन रक्षा आप करे ।
नशा करे, जो काम भरे हों; उसका शुक्र जगा होगा
दबे शुक्र से कृश काया, असामाजिक, संतान न होगा ।


देह में ऊर्जा कम मिली हो, और व्यवहारिकता से खाली;
हस्तरेख में शुक्र नीच हो, ला देता है बदहाली ।
जय महाकाल !

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