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क्या है सत्य आज के तांत्रिक शिविरों का

आजकल एक चलन सा हो गया है तीन दिन मे, सात दिन मे दीक्षा का, आओ और तांत्रिक बन जाओ। कई तो इतने मास्टर है की दुसरो के शब्दो को कॉपी पोस्ट करके वाहवाही लूटते है। यह उस तरह का ही होता है जैसे अपना बच्चा तो है नही पडोसी के बच्चे को अपना बताना, क्यू भाई तीन दिन, सात दिन मे आप शिविर लगाते हो, आदमी कैसा है? पात्र है या नही? क्या तंत्र विधा के लिए अब शिविर लगाने की नौबत आ गयी? क्या जो उनको उसके मूलभूत ग्यान से वंचित रखकर सीधा आप उनको तंत्र विधा या शाबरी विधा सिखा रहे हो? पात्र ओर कुपात्र भी कोई मायने नही रख रहा है? आपके मात्र कुछ पैसे के लिये। नये साधको को हम ये बता दे की ऐसे शिविरो मे कुछ नही रखा है, बस आपके समय और पैसो की बर्बादी के अलावा। अरे ये शिविर लगाने वाले इतने बलशाली होते तो चेलो की लाइन ना लग जाती, बस और कुछ नही तंत्र के प्रति आपका जो लगाव है उसको भुनाने का प्रयास है और कुछ नही है। पहले तंत्र का मूलभूत ग्यान जरूरी है, इसको समझना जरूरी है, गुरु वो, जो ग्यान दे बेहिसाब यही सत्य है।

मित्रो ,पहले गुरू अपने लिए शिष्य खोजता था और शिष्य अपने लिये गुरू खोजता था पर आजकल तंत्र के नाम पर लोगो ने दुकाने चलाकर तंत्र रूपी पुजा को बदनाम कर दिया है, फिर भी नवसाधक कुछ पाने की इच्छा मे चल पड़ते है, अपना कीमती पैसा ओर समय खोने के लिये। ऐसे शिविर लगाने से पहले मूलभूत ग्यान बहुत जरूरी है, पहले उचित गुरु के मार्गदर्शन मे इनकी क्रिया और बुनियादी ज्ञान को प्राप्त करे, हो सके तो दीक्षा का पूर्णाभिषेक भी उनके हाथो से ही तो बहुत अच्छा है। हर दीक्षा मे कितने संस्कार होते है, मंत्र शोधन के कितने संस्कार होते है, मंत्र जाग्रत करने का क्या तरीका होता है, यह शिविर लगाने वालो को पता नही, पर शिविर लगा दिया और दीक्षा हो गयी। जय हो संतो की बस पैसे से मतलब है इन संतो को और कुछ नही। शिविर वो हो जिसमे आपको तंत्र का बुनियादी ज्ञान दिया जाये और उसी शिविर मे आपकी समस्त समस्याओं का समाधान किया जाये, तीन दिन या सात दिन मे कोई तंत्राचार्य नही बनता, इसके लिए जरुरत होती है लगातार अभ्यास की, गुरु के सानिध्य की, गुरु द्वारा समय समय पर दिए गए डाँट की, गुरु द्वारा दिखाए मार्ग की, ध्यान रखे ऊची दुकान पर हमेशा फीके पकवान ही रहते है। बाकी आपकी सोच और आपका विवेक और हाँ आजकल कॉपी पोस्ट वाले बाबा लोगो की भी काफी भरमार है, हम जानते है कि हमारी ये पोस्ट भी कॉपी पेस्ट बाबा अपने नामो से कई जगह शेयर करेगे पर ऐसे सभी लोगो से हमारा करबद्ध निवेदन है है कि आप ऐसा करो पर समाज को एक नई दिशा दो, सनातन धर्म को यू ना उजड जाने दो, तंत्र का यू मजाक ना बनाओ की लोग डरने लगे, किसी की बातो को अपना बताना बुरी बात नही पर लेख के साथ छेडछाड और कांटछांट करना गलत बात है, हम तो यही कहते है कि हमारी पोस्ट आप शेयर करो बस आप सभी से अनुरोध है कि आध्यात्मिक समाज मे जो सिद्धो और तांत्रिको के नाम से व्यापारी है उनसे सावधान करे तो अच्छा है, बाकी आप शब्द चुरा सकते है ज्ञान और आचरण नही। गुरू ओर इष्ट कृपा नही हम तो है ही माँ बाबा के नादान बालक हम कोई तांत्रिक नही हम कोई साधक या संत नही बस हम हमारे गुरूदेव ओर इष्टदेव के एक छोटे से सेवक है ओर कुछ नही पर आप सभी तो बहुत आगे जो सकते है, गुरू बड़ी मुश्किलो से मिलता है पर सदगुरु मिले तो बात ही अलग है, दुकाने बहुत है, जैसा मर्जी आये वैसा सौदा लो, चले या ना चले कोई गारन्टी नही है, यही सत्य है, आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से बाकी फिर कभी अच्छा लगे तो शेयर करे ओर बुरा लगे तो नजरअंदाज करे बाकी जो माँ बाबा की कृपा ओर उनकी इच्छा।

सभी साधको से अनुरोध है की १८ – २६ मार्च तक नवरात्रि है हो सके तो अपने इष्ट देव या देवी की अपने घर मे जप हवन सहित मंत्र उच्चारण, उससे पहले सभी लोगो के लिए कुछ प्रयोग देंगे, अगर अच्छा लगे तो करें अन्यथा आपकी मर्ज़ी, क्योंकि हम कोई तांत्रिक या मांत्रिक नहीं है जो किसी को कुछ दे या ले सके।।

यदि आपके पास वेद-पुराण, कुंडली या हिन्दू संस्कृति से सम्बंधित सवाल हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं, हमारा ईमेल id है info@jaymahakaal.com

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जय माँ। जय बाबा महाकाल।।
अलख आदेश।।

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