सूर्य देव को जल चढ़ाने के धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व।

सूर्य को सभी ग्रहों में श्रेष्ठ माना जाता हैहिन्दू धर्म में सूर्य का बहुत महत्त्व बताया गया है। सदियों से हमारी परम्परा में नहाने के बाद सूर्य को अर्ध्य देने अर्थात जल चढाने का नियम हैआज हम आपको सूर्य को जल चढाने का महत्व बताने जा रहे है

सूर्य को जल चढाने का धार्मिक महत्त्व – सूर्य को सभी ग्रहों में ख़ास माना जाता हैऐसा माना जाता है कि अगर सूर्य देवता आपसे प्रसन्न है तो बाकी ग्रह का असर नहीं पड़ता है, इसलिए सूर्य की पूजा और उपासना को शुभ फलदाई माना गया हैरविवार को सूर्य देव का दिन माना गया है और इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से जीवन सफल होता है

सूर्य को जल चढाने का वैज्ञानिक महत्त्व – सूर्य को जल चढाने का धार्मिक महत्त्व के साथ वैज्ञानिक महत्त्व भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब कोई व्यक्ति सुबह के समय सूर्य को जल चढ़ाता है तो सूर्य से निकलने वाली किरणें उस व्यक्ति को कई स्वास्थ्य लाभ देती हैसुबह के समय सूरज की जो किरणें निकलती है वे हमारे शरीर में होने वाले रंगों के असंतुलन को सही करती है

सूरज की किरणों में इन्द्रधनुष के सात रंगों का समावेश होता है और यह रंग रंगों के विज्ञान पर काम करता है। विज्ञान के अनुसार सुबह के समय सूर्य को जल चढाते समय इन किरणों के प्रभाव से ये रंग संतुलित हो जाते है जिससे शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है

इसके अलावा दूसरा वैज्ञानिक कारण यह है की सुबह के समय सूर्य से निकलने वाली विटामिन डी. सूर्य की रोशनी से शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी करती है। इसके अलावा सूर्य की सुबह की रोशनी सुंदरता बढ़ाने का भी काम करती है और इससे आँखों को भी स्वास्थ्य लाभ मिलता है

सूर्य को जल चढाने का ज्योतिष महत्त्व – ज्योतिष विज्ञान में सूर्य को जल चढाने के कई महत्त्व बताये गए है। यदि कोई व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में नहाकर साफ़ कपडे पहनकर सूर्य को जल चढ़ाए तो उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है

इसके अलावा रोगों से मुक्ति पाने के लिए भी सुबह-सुबह सूर्य को जल चढ़ाना लाभकारी होता है।

तो यह है सूर्य को जल चढाने का महत्व – अब आप समझ ही गए होंगे कि सूर्य को जल चढाने के सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं है बल्कि कई वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्त्व भी हैं।


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