हस्तक्षेत्र में विद्युत् – चुम्बकीय रेखाएँ

स्वतंत्र जीवन, प्रकृति के सारे नियम-विनियम को जानता और समझता हुआ स्वच्छंद कार्य, व्यव्हार और विचरण करता है।


* यही जीवन का सार-तत्व है कि मानव संयमित, संतुष्ट और खुशहाल रहे।
* सभी भाव और कर्म एवं सुख-दुःख के कारक अपनी छवि हस्तरेख में प्राकृतिक रूप से निर्मित करते रहते हैं।


हाल-चाल, विचार-व्यवहार; तन, मन, धन का कारोबार
सभी समय के साथ बदलते, जैसे उपग्रह-ग्रह सब चलते।
यह है हस्तरेख विज्ञान,
जो समझें उनका कल्याण।
जय महाकाल !

हिन्दू संस्कृति या सनातन धर्म के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने हेतु अथवा कुंडली, वास्तु, हस्त रेखा, विवाह, नौकरी इत्यादि से सम्बंधित कोई समस्या हो तो आप हमसे हमारी ईमेल आईडी info@jaymahakaal.com पर संपर्क कर सकते है।

ऐसी ही रोचक जानकारी नित प्राप्त करने के लिए हमारे facebook लिंक
https://www.facebook.com/JayMahakal01/ को like एवं share करें साथ ही twitter एवं instagram पर फॉलो करें @jaymahakaal01 । हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए www.jaymahakaal.com

Like us on facebook:

हमें अपनी राय से अवगत कराये ताकि हम आपको आपके हिसाब से आर्टिकल्स दे सके। जय महाकाल।।