Rudraksh (रुद्राक्ष)

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  • Rudraksh १० मुखी रुद्राक्ष: शक्तियां एवं महत्त्व

    दस मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु के आठवे अवतार भगवान श्रीकृष्ण का प्रतिनिधित्व करता है, यह रुद्राक्ष हर ग्रह से जुड़ा हुआ माना जाता है, इसलिए इसे पहनने पर धारक की दसो दिशाओ
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  • Rudraksh ११ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तिया और महत्व

    ग्यारह मुखी रुद्राक्ष रूद्र के ग्यारहवे अवतार हनुमान जी का प्रतिनिधित्व करता है, इस रुद्राक्ष के धारक को शनि गृह से होने वाली विपत्तियों से छुटकारा मिलता है और शनि की साढ़े साती के समय भी धारक को नुकसान नहीं उठाना पड़ता है। इस रुद्राक्ष के धारक को भगवान् शिव और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, (more…)

  • 12 mukhi १२ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तिया और महत्व

    बारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपति देवता भगवान् सूर्य को माना जाना है। जिस प्रकार सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है, सूर्य की रश्मिया ही हमें सिखाती है कि जो भी है वो आज और अभी है, सूर्य जिस प्रकार हमें यह शिक्षा प्रदान करते है कि समय से बड़ा कुछ भी नहीं है और जो कुछ है वो वर्तमान समय ही है, उसी प्रकार यह रुद्राक्ष हमें यह शक्ति प्रदान करता है कि जो कुछ है अभी है, हमारा वर्तमान ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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  • 10-Mukhi-Rudraksha ९ मुखी रुद्राक्ष लाभ, शक्तियां और महत्व

    नव मुखी रुद्राक्ष माँ दुर्गा द्वारा शाषित रुद्राक्ष है, नव मुखी रुद्राक्ष के बारे में पुराणों में जो वर्णन मिलता है उसके अनुसार नव मुखी रुद्राक्ष नव दुर्गा की शक्तियों को अपने अंदर समाहित करता है, (more…)

  • 8-mukhi-rudraksha आठ मुखी रुद्राक्ष के महत्त्व, लाभ और धारण मन्त्र

    आठ मुखी रुद्राक्ष आठ दिशाओं और आठ सिद्धियों का नेतृत्व करता है। वैसे तो आठ मुखी रुद्राक्ष भगवान गणेश और भैरव बाबा का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस रुद्राक्ष में साक्षात माँ गंगा का वास होता है इसलिए इस रुद्राक्ष को पहनने से गंगा में नहाने जैसा पुण्य मिलता है। (more…)

  • छह मुखी रुद्राक्ष के महत्त्व, लाभ और धारण मन्त्र

    एक छह मुखी रूद्राक्ष की सतह पर छह ऊर्ध्वाधर रेखाएं (मुख) होती हैं इस रूद्राक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाला देवता भगवान कार्तिकेय है जो भगवान शिव के दूसरे पुत्र और दिव्य सेना के कमांडर हैं। इसलिए इस इस रुद्राक्ष के धारक को भगवान कार्तिकेय के आशीर्वाद से साहस और ज्ञान उपहार में ही मिल जाता है। (more…)

  • पाँच मुखी रुद्राक्ष के महत्त्व, लाभ और धारण मन्त्र

    पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे ज्यादा मिलने वाला रुद्राक्ष है, पंचमुखी रुद्राक्ष में भगवान शिव की सभी शक्तियां समाहित होती है। इस धरा के पंच तत्व और पांच पांडव इस रुद्राक्ष के देव माने गए हैं। इस रुद्राक्ष को धारण करने से वर्जित कार्यो द्वारा उत्प्पन्न पापो से मुक्ति दिलाता है। (more…)

  • रुद्राक्ष की रहस्मयी बातें

    मित्रो, जैसा कि हमने आपसे वादा किया था कि शिवरात्रि के पावन अवसर पर हम आपको भगवान शिव और रुद्राक्ष संबंधित जानकारी देने का प्रयत्न करेंगे, आइए इसी कड़ी में बढ़ते है आगे और जानते है रुद्राक्ष के बारे में-

    ऐसा माना जाता है की रुद्राक्ष की उत्त्पत्ति शिव जी के आंसुओ द्वारा हुई, ऐसा माना जाता है की कई वर्षो तक तपस्या में लीन रहने के बाद जब भगवान् शंकर ने अपनी आँखे खोली, तो उनकी आँखों से आंसुओ की बूँद गिरी, जहाँ पर शिव जी के आंसू गिरे वहाँ रुद्राक्ष का पेड़ बन गया। कहते हैं भगवान शिव को प्रसन्न करना बेहद आसान है। वह इतने भोले हैं कि जो भी उन्हें मन से याद करता है वह उसकी हर इच्छा को पूरी करते हैं। शायद यही वजह है की विनाशक की हिन्दू संस्कृति में विनाशक की भूमिका निभाने वाले भगवान् शिव को उनके भक्त भोले नाथ कहते है।

    रुद्राक्ष एक खास तरह के पेड़ का बीज है। ये पेड़ आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में एक खास ऊंचाई पर, खासकर हिमालय और पश्चिमी घाट सहित कुछ और जगहों पर भी पाए जाते हैं। अफसोस की बात यह है लंबे समय से इन पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल भारतीय रेल की पटरी बनाने में होने की वजह से, आज देश में बहुत कम रुद्राक्ष के पेड़ बचे हैं। आज ज्यादातर रुद्राक्ष नेपाल, बर्मा, थाईलैंड या इंडोनेशिया से लाए जाते हैं।

    रुद्राक्ष की खासियत यह है कि इसमें एक अनोखे तरह का स्पदंन होता है। जो आपके लिए आप की ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे बाहरी ऊर्जाएं आपको परेशान नहीं कर पातीं। इसीलिए रुद्राक्ष ऐसे लोगों के लिए बेहद अच्छा है जिन्हें लगातार यात्रा में होने की वजह से अलग-अलग जगहों पर रहना पड़ता है। आपने गौर किया होगा कि जब आप कहीं बाहर जाते हैं, तो कुछ जगहों पर तो आपको फौरन नींद आ जाती है, लेकिन कुछ जगहों पर बेहद थके होने के बावजूद आप सो नहीं पाते।

    इसकी वजह यह है कि अगर आपके आसपास का माहौल आपकी ऊर्जा के अनुकूल नहीं हुआ तो आपका उस जगह ठहरना मुश्किल हो जाएगा। चूंकि साधु-संन्यासी लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं, इसलिए बदली हुई जगह और स्थितियों में उनको तकलीफ हो सकती है। उनका मानना था कि एक ही स्थान पर कभी दोबारा नहीं ठहरना चाहिए। इसीलिए वे हमेशा रुद्राक्ष पहने रहते थे। आज के दौर में भी लोग अपने काम के सिलसिले में यात्रा करते और कई अलग-अलग जगहों पर खाते और सोते हैं। जब कोई इंसान लगातार यात्रा में रहता है या अपनी जगह बदलता रहता है, तो उसके लिए रुद्राक्ष बहुत सहायक होता है।

    रुद्राक्ष के ऊपर किये गए शोधो में यह भी पाया गया कि अगर रुद्राक्ष को पीस कर उसका सेवन किया जाए तो उच्च रक्तचाप को ठीक कर सकता है, अगर रुद्राक्ष को पानी में डूबा दिया जाए तो वो पानी के विधुतकीय विश्लेषण को बदल देता है, रुद्राक्ष के बारे में किये गए शोधो से यह भी पता चलता है कि रुद्राक्ष इंसानी शरीर पर जमा किसी भी प्रकार के अतिरिक्त ऊर्जा को या तो समाप्त कर देता है या उसे संतुलित कर देता हैरुद्राक्ष एक खास तरह के पेड़ का बीज है। ये पेड़ आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में एक खास ऊंचाई पर, खासकर हिमालय और पश्चिमी घाट सहित कुछ और जगहों पर भी पाए जाते हैं। अफसोस की बात यह है लंबे समय से इन पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल भारतीय रेल की पटरी बनाने में होने की वजह से, आज देश में बहुत कम रुद्राक्ष के पेड़ बचे हैं।

    आज ज्यादातर रुद्राक्ष नेपाल, बर्मा, थाईलैंड या इंडोनेशिया से लाए जाते हैं। आज, भारत में एक और बीज मिलता है, जिसे भद्राक्ष कहते हैं और जो जहरीला होता है। भद्राक्ष का पेड़ उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के क्षत्रों में बहुतायत में होता है। पहली नजर में यह बिलकुल रुद्राक्ष की तरह दिखता है। देखकर आप दोनों में अंतर बता नहीं सकते। अगर आप संवेदनशील हैं, तो अपनी हथेलियों में लेने पर आपको दोनों में अंतर खुद पता चल जाएगा। चूंकि यह बीज जहरीला होता है, इसलिए इसे शरीर पर धारण नहीं करना चाहिए। इसके बावजूद बहुत सी जगहों पर इसे रुद्राक्ष बताकर बेचा जा रहा है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि जब भी आपको रुद्राक्ष लेना हो, आप इसे किसी भरोसेमंद जगह से ही लें। जब आप रुद्राक्ष धारण करते हैं, तो यह आपके प्रभामंडल (औरा) की शुद्धि करता है।

    वैसे तो रुद्राक्ष २७ मुखी तक हो सकते है लेकिन १४ मुखी रुद्राक्ष तक ही अमूमन पाए जाते है, इनके अलावा गौरी शंकर रुद्राक्ष, गणेश रुद्राक्ष एवं गौरीपाठ रुद्राक्ष भी पाए जाते है। कहते हैं रुद्राक्ष जितना छोटा हो, यह उतना ही ज्यादा प्रभावशाली होता है। सफलता, धन-संपत्ति, मान-सम्मान दिलाने में सहायक होता है रुद्राक्ष, लेकिन हर चाहत के लिए अलग-अलग रुद्राक्ष को धारण किया जाता है। वैसे, रुद्राक्ष संबंधी कुछ नियम भी हैं, जैसे- रुद्राक्ष की जिस माला से आप जाप करते हैं उसे धारण नहीं किया जाना चाहिए। रुद्राक्ष को किसी शुभ मुहूर्त में ही धारण करना चाहिए। इसे अंगूठी में नहीं जड़ाना चाहिए। कहते हैं, जो पूरे नियमों का ध्यान रख श्रद्धापूर्वक रुद्राक्ष को धारण करता है, उनकी सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा जाता है कि जिन घरों में रुद्राक्ष की पूजा होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। यह भगवान शंकर की प्रिय चीज मानी जाती है।

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    जय महाकाल।।

  • रुद्राक्ष धारण करने का सही तरीका

    रुद्राक्ष स्वभाव से ही प्रभावी होता है, लेकिन यदि उसे विशेष पद्धति से सिद्ध किया जाए तो उसका प्रभाव कई गुना अधिक हो जाता है। अगर जप के लिए रुद्राक्ष की माला सिद्ध करनी हो तो सबसे पहले उसे पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है) में डुबोएं, फिर साफ पानी से धो लें।

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  • 7 mukhi सात मुखी रुद्राक्ष के महत्त्व, लाभ और धारण मन्त्र

    सात मुखी रूद्राक्ष की सतह पर सात ऊर्ध्वाधर रेखाएं (मुख) होती हैं इस रूद्राक्ष का प्रतिनिधित्व स्वयं माँ लक्ष्मी द्वारा किया जाता है , जैसा की हमारे पुराणों में वर्णित है माँ लक्ष्मी धन धान्य का प्रतिनिधित्व करती है, उनका आसान कमल का पुष्प है, उनके ऊपर हाथियों द्वारा लगातार जल की वर्षा की जाती रहती है, जो दर्शाता है की माँ लक्ष्मी की कृपा से मनुष्य अपनी पुरानी यादो से बाहर आकर वर्तमान में जीवन जीना प्रारम्भ करता है और दिन प्रतिदिन अपनी परेशानियों से ऊपर उठते हुए एक नयी दुनिया का निर्माण करता है। (more…)

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