बिल्ली का रास्ता काटना शुभ होता है या अशुभ?

कहा जाता है मानो तो सब है नहीं मनो तो कुछ भी नहीं। यही कथन सभी चीजों में निर्भर करता है जैसे शुभ अशुभ, शगुन – अपशकुन , भला बुरा सब हमारे विचारों पर निर्भर है और हमारी मान्यता पर।

पुराने समय में लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए बैलगाड़ियों और घोड़ागाड़ियों इत्यादियो का प्रयोग किया करते थे जो की जानवरो द्वारा ही खींची जाती थी, रात के समय में बिल्ली और उसके जैसे जानवरों की आँखे चमकती थी जिससे गाय, बैल, घोड़े इत्यादि जानवर डर जाया करते थे, बिल्ली जो की ऐसा जानवर है जो रूक कर पीछे मूड़ कर देखने लग जाती है जिससे उसकी चमकती आँखों को देख कर बैल और घोड़े इत्यादि जानवर डर कर बिदक जाया करते थे।

इसलिए थोड़ी देर के लिए यात्रा रोक दी जाती थी। कालांतर में लोग आपस में कहने लगे कि जब बिल्ली गुजरे तो थोड़ी देर के लिए रूक जाना चाहिए, समय के साथ यही बात हमारी मान्यता में जुड़ती चली गई।

आज हम बात कर रहे है ऐसे ही एक विषय पर जिसमे आप भी मान्यता रखते होंगे। आपने अक्सर यह सुना होगा की बिल्ली का रास्ता काटना अपशकुन होता है , बनता हुआ काम बिगड़ जाता है और विपदा भी आ सकती है।

लेकिन यहाँ जो बात हम आपको बताने जा रहे है वो है तो बिल्ली के रास्ता काटने से ही जुडी हुई पर यहाँ मामला अपशकुन का नहीं है बल्कि बिल्ली के रास्ता काटने पर आपको क्या फायदा हो सकता है ये हम बताएँगे।

कोई व्यक्ति कहीं जा रहा हो और उसी समय बिल्ली बायीं और से रास्ता काटे और वह व्यक्ति उसे जाते हुए देख ले तो उसके लिए कुछ बुरी खबर आने वाली होती है।

काली बिल्ली के रास्ता काटने से आपको धन लाभ भी हो सकता है।

बिल्ली बायीं और से दाई जा रही हो और बीच में रूककर पीछे की तरफ देख ले तो यह कुछ बुरा होने का संकेत होता है। तंत्र विज्ञान में बिल्ली को महत्वपूर्ण जीव माना गया है।

लोक मान्यता है कि दीपावली की रात घर में बिल्ली का आना शुभ शगुन होता है। इससे लक्ष्मीजी घर आती हैं और सालों भर धन का आगमन बना रहता हैकिसी शुभ कार्य से कहीं जा रहे हों और बिल्ली मुंह में मांस का टुकड़ा लिए हुए दिखाई दे तो ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, काम सफल होता है।

ज्योतिषशास्त्र में बिल्ली को राहु की सवारी कहा गया है। जिनकी कुण्डली में राहु शुभ नहीं है उन्हें राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए बिल्ली पालना चाहिए

हम ऐसा नहीं कह रहे कि हमारी मान्यताये गलत या सही है। मानना ना मानना आपके खुद के विवेक पर निर्भर करता है। इसलिए हमने यहाँ दोनों पहलु प्रस्तुत करने कि कोशिश कि है, पाठकगण स्वविवेक से निर्णय लें और किसी भी प्रकार के सवालों या सुझावों से हमें अवगत कराएं, ताकि हम उन्हें अपने आने वाले लेखो में समाहित कर के आपके सामने और बेहतर लेख ले कर आ सकें।

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