क्या है फाल्गुन मास का धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व?

फाल्गुन या फागुन का महीना हिन्दू पंचांग का अंतिम महीना है. इस महीने की पूर्णिमा को फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण इस महीने का नाम फाल्गुन है. इस महीने से धीरे धीरे गरमी की शुरुआत होती है , और सर्दी कम होने लगती है.


इस महीने से खान पान और जीवनचर्या में जरूर बदलाव करना चाहिए. मन की चंचलता को नियंत्रित करने के प्रयास करने चाहिए. फाल्गुन महीने में श्री कृष्ण की पूजा उपासना विशेष फलदायी होती है. इस महीने में प्रयास करके शीतल या सामान्य जल से स्नान करें.

भोजन में अनाज का प्रयोग कम से कम करें , अधिक से अधिक फल खाएं. इस महीने में नशीली चीज़ों और मांस-मछली के सेवन से परहेज करें. कुदरत के नजरिए से फागुन मास जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही यह माह धार्मिक दृष्टि से भी महत्‍वपूर्ण है.

फागुन के अंतिम दिन पूर्णिमा या मास पूरा होने की द्योतक तिथि को होलिका पूजन और दहन के बाद अगले दिन रंग खेलने का रिवाज जगजाहिर है. फाल्गुन माह और इसके पर्व, उत्सव का सामूहिक संदेश यही है कि जीवन में कर्मठता और सही दिशा को चुनें.

हमारे अंदर आगे बढऩे और ऊपर उठने की जो भावना है, उसे मरने न दें. क्योंकि जो कर्म करता है भगवान उसी का साथ देते हैं.

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