Facts (तथ्य)

  • आपकी इच्छा शक्ति के चमत्कार।
  • Shri Vishnu Ji इस तथ्य से जानिए क्या धरती पर भगवान हैं?

    आइये आपको “धरती पर भगवान हैं प्रमाणिकता सिद्ध किये गये लोगो के अनुभव देखे व परखे

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  • किन कारणों से दिखाई देती है कुंडली में गरीबी?

    1. जिस व्यक्ति की कुंडली के द्वितीय भाव में शुभ ग्रह या शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो उसे धन प्राप्त होता है। (more…)

  • Rashi कुछ रोचक जानकारी वास्तु शास्त्र से

    वास्तुशास्त्र: सुबह घर के मुख्य दरवाजे पर करें ये 1 काम, होगी धनवर्षा, घर-परिवार रहेगा खुशहाल

    वास्तुशास्त्र के अनुसार जिस घर में वास्तुदोष होता है, वहां कभी सुख-समृद्धि का वास कभी नहीं हो सकता है। घर का यह वास्तु दोष किसी भी दिशा से परिवार के सदस्यों पर प्रहार कर नकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है। (more…)

  • Kundalini कुंडलिनी चक्र की असीमित शक्ति से क्या संभव है?

    सम्पूर्ण ब्रह्मांड से तारतम्य बनाकर हमारी ही आन्तरिक ऊर्जा को को संचालित करने का कार्य करते हैं … सप्त-चक्र।
    जब हमारे असंयमित व्यवहार से इन शक्ति केन्द्रों का संतुलन बिगड़ जाता है तो विभिन्न व्याधियों का सामना मनुष्य को करना पड़ता है चलिए आज हम यह जानते हैं की कौन से चक्र के असंतुलित होने का क्या परिणाम द्रष्टिगोचर होता हैं। (more…)

  • Love Marraige कुंडली से जानिए विवाह योग्य

    कुण्डली के योग विवाह समय को किस प्रकार प्रभावित करते है

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  • Lord Shiva कैसी हुई थी भगवान शंकर के वाहन नंदी की उत्पत्ति?

    पुराणों में यह कथा मिलती है कि शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने अपनी चिंता उनसे व्यक्त की। शिलाद निरंतर योग तप आदि में व्यस्त रहने के कारण गृहस्थाश्रम नहीं अपनाना चाहते थे।

    अतः उन्होंने संतान की कामना से इंद्र देव को तप से प्रसन्न कर जन्म और मृत्यु से हीन पुत्र का वरदान मांगा। इंद्र ने इसमें असर्मथता प्रकट की तथा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कहा। तब शिलाद ने कठोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया और उनके ही समान मृत्युहीन तथा दिव्य पुत्र की मांग की। (more…)

  • कैसे आया था भीम में १० हज़ार हाथियों का बल?

    पांडवों के जन्म के कुछ वर्ष पश्चात पाण्डु का निधन हो गया। पाण्डु की मृत्यु के बाद वन में रहने वाले साधुओं ने विचार किया कि पाण्डु के पुत्रों, अस्थि तथा पत्नी को हस्तिनापुर भेज देना ही उचित है।

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  • Durga कैसे तोडा था माता दुर्गा ने देवताओं का घमंड एक तिनके से?

    एक बार देवताओं और दैत्यों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में देवता विजयी हुए जिससे उनके मन में अहंकर उत्पन्न हो गया। सभी देवता स्वयं को श्रेष्ठ कहने लगे। (more…)

  • कैसे हुआ था नारियल का जन्म?

    हिन्दू धर्म में नारियल का विशेष महत्तव है। नारियल के बिना कोई भी धार्मिक कार्यक्रम संपन्न नहीं होता है। नारियल से जुडी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है जो जिसके अनुसार नारियल का इस धरती पर अवतरण ऋषि विश्वामित्र द्वारा किया गया था। आज हम आपको नारियल के जन्म से जुडी यही कहानी बता रहे है।

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  • कौन बनता है भूत? कैसे रहें उनसे सुरक्षित?

    जिसका कोई वर्तमान न हो, केवल अतीत ही हो वही भूत कहलाता है। अतीत में अटका आत्मा भूत बन जाता है। जीवन न अतीत है और न भविष्य वह सदा वर्तमान है। जो वर्तमान में रहता है वह मुक्ति की ओर कदम बढ़ाता है। (more…)

  • कौन हैं अघोरी: कैसी है उनकी रहस्मयी दुनिया – भाग २

    क्यों जिद्दी और गुस्सैल होते हैं अघोरी

    अघोरियों के बारे में मान्यता है कि वे बड़े ही जिद्दी होते हैं। अगर किसी से कुछ मांगेंगे, तो लेकर ही जाएंगे। क्रोधित हो जाएंगे तो अपना तांडव दिखाएंगे या भलाबुरा कहकर उसे शाप देकर चले जाएंगे। एक अघोरी बाबा की आंखें लाल सुर्ख होती हैं लेकिन अघोरी की आंखों में जितना क्रोध दिखाई देता हैं बातों में उतनी ही शीतलता होती है।

    अघोरी की वेशभूषा

    कफन के काले वस्त्रों में लिपटे अघोरी बाबा के गले में धातु की बनी नरमुंड की माला लटकी होती है। नरमुंड हो तो वे प्रतीक रूप में उसी तरह की माला पहनते हैं। हाथ में चिमटा, कमंडल, कान में कुंडल, कमर में कमरबंध और पूरे शरीर पर राख मलकर रहते हैं ये साधु। ये साधु अपने गले में काली ऊन का एक जनेऊ रखते हैं जिसेसिलेकहते हैं। गले में एक सींग की नादी रखते हैं। इन दोनों कोसींगी सेलीकहते हैं।

    अघोरपंथ तांत्रिकों के तीर्थस्थल

    अघोरपंथ के लोग चार स्थानों पर ही श्मशान साधना करते हैं। चार स्थानों के अलावा वे शक्तिपीठों, बगलामुखी, काली और भैरव के मुख् स्थानों के पास के श्मशान में साधना करते हैं। यदि आपको पता चले कि इन स्थानों को छोड़कर अन्य स्थानों पर भी अघोरी साधना करते हैं तो यह कहना होगा कि वे अन्य श्मशान में साधना नहीं करते बल्कि यात्रा प्रवास के दौरान वे वहां विश्राम करने रुकते होंगे या फिर वे ढोंगी होंगे।

    तीन प्रमुख स्थान :

    1. तारापीठ का श्मशान : कोलकाता से 180 किलोमीटर दूर स्थित तारापीठ धाम की खासियत यहां का महाश्मशान है। वीरभूम की तारापीठ (शक्तिपीठ) अघोर तांत्रिकों का तीर्थ है। यहां आपको हजारों की संख्या में अघोर तांत्रिक मिल जाएंगे। तंत्र साधना के लिए जानीमानी जगह है तारापीठ, जहां की आराधना पीठ के निकट स्थित श्मशान में हवन किए बगैर पूरी नहीं मानी जाती। कालीघाट को तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है, कालीघाट में होती हैं अघोर तांत्रिक सिद्धियां
    2. कामाख्या पीठ के श्मशान : कामाख्या पीठ भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो असम प्रदेश में है। कामाख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। प्राचीनकाल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्रसिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। कालिका पुराण तथा देवीपुराण मेंकामाख्या शक्तिपीठको सर्वोत्तम कहा गया है और यह भी तांत्रिकों का गढ़ है।
    3. रजरप्पा का श्मशान : रजरप्पा में छिन्नमस्ता देवी का स्थान है। रजरप्पा की छिन्नमस्ता को 52 शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है लेकिन जानकारों के अनुसार छिन्नमस्ता 10 महाविद्याओं में एक हैं। उनमें 5 तांत्रिक और 5 वैष्णवी हैं। तांत्रिक महाविद्याओं में कामरूप कामाख्या की षोडशी और तारापीठ की तारा के बाद इनका स्थान आता है।

    चक्रतीर्थ का श्मशान : मध्यप्रदेश के उज्जैन में चक्रतीर्थ नामक स्थान और गढ़कालिका का स्थान तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। उज्जैन में काल भैरव और विक्रांत भैरव भी तांत्रिकों का मुख् स्थान माना जाता है।

    सभी 52 शक्तिपीठ तो तांत्रिकों की सिद्धभूमि हैं ही इसके अलावा कालिका के सभी स्थान, बगलामुखी देवी के सभी स्थान और दस महाविद्या माता के सभी स्थान को तांत्रिकों का गढ़ माना गया है। कुछ कहते हैं कि त्र्यम्बकेश्वर भी तांत्रिकों का तीर्थ है।

    तांत्रिकों के देवीदेवताओं के नाम

    तंत्र की मुख्य 10 देवियां हैं जिन्हें 10 महाविद्या कहा जाता है

    1. काली, 2. तारा, 3. षोडशी, (त्रिपुरसुंदरी), 4. भुवनेश्वरी, 5. छिन्नमस्ता, 6. त्रिपुर भैरवी, 7. द्यूमावती, 8. बगलामुखी, 9. मातंगी और 10. कमला।

    भैरव : भगवान भैरव को शिव का अंश अवतार माना जाता है और ये तांत्रिकों के प्रमुख पूजनीय भगवान हैं। इन्हें शिव के 10 रुद्रावतारों में से एक माना गया है। भैरव के 8 रूप हैं

    1. असितांग भैरव, 2. चंड भैरव, 3. रूरू भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाल भैरव, 7. भीषण भैरव, 8. संहार भैरव।

    भय को भगाए काल भैरव

    10 रुद्रावतार हैं

    1. महाकाल, 2. तार, 3. बाल भुवनेश, 4. षोडश श्रीविद्येश, 5. भैरव, 6. छिन्नमस्तक, 7. धूमवान, 8. बगलामुख, 9. मातंग और 10. कमल।

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  • Charnamrit क्या अंतर है ‘पंचामृत’ और ‘चरणामृत’ में

    मंदिर में या फिर घर/मंदिर पर जब भी कोई पूजन होती है, तो चरणामृत या पंचामृत दिया हैं। मगर हम में से ऐसे कई लोग इसकी महिमा और इसके बनने की प्रक्रिया को नहीं जानते होंगे। (more…)

  • क्या आप जानते हैं इन शुभ परंपराओं के पीछे के राज? भाग – २

    कल हमने हिंदू धर्म से संबंधित कुछ रहस्मयी तथ्यों को जाना। जिन्हें हम करते ज़रूर हैं, परंतु इसके पीछे छुपे सही कारण से हम सभी अंजान हैं। अब इस भाग में हम कुछ और ऐसे ही तथ्यों को जानेंगे।

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  • क्या आप जानते हैं इन शुभ परंपराओं के पीछे के राज? भाग -१

    हिंदु धर्म में पूजा के समय कुछ बातें अनिवार्य मानी गई है। जैसे प्रसाद, मंत्र, स्वास्तिक, कलश, आचमन, तुलसी, मांग में सिंदूर, संकल्प, शंखनाद और चरण स्पर्श। आइए जानते हैं इनका क्या पौराणिक महत्व है।

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  • Image क्या आप जानते है इस दोहे का रहस्य – तृण धर ओट कहत वैदेही, सुमिरि अवधपति परम सनेही।

    रामायण में एक घास के तिनके का भी रहस्य है, जो
    हर किसी को नहीं मालूम क्योंकि आज तक किसी ने
    हमारे ग्रंथो को समझने की कोशिश नहीं की,सिर्फ पढ़ा
    है, देखा है, और सुना है, आज आप के समक्ष ऐसा ही एक रहस्य बताने जा रहा हूँ, रावण ने जब माँ सीता जी का हरण करके लंका ले गया।

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  • क्या हुआ था गणेश जी का असली मस्तिष्क कटने के बाद?

    भगवान गणेश गजमुख, गजानन के नाम से जाने जाते हैं, क्योंकि उनका मुख गज यानी हाथी का है। भगवान गणेश का यह स्वरूप विलक्षण और बड़ा ही मंगलकारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं या विचार किया है कि गणेश का मस्तक कटने के बाद उसके स्थान पर गजमुख तो लगा, लेकिन उनका असली मस्तक कहां गया? (more…)

  • क्या है कुबेर के ९ रूप?

    1 – उग्र कुबेर — यह कुबेर धन तो देते ही है साथ में आपके सभी प्रकार के शत्रुओ का भी हनन कर देते है ! (more…)

  • क्या है देवी – देवताओं के वाहनों के पीछे का रहस्य? भाग – १

    प्रत्येक देवी और देवता का एक वाहन होता है। आइये जानते हैं कि देवी-देवताओं के वाहनों की असली कहानी। देवी-देवताओं ने अपने वाहन के रूप में कुछ पशु या पक्षियों को चुना है, तो इसके पीछे उनकी विशिष्ठ योग्यता ही रही है। हालांकि आपको हम यह भी बताना चाहते हैं कि अब इनमें से कुछ वाहन लुप्त हो रहे हैं।

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  • क्या है सत्य?
  • Lord Hanuman क्या है हनुमान के विवाह की गाथा

    हनुमान जी के बारे में माना जाता है की वो बाल ब्रह्मचारी है। पर भारत के कुछ हिस्सों खासकर तेलंगाना में हनुमान जी को विवाहित माना जाता है।  (more…)

  • क्यों अर्पित करते हैं शनि देव को तेल

    कथा इस प्रकार है शास्त्रों के अनुसार रामायण काल में एक समय शनि को अपने बल और पराक्रम पर घमंड हो गया था। उस काल में हनुमानजी के बल और पराक्रम की कीर्ति चारों दिशाओं में फैली हुई थी

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  • goddess_kali_lord_shiva क्यों आये थे भगवान शिव महाकाली के पैरों के नीचे?

    भगवती दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक हैं महाकाली। जिनके काले और डरावने रूप की उत्पति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी। यह एक मात्र ऐसी शक्ति हैं जिन से स्वयं काल भी भय खाता है।

    दैत्य रक्तबिज ने कठोर तप के बल पर वर पाया था की अगर उसके खून की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी तो उस से अनेक दैत्य पैदा हो जाएंगे। उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग निर्दोष लोगों पर करना शुरू कर दिया।

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  • Saraswati क्यों किया था ब्रह्मा ने अपनी ही पुत्री से विवाह

    हिन्दू धर्म के दो ग्रंथों ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का अपनी ही बेटी सरस्वती से विवाह करने का प्रसंग है जिसके फलस्वरूप इस धरती के प्रथम मानव ‘मनु’ का जन्म हुआ। लेकिन ब्रह्मा ने अपनी ही पुत्री से विवाह जैसा निन्दनीय काम क्यों किया इसका जवाब जानने के लिए पढ़ते है पुराणों में वर्णित कथा। (more…)

  • Lord Ganesha क्यों चढ़ाते हैं गणेश जी को दूर्वा?

    दूर्वा यानि दूब यह एक तरह की घास होती है जो गणेश पूजन में प्रयोग होती है। एक मात्र गणेश ही ऐसे देव है जिनको यह चढ़ाई जाती है। दूर्वा गणेशजी को अतिशय प्रिय है। लेकिन आखिर क्यों दूर्वा की 21 गांठे गणेशजी को चढ़ाई जाती है इसके लिए पुराणों में एक कथा है।

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  • क्यों चढ़ाते हैं हनुमान जी को सिंदूर का चोला?

    हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। सिंदूर का हिन्दू धर्म में पूजा पाठ में भी महत्तव है। कई देवी देवताओं को सिंदूर चढ़ाया जाता है। लेकिन गणेश जी, भैरू जी (भैरव जी) और हनुमान जी को तो सिंदूर का पूरा चोला चढाने की परम्परा है। हर परम्परा के पीछे कोई कारण, कहानी जरूर होती है। हनुमान जी को भी ऊपर से नीचे तक सिंदूर चढाने के पीछे एक कहानी है जिसका वर्णन तुलसीदास जी ने भी रामचरित मानस में किया है। (more…)

  • क्यों चुना था कृष्ण ने कुरुक्षेत्र को ही महाभारत के युद्ध के लिए।

    जब महाभारत युद्ध होने का निश्चय हो गया तो उसके लिये जमीन तलाश की जाने लगी। श्रीकृष्ण जी बढ़ी हुई असुरता से ग्रसित व्यक्तियों को उस युद्ध के द्वारा नष्ट कराना चाहते थे। पर भय यह था कि यह भाई-भाइयों का, गुरु शिष्य का, सम्बन्धी कुटुम्बियों का युद्ध है। एक दूसरे को मरते देखकर कहीं सन्धि न कर बैठें इसलिए ऐसी भूमि युद्ध के लिए चुननी चाहिए जहाँ क्रोध और द्वेष के संस्कार पर्याप्त मात्रा में हों।

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  • Image क्यों दिए थे हनुमान ने भीम को अपने तीन बाल?

    एक बार पांडवों के पास नारद मुनि आए और उन्होंने युधिष्ठर से कहा की स्वर्ग में आपके पिता पांडु दुखी हैं। कारण पूछने पर उन्होंने कहा की पांडु अपने जीते जी राजसूय यज्ञ करना चाहते थे जो न कर सके

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  • क्यों दिया था भगवान शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र?

    भगवान शिव व विष्णु से जुड़ी अनेक कथाएं हमारे धर्म ग्रंथों में मिलती है। ऐसी ही एक रोचक कथा कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी से भी जुड़ी है। इस दिन बैकुंठ चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु व शिव की पूजा करने का विधान है। पुराणों में इस व्रत से जुड़ी जो कथा है, जो इस प्रकार है।

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  • Jai Shri Ram क्यों दिया था राम ने लक्ष्मण को मृत्युदंड?

    रामायण में एक घटना का वर्णन आता है की श्री राम को न चाहते हुए भी जान से प्यारे अपने अनुज लक्ष्मण को मृत्युदंड देना पड़ता है। परंतु क्यों? आखिर क्यों भगवान राम को लक्ष्मण को मृत्युदंड देना पड़ा? (more…)

  • क्यों नही चढ़ाते गणेश को तुलसी?

    एक बार श्री गणेश गंगा किनारे तप कर रहे थे। इसी कालावधि में धर्मात्मज की नवयौवना कन्या तुलसी ने विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर प्रस्थान किया। देवी तुलसी सभी तीर्थस्थलों का भ्रमण करते हुए गंगा के तट पर पंहुची। गंगा तट पर देवी तुलसी ने युवा तरुण गणेश जी को देखा जो तपस्या में विलीन थे। शास्त्रों के अनुसार तपस्या में विलीन गणेश जी रत्न जटित सिंहासन पर विराजमान थे।

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  • क्यों मानते हैं नवरात्र?

    शक्ति उपासना का पर्व नवरात्रि क्यों मनाया जाता है और माँ दुर्गा की आराधना क्यों की जाती है?

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  • क्यों शंख से नही चढ़ाते शिव जी को जल?

    हम सब जानते है की पूजन कार्य में शंख का उपयोग महत्वपूर्ण होता है। लगभग सभी देवी-देवताओं को शंख से जल चढ़ाया जाता है लेकिन शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना वर्जित माना गया है। आखिर क्यों शिवजी को शंख से जल अर्पित नहीं करते है ?

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  • क्यों हारे थे हनुमान से शनि

    शनि के नाम से ही हर व्यक्ति डरने लगता है। शनि की दशा एक बार शुरू हो जाए तो साढ़ेसात साल बाद ही पीछा छोड़ती है। लेकिन हनुमान भक्तों को शनि से डरने की तनिक भी जरूरत नहीं। शनि ने हनुमान को भी डराना चाहा लेकिन मुंह की खानी पड़ी आइए जानें कैसे… (more…)

  • क्यों है ब्रहमा जी का पुरे भारत में केवल एक ही मंदिर?

    ब्रह्मा इस संसार के रचनाकार है, विष्णु पालनहार है और महेश संहारक है। लेकिन हमारे देश में जहाँ विष्णु और महेश के अनगिनत मंदिर है वही खुद की पत्नी सावित्री के श्राप के चलते ब्रह्मा जी का पुरे भारत में एक मात्र मंदिर है जो की राजस्थान के प्रशिद्ध तीर्थ पुष्कर में स्तिथ है।

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  • जब मृत्यु की भी हुई थी मृत्यु

    गोदावरी के पावन तट पे “श्वेत” नामक एक ब्राह्मण रहते थे । जो शिव जी के अनन्य भक्त थे। उनकी आयु पूरी हो चुकी थी । यमदूत उन्हें समय से लेने आये , लेकिन यमदूत श्वेत के घर में प्रवेश नही कर पाये।

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  • देवी – देवताओं के वाहनों के रहस्य – भाग – २

    माँ सरस्वती का वाहन हंस :हंस पवित्र, जिज्ञासु और समझदार पक्षी होता है। यह जीवनपर्यन्त एक हंसनी के ही साथ रहता है। परिवार में प्रेम और एकता का यह सबसे श्रेष्ठ उदाहरण है। इसके अलावा हंस अपने चुने हुए स्थानों पर ही रहता है। तीसरी इसकी खासियत हैं कि यह अन्य पक्षियों की अपेक्षा सबसे ऊंचाई पर उड़ान भरता है और लंबी दूरी तय करने में सक्षम होता है। जो ज्ञानी होते हैं वे हंस के समान ही होते हैं और जो बुद्धत्व प्राप्त कर लेते हैं उनको परमहंस कहा गया है।

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  • दो माँ से आधा-आधा पैदा हुआ था जरासंध

    महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत ग्रंथ में अनेक महारथी व बलशाली राजाओं का वर्णन है। ऐसा ही एक महारथी राजा था जरासंध। उसके जन्म व मृत्यु की कथा भी बहुत ही रोचक है।

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  • Queen द्रौपदी की कुछ अनोखी बातें

    भविष्य पुराण में बताया गया है कि युधिष्ठिर जब जुआ में सबकुछ हार कर वन में जा रहे थे उस समय मैत्रेय ऋषि ने अपने दिव्य दृष्टि से इस बात को जाना था।

    मैत्रेय ने बताया पाण्डवों को बताया कि द्रौपदी ने पूर्व जन्म में ऐसे पुण्य किए हैं जिससे यह जहां भी रहेगी वहां अन्नपूर्णा की तरह इनका भंडार भरा रहेगा। इसलिए वन में रहते हुए आपको कभी भी भोजन और अन्न की चिंता नहीं करनी होगी।

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  • भगवान परशुराम की कुछ सुनी अनसुनी बाते

    हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु के आवेशावतार परशुराम का जन्म हुआ था। परशुराम जयंती के अवसर पर आज हम आपको भगवान परशुराम से संबंधित कुछ रोचक बातें बता रहे हैं, जो इस प्रकार है

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  • maxresdefault भगवान भैरव के आठ रूप

    ॐ शिवगोरक्ष योगी आदेश

    ये है भगवान भैरव के 8 रूप, जानिए किसकी पूजा से मिलता है कौन सा फल। (more…)

  • भगवान शिव के जन्म की कहानी

    भगवान शिव को ‘संहारक’ और ‘नव का निर्माण’ कारक माना गया है। अलग-अलग पुराणों में भगवान शिव और विष्णु के जन्म के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को स्वयंभू (सेल्फ बॉर्न) माना गया है जबकि विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु स्वयंभू हैं।

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  • भीमशंकर ज्योतिर्लिंग की कहानी

    भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में भीमाशंकर का स्थान छठा है। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे कुंभकर्ण के पुत्र भीम की एक कथा प्रसिद्ध है।

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  • ये काम दिलाते हैं आपको पिछले जन्म के पापों से मुक्ति

    हिन्दू शास्त्रों और पुराणों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है इनके माध्यम से हमें कई प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है जो हमारी समस्याओं के समाधान में सहायक सिद्ध होती है. शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति अपने जीवन में कई प्रकार से पुण्य अर्जित कर सकता है जो व्यक्ति के द्वारा जाने अनजाने में किये गए पापों से व्यक्ति को मुक्ति की राह पर ले जाता है। (more…)

  • हमारी रसोई और ज्योतिष?

    9 मसाले कौन कौन से है?

    ये किस प्रकार ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते है व इनके पीछे छिपी वैज्ञानिकता क्या है ? (more…)

  • Rekha हाथों की पाँच उँगलियों का महत्त्व

    हमारे हाथ की पांचो उंगलिया शरीर के अलग अलग अंगों से जुडी होती है। इसका मतलब आप को दर्द नाशक दवाइयां खाने की बजाए इस आसान और प्रभावशाली तरीके का इस्तेमाल करना करना चाहिए। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बतायेगे की शरीर के किसी हिस्से का दर्द सिर्फ हाथ की उंगली को रगड़ने से कैसे दूर किया जा सकता है।

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