Culture (संस्कृति)


  • शमशान से लौटने पर नहाना क्यों जरूरी है?

    जन्म और मृत्यु प्रकृति के अटल सत्यों में सबसे प्रमुख है। जीवन-मरण के फेर में इंसान तभी बंध जाता है जब ईश्वर उसकी रचना करता है। मनुष्य जीवन में 16 संस्कारों को समाहित किया गया है, जो जन्म के साथ शुरू होते हैं और मृत्यु पर्यंत साथ रहते हैं।

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  • Why we tie Mauli or Kalava in hand?

    Let us first understand, what does Mauli or Kalava mean? The literal meaning of Mauli in Sanskrit is ‘crown’, which means above all. Well, Mauli is a sanctified thread which is also known as ‘Kalava’. This thread is dyed in red and yellow combination.

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  • सूर्य देव को जल चढ़ाने के धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व।

    सूर्य को सभी ग्रहों में श्रेष्ठ माना जाता हैहिन्दू धर्म में सूर्य का बहुत महत्त्व बताया गया है। सदियों से हमारी परम्परा में नहाने के बाद सूर्य को अर्ध्य देने अर्थात जल चढाने का नियम हैआज हम आपको सूर्य को जल चढाने का महत्व बताने जा रहे है

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  • नवरात्रों में यदि मिले यह संकेत, तो समझें माता रानी है आपसे प्रसन्न।

    हिन्दू नव-वर्ष एवं गुड़ी पड़वा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। नवरात्रि चल रहे हैं और यह एक ऐसा वक्त है जब भक्तजन पूरे विधि-विधान से देवी मां का पूजन कर उसे खुश करने में लगे हैं, लेकिन क्या देवी मां की कृपा आप पर हो रही है ? क्या आपकी पूजा सफल हो रही है ?

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  • क्या है गुड़ी पड़वा पूजन समय?

    गुड़ी पड़वा का पर्व महाराष्‍ट्र, आंध्र प्रदेश और गोवा के अलावा देश के कई दक्षिण भारतीय राज्‍यों में हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाता है। यह त्‍योहार चैत्र मास के शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले नए साल की शुरुआत को ही मनाने की परंपरा है। गुड़ी का अर्थ होता है ध्‍वज और पड़वा का अर्थ होता है प्रतिपदा।

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  • चैत्र नवरात्रि: पूजन एवं घटस्थापना महूर्त

    एक वर्ष में चार नवरात्रि चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ मास में आती है, जो शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलते हैं। इनमें चैत्र और आश्विन नवरा‍त्र प्रमुख माने जाते हैं। इसमें भी आश्विन नवरा‍त्र का काफी महत्व है, इसे वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है।

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  • जानें, किसी भी शुभ कार्य के पूर्व क्यों खिलाते हैं दही-शक्कर?

    अक्सर देखा जाता है कि जब भी घर का कोई सदस्य किसी शुभ काम के लिए घर से बाहर जाता है तो उसे दही खिलाई जाती है। हमारे समाज में ये पंरपरा सदियों से चली आ रही है। इसकी मुख्य वजह है, हिंदू धर्म में दही को पांच अमृत माना जाना।

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  • क्यों मानते हैं गणगोर का पर्व?

    गणगौर का त्यौहार मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाने वाला त्योहार है. गणगौर का अर्थ है गण माने तो शिव एवं गौर यानी गौरी मां. इस दिन भोले नाथ और गौरा की पूजा की जाती है.

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  • क्यों वर्जित है शिव पूजन में केतकी के फूल?

    हिन्दू धर्म में देवी – देवताओं के पूजन में सुगन्धित फूलो का बड़ा महत्व है, हम सभी देवी – देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पूजन में सुगंधित पुष्प काम में लेते है। पर क्या आपको पता है कि शिवजी कि पूजा में केतकी (केतकी संस्कृत का शब्द है हिंदी में इसे केवड़ा कहते है) के फूल का प्रयोग वर्जित है।

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  • क्यो रविवार को तुलसी को स्पर्श एवं पूजन करना निषेद होता है?

    आपने अपने घर के बड़ो से सुन रखा होगा की तुलसी के पौधे को ना तो रविवार के दिन पानी से सींचा जाता है और ना ही उसके पत्ते तोड़े जाते है| आइए जानते हैं कि ऐसा ना करने के पीछे का कारण क्या है?

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  • क्या है फाल्गुन मास का धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व?

    फाल्गुन या फागुन का महीना हिन्दू पंचांग का अंतिम महीना है. इस महीने की पूर्णिमा को फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण इस महीने का नाम फाल्गुन है. इस महीने से धीरे धीरे गरमी की शुरुआत होती है , और सर्दी कम होने लगती है.

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  • होली पर इन उपायों से घर लाएं बरकत।

    पर्व त्यौहार निश्चित तिथि और नक्षत्र में होते है। पर्व का दिन कोई सामान्य दिन नहीं होता है वो विभिन्न योग से बनता है और बहूत खास होता है। चाहे वो दिवाली का दिन हो होली हो या दशहरा, लोग अपने हिसाब से टोटके करते हैं और इस दिन का लाभ उठाते हैं।

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  • कैसे निकाला जाए विवाह का महूर्त?

    कैसे निकाला जाये विवाह का मुहूर्त

    सही विवाह नही मिलान होने से वर ने आत्महत्या कर ली आज कम्पयूटर का जमाना है जिसे देखो अपने अपने कम्पयूटर में कोई न कोई सोफ़्टवेयर ज्योतिष वाला डालकर बैठा है। जैसे ही किसी भी वर कन्या की विवाह वाली बात की जाती है सीधे से वर और कन्या की जन्म तारीख समय आदि के साथ कुंडली बना ली जाती है और उन्हे सीधे से विवाह मिलान के लिये देखा जाता है।

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  • पितृपक्ष में कौवे का क्यों है महत्त्व?

    धर्म ग्रंथों के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष कहलाता है। इस दौरान पितर यम लोक से 16 दिनों के लिए धरती पर आते हैं। साल में ये विशेष दिन होते हैं, जब आप अपने पितरों को सम्मान देकर उनका ऋण उतारने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आपको इस जीवन में लाकर जो उपकार किया है, उसके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का यह त्योहार है।

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  • धरती पर किसने सब से पहले किया था श्राद्ध?

    श्राद्ध के बारे में धर्म ग्रन्थों में अनेक बाते बताई गई हैं। दुनिया में सबसे पहले श्राद्ध किसने किया था। महाभारत काल में श्राद्ध के बारे में पता चलता है, जिसमें भीष्म पितामाह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के संबंध में कई बाते बताई हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि श्राद्ध की परंपरा कैसे शुरू हुई और धीरे-धीरे जनमानस तक कैसे यह परंपरा शुरू हुई।

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  • श्राद्ध में किन गलतियों को करने से परहेज़ करना चाहिए?

    हमारे धर्म शास्त्रों में श्राद्ध पक्ष के लिए कई नियम बनाए गए हैं। इन नियमों में कुछ बातों का निषेध बताया गया है वहीं कुछ बातें जरूरी बताई गई हैं। ऐसा माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से हमारे पितर हमसे संतुष्ट होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं इसलिए पितरों को प्रसन्न रखने के लिए इन नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।

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  • श्राद्ध में किन बातों का रखें ध्यान?

    16 दिवसीय महालय श्राद्ध पक्ष कहलाता है। इस समय सूर्य देव कन्या राशि में स्थित होते हैं। इस अवसर पर चंद्रमा भी पृथ्वी के काफी निकट होता है। चंद्रमा के थोड़ा ऊपर पितृलोक माना गया है। सूर्य रश्मियों पर सवार होकर पितृ पृथ्वी लोक में अपने पुत्र-पौत्रों के यहां आते हैं तथा अपना भाग लेकर शुक्ल प्रतिप्रदा को सूर्य रशिमों पर सवार होकर वापस अपने लोक लौट जाते हैं।

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  • Rashifal दिनांक ०4.०७.२०१८ का पंचांग एवम राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    04 जुलाई सन 2018 ईस्वी, बुधवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    षष्ठी, कृष्ण पक्ष
    आषाढ
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • शास्त्रों में वर्णित है दिव्य अस्त्र एवं शस्त्र।

    १.ब्रह्मास्त्र -अचूक और एक विकराल अस्त्र है। यह शत्रु का नाश करके ही छोड़ता है। इसका प्रतिकार दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही हो सकता है, अन्यथा नहीं। रामायण काल में यह विभीषण और लक्ष्मण के पास था।

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  • क्यों हैं “ॐ नमः शिवाय” का जाप तेज एवं प्रभावशाली?

    भगवान शिव के पांच मुख उनके अग्नि स्तंभ के रुप में प्रकट हुए थे। ये पांच मुख, पांचों तत्व पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि तथा वायु के रूप थे। सर्वप्रथम ॐ शब्द की उत्पत्ति हुई थी, उसके बाद पांच शब्द नम: शिवाय की उत्पत्ति उनके पांचों मुखों से हुई। इसे सृष्टि का सबसे पहला मंत्र माना जाता है और यह महामंत्र है। (more…)

  • Rashifal पंचांग एवं राशिफल दिनांक १४.०६.२०१८

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    14 जून सन 2018 ईस्वी, गुरुवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    प्रतिपदा, शुक्ल पक्ष
    ज्येष्ठ
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १३.०६.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-

    13 जून सन 2018 ईस्वी, बुधवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार

    अमावस्या, कृष्ण पक्ष
    अधिक ज्येष्ठ
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १२.०६.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    12 जून सन 2018 ईस्वी, मंगलवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार:-
    त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
    अधिक ज्येष्ठ

    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक 09 जून 2018 का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार
    09 जून सन 2018 ईस्वी, शनिवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    दशमी, कृष्ण पक्ष
    अधिक ज्येष्ठ
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १४.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    14 मई सन 2018 ईस्वी, सोमवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    ज्येष्ठ , कृष्ण पक्ष
    चतुर्दशी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १२.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार
    12 मई सन 2018 ईस्वी, शनिवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    ज्येष्ठ , कृष्ण पक्ष
    द्वादशी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०९.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    ।। 🕉 ।।
    🌹🙏जय महाकाल🙏🌹
    🌞 सुप्रभातम् 🌞
    ««« आज का पंचांग »»»
    कलियुगाब्द………………5120
    विक्रम संवत्…………….2075
    शक संवत्……………….1940
    मास………………………जयेष्ठ

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  • Rashifal दिनांक ०८.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    08 मई सन 2018 ईस्वी, मंगलवार

    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    ज्येष्ठ , कृष्ण पक्ष
    अष्ठमी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०६.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    06 मई सन 2018 ईस्वी, रविवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार -:
    ज्येष्ठ , कृष्ण पक्ष
    षष्ठी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०५.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    05 मई सन 2018 ईस्वी, शनिवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    ज्येष्ठ , कृष्ण पक्ष
    पंचमी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०४.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    04 मई सन 2018 ईस्वी, शुक्रवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार:-
    ज्येष्ठ , कृष्ण पक्ष
    चतुर्थी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०३.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    03 मई सन 2018 ईस्वी, गुरुवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार:-
    ज्येष्ठ , कृष्ण पक्ष
    तृतीया
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०२.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार
    02 मई सन 2018 ईस्वी, बुधवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    जेष्ठ , कृष्ण पक्ष
    द्वितीया
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०१.०५.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार
    01 मई सन 2018 ईस्वी, मंगलवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष
    प्रतिपदा
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक २९.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार –
    29 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, रविवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार

    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    चतुर्दशी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक २८.०४.२०१८ का पंचांग और राशिफल

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    *********|| जय महाकाल||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    28 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, शनिवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    त्रयोदशी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक २७.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार
    27 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, शुक्रवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    द्वादशी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक २५.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार
    25 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: बुधवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    दशमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक २४.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    24 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, मंगलवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    नवमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक २३.०४.२०१८ का पंचांग और राशिफल

    ।।जय महाकाल।।

    ।। 🕉 ।।
    🚩 🌞 सुप्रभातम्🌞 🚩
    ««« आज का पंचांग»»»
    कलियुगाब्द………….5120
    विक्रम संवत्………..2075
    शक संवत्…………..1940

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  • Rashifal दिनांक २२.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    ।। 🕉 ।।
    🌹🙏जय महाकाल🙏🌹*
    🚩 सुप्रभातम् 🚩
    ««« आज का पंचांग »»»
    कलियुगाब्द……………5120
    विक्रम संवत्………….2075
    शक संवत्…………….1940
    मास…………………..बैशाख
    पक्ष ……………………शुक्ल

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  • Rashifal दिनांक२१.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺
    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार
    21 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: शनिवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    षष्ठी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक २०.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    20 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: शुक्रवार

    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    पंचमी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १९.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय श्री राधे ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    19 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: बृहस्पतिवार

    🇮🇳 भारतीय मतानुसार

    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    चतुर्थी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक१८.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧आंग्ल मतानुसार :-
    18 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: बुधवार

    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , शुक्ल पक्ष
    तृतीया
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal पंचांग एवं राशिफल दिनांक १७.०४.२०१८

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    17 अप्रैल सन 2018 ईस्वी।

    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , शुक्ल पक्ष, द्वितीया

    ””'””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १६.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    16 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: सोमवार

    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , कृष्ण पक्ष, अमावस्या

    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १५.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺
    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    दिनाँक -: 15/04/2018,रविवार
    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    चतुर्दशी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक 12.04.2018 का पंचांग एवं राशिफल

    🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺
    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    12 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन गुरुवार।

    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    एकादशी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल )

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  • Rashifal दिनांक 11.04.2018 का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    11अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: बुधवार
    🇮🇳 भारतीय मतानुसार

    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    दशमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक 09.04.2018 का पंचांग एवं राशिफल

    🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺
    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    09 अप्रैल सन 2018 ईस्वी। दिन – सोमवार

    🇮🇳भारतीय मतानुसार

    वैशाख , कृष्ण पक्ष, नवमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक 08.04.2018 का पंचांग एवम राशिफल

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    *********|| जय महाकाल||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    08 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन – रविवार
    🇮🇳🇮🇳 भारतीय मतानुसार

    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    अष्टमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक 07.04.2018 का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    07 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: शनिवार

    🇮🇳🇮🇳 भारतीय मतानुसार

    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    सप्तमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक 06 अप्रैल 2018 का पंचांग एवं राशिफल

    🌺🌺🙏🙏 जय महाकाल🙏🙏🌺🌺

    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    06 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: शुक्रवार

    🇮🇳भारतीय मतानुसार

    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    षष्ठी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०५.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺
    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    05 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: गुरुवार

    🇮🇳भारतीय मतानुसार
    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    पंचमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • किसे बनाएं गुरु, क्या है शिष्य की परिभाषा

    ॐ शिवगोरक्ष योगी आदेश

    ।। पगलु वाणी ।।

    पानी पीओ छान कर, गुरु बनाओ जान कर।

    गुण मिले तो गुरु बनाओ चित्त मिले तो चेला। वरना पगलु तू घूम अकेला।।

    गुरु से गुण लिए जाते है यदि शिष्य को लगता है कि गुरु में कोई अवगुण है तो उसको अनदेखा कर देना चाहिए। या फिर गुरु से स्वयं की दूरी बना लेना चाहिए । (more…)

  • Rashifal दिनांक 04.03.2018 का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :
    04 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन बुधवार

    🇮🇳भारतीय मतानुसार

    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    चतुर्थी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०३.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
    03 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, दिन: मंगलवार

    🇮🇳 भारतीय मतानुसार
    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    तृतीया
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Ganpati Bappa मंगल चतुर्थी: उपाय एवं पूजन तिथि

    इस बार ३ अप्रैल २०१८ मंगलवार को शाम ०४.४४ से ०४ अप्रैल २०१८ बुधवार को शाम ०५.३२ तक वैशाख मास (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार चैत्र मास) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है। इस दिन भगवान श्रीगणेश को खुश करने के लिए उपवास किया जाता है। शाम को चंद्रदेव के साथ पूजा की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस दिन कुछ उपाय करें तो दुर्भाग्य दूर हो सकता है। (more…)

  • aaj-ka-panchang दिनांक ०२.०४.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    02 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, सोमवार

    🇮🇳भारतीय मतानुसार

    वैशाख, कृष्ण पक्ष
    द्वितीया
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०१.०४.२०१८ का पंचांग और राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    🇬🇧 आंग्ल मतानुसार:-
    01 अप्रैल सन 2018 ईस्वी, रविवार

    🇮भारतीय मतानुसार

    वैशाख , कृष्ण पक्ष
    प्रतिपदा
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनाँक २१.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

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    *********|| जय महाकाल ||*********
    🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏

    आँग्ल मतानुसार दिनाँक -: 21/03/2018, बुधवार
    चैत्र , शुक्ल पक्ष
    चतुर्थी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल) (more…)

  • gangaur क्या है गणगौर? क्यों मनाते हैं ये पर्व?

    अपने प्राकृतिक सौंदर्य एवं समृद्ध इतिहास की वजह से राजस्थान की रेत के कण-कण में पर्यटकों की रुचि स्पष्ट दिखती है। भारत ही नहीं, विश्व के पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले राजस्थान में आयोजित होने वाले मेले एवं उत्सव इसे और विशिष्ट रूप प्रदान करते हैं। अब जब कि हवाओं पर वसंत का मौसम राज कर रहा है तब राजस्थान में इस ऋतु पर और रंगोत्सव होली का रंग लगातार छाया हुआ है। (more…)

  • Rashifal दिनाँक २०.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    आंग्ल मतानुसार दिनाँक -: 20/03/2018,मंगलवार
    चैत्र , शुक्ल पक्ष
    तृतीया
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Love Marraige कुंडली से जानिए विवाह योग्य

    कुण्डली के योग विवाह समय को किस प्रकार प्रभावित करते है

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  • Rashifal दिनांक १९.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 19/03/2018,सोमवार
    चैत्र , शुक्ल पक्ष
    द्वितीया
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १८.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 18/03/2018,रविवार
    चैत्र , शुक्ल पक्ष
    प्रतिपदा
    “”‘””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • नवरात्र घटस्थापना का उचित महूरत नवरात्र घटस्थापना का उचित महूरत

    कल घट स्थापना के लिए सभी मुर्हत सर्वश्रेष्ठ है अभिजात मुर्हत तक पर रविवार ओर नये साल के आगमन के हिसाब से पहला चौघडियाँ छोड़कर आप सवा आठ, सवा नौ, सवा दस, सवा ग्यारह, ओर सवा बारह तक मुर्हत मे घट स्थापना कर सकते है ।। (more…)

  • Rashifal दिनांक १६.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 16/03/2018/शुक्रवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    चतुर्दशी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal पंचांग एवं राशिफल १४.०३.२०१८

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 14/03/2018,बुधवार
    चैत्र , कृष्ण पक्ष
    द्वादशी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १३.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 13/03/2018,मंगलवार
    चैत्र , कृष्ण पक्ष
    एकादशी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनाँक १२.०३.२०१८ का पंचांग और राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 12/03/2018,सोमवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    दशमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ११.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 11/03/2018,रविवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    नवमी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक १०.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 10/03/2018,शनिवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    नवमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०९.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 09/03/2018,शुक्रवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    अष्ठमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०८.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 08/03/2018,गुरुवार
    चैत्र , कृष्ण पक्ष
    सप्तमी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०७.०३.२०१८ का पंचांग एवम राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 07/03/2018,बुधवार
    चैत्र , कृष्ण पक्ष
    षष्ठी
    “””””‘”””””””””””””””””””””””””””‘”‘(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०६.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 06/03/2018,मंगलवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    पंचमी
    “””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal दिनांक ०५.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 05/03/2018,सोमवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    चतुर्थी
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

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  • Rashifal पंचांग एवं राशिफल दिनांक ०४.०३.२०१८

    *********|| जय महाकाल||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 04/03/2018,रविवार
    चैत्र , कृष्ण पक्ष
    तृतीया
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल) (more…)

  • Rashifal दिनांक ०३.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महाकाल||*********

    अथ पंचांगम्
    दिनाँक -: 03/03/2018,शनिवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    द्वितीया
    “”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल) (more…)

  • Rashifal दिनांक ०२.०३.२०१८ का पंचांग एवं राशिफल

    *********|| जय महकाल ||*********
    अथ पंचांगम्

    दिनाँक -: 02/03/2018,शुक्रवार
    चैत्र, कृष्ण पक्ष
    प्रतिपदा
    “”””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल) (more…)

  • Holi होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें

    आप सभी को आप सभी के परिवार वालो को हिन्दु सनातन धर्म के लोकप्रिय त्योंहार होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं ।। (more…)

  • weekdays सप्ताह के वार के अनुसार करें ये काम जीवन में मिलेगी सफलता

    सनातन धर्म में शुभ-अशुभ का बड़ा महत्व होता हैं। सनातन धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले उसका शुभ मूर्हत देखा जाता हैं, ताकि उस काम में सफलता प्राप्त हो। (more…)

  • राशि मंत्र ना कोई पूजा, ना कोई तंत्र, जपें बस ये राशि मंत्र

    अक्सर कई ज्योतिष उपाय एक साथ पढ़ने पर व्यक्ति असमंजस में पड़ जाता है कि आखिर उसके लिए क्या उचित है और क्या अनुचित।

    व्यक्ति अगर अपनी राशि के अनुसार मंत्र जाप करे तो निसंदेह शीघ्र सफलता मिलती है। मंत्र पाठ से व्यक्ति कई प्रकार के संकट से मुक्त रहता है। आर्थिक रूप से संपन्न हो जाता है।

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  • कैसे हुआ था नारियल का जन्म?

    हिन्दू धर्म में नारियल का विशेष महत्तव है। नारियल के बिना कोई भी धार्मिक कार्यक्रम संपन्न नहीं होता है। नारियल से जुडी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है जो जिसके अनुसार नारियल का इस धरती पर अवतरण ऋषि विश्वामित्र द्वारा किया गया था। आज हम आपको नारियल के जन्म से जुडी यही कहानी बता रहे है।

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  • क्या है कुबेर के ९ रूप?

    1 – उग्र कुबेर — यह कुबेर धन तो देते ही है साथ में आपके सभी प्रकार के शत्रुओ का भी हनन कर देते है ! (more…)

  • क्या हुआ था गणेश जी का असली मस्तिष्क कटने के बाद?

    भगवान गणेश गजमुख, गजानन के नाम से जाने जाते हैं, क्योंकि उनका मुख गज यानी हाथी का है। भगवान गणेश का यह स्वरूप विलक्षण और बड़ा ही मंगलकारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं या विचार किया है कि गणेश का मस्तक कटने के बाद उसके स्थान पर गजमुख तो लगा, लेकिन उनका असली मस्तक कहां गया? (more…)

  • ये काम दिलाते हैं आपको पिछले जन्म के पापों से मुक्ति

    हिन्दू शास्त्रों और पुराणों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है इनके माध्यम से हमें कई प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है जो हमारी समस्याओं के समाधान में सहायक सिद्ध होती है. शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति अपने जीवन में कई प्रकार से पुण्य अर्जित कर सकता है जो व्यक्ति के द्वारा जाने अनजाने में किये गए पापों से व्यक्ति को मुक्ति की राह पर ले जाता है। (more…)

  • कैसे करें महाशिवरात्रि पूजन

    श्री गणेशाय नमः

    महाशिवरात्रि पर 4 प्रहरों में ऐसे करें शिव पूजन, जपें ये मंत्र…

    शिव होंगे आप पर अतिप्रसन्न, अगर करेंगे इस तरह उनका पूजन… (more…)

  • नाड़ी दोष एवं नाड़ी दोष परिहार

    1 -वर कन्या की एक राशि हो, लेकिन जन्म नक्षत्र अलग अलग हों या जन्म नक्षत्र एक ही हों परन्तु राशियां अलग अलग हों तो नाड़ी दोष नही होता है , यदि जन्म नक्षत्र एक ही हों चरण भेद हो तो अति आवश्यकता अर्थात सगाई हो गई हो, एक दूसरे को पसंद करते हों तब इस स्थिति में विवाह किया जा सकता है। (more…)

  • किन कारणों से दिखाई देती है कुंडली में गरीबी?

    1. जिस व्यक्ति की कुंडली के द्वितीय भाव में शुभ ग्रह या शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो उसे धन प्राप्त होता है। (more…)

  • अमरनाथ धाम से जुडी शिव पार्वती की गाथा

    एक बार देवी पार्वती ने देवों के देव महादेव से पूछा, ऐसा क्यों है कि आप अजर हैं, अमर हैं लेकिन मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरूप में आकर, फिर से बरसों तप के बाद आपको प्राप्त करना होता है । जब मुझे आपको पाना है तो मेरी तपस्या और इतनी कठिन परीक्षा क्यों? आपके कंठ में पडी़ नरमुंड माला और अमर होने के रहस्य क्या हैं?

    महादेव ने पहले तो देवी पार्वती के उन सवालों का जवाब देना उचित नहीं समझा, लेकिन पत्नीहठ के कारण कुछ गूढ़ रहस्य उन्हें बताने पडे़। शिव महापुराण में मृत्यु से लेकर अजर-अमर तक के कर्इ प्रसंंग हैं, जिनमें एक साधना से जुडी अमरकथा बडी रोचक है। जिसे भक्तजन अमरत्व की कथा के रूप में जानते हैं।

    हर वर्ष हिम के आलय (हिमालय) में अमरनाथ, कैलाश और मानसरोवर तीर्थस्थलों में लाखों श्रद्घालु पहुंचते हैं। सैकडों किमी की पैदल यात्रा करते हैं, क्यों? यह विश्वास यूं ही नहीं उपजा। शिव के प्रिय अधिकमास, अथवा आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण मास तक की पूर्णिमा के बीच अमरनाथ की यात्रा भक्तों को खुद से जुडे रहस्यों के कारण और प्रासंगिक लगती है

    यदि आपके पास वेद-पुराण, कुंडली से सम्बंधित सवाल हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं, हमारा ईमेल id है @jaymahakaal01@gmail.com

    साथ ही आप हमारे फेसबुक, ट्विटर, और इंस्टाग्राम पेज @jaymahakal01 को like और share करें और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए।

    www.jaymahakaal.com

    जय माँ। जय महाकाल।

  • कौन हैं अघोरी: कैसी है उनकी रहस्मयी दुनिया – भाग २

    क्यों जिद्दी और गुस्सैल होते हैं अघोरी

    अघोरियों के बारे में मान्यता है कि वे बड़े ही जिद्दी होते हैं। अगर किसी से कुछ मांगेंगे, तो लेकर ही जाएंगे। क्रोधित हो जाएंगे तो अपना तांडव दिखाएंगे या भलाबुरा कहकर उसे शाप देकर चले जाएंगे। एक अघोरी बाबा की आंखें लाल सुर्ख होती हैं लेकिन अघोरी की आंखों में जितना क्रोध दिखाई देता हैं बातों में उतनी ही शीतलता होती है।

    अघोरी की वेशभूषा

    कफन के काले वस्त्रों में लिपटे अघोरी बाबा के गले में धातु की बनी नरमुंड की माला लटकी होती है। नरमुंड हो तो वे प्रतीक रूप में उसी तरह की माला पहनते हैं। हाथ में चिमटा, कमंडल, कान में कुंडल, कमर में कमरबंध और पूरे शरीर पर राख मलकर रहते हैं ये साधु। ये साधु अपने गले में काली ऊन का एक जनेऊ रखते हैं जिसेसिलेकहते हैं। गले में एक सींग की नादी रखते हैं। इन दोनों कोसींगी सेलीकहते हैं।

    अघोरपंथ तांत्रिकों के तीर्थस्थल

    अघोरपंथ के लोग चार स्थानों पर ही श्मशान साधना करते हैं। चार स्थानों के अलावा वे शक्तिपीठों, बगलामुखी, काली और भैरव के मुख् स्थानों के पास के श्मशान में साधना करते हैं। यदि आपको पता चले कि इन स्थानों को छोड़कर अन्य स्थानों पर भी अघोरी साधना करते हैं तो यह कहना होगा कि वे अन्य श्मशान में साधना नहीं करते बल्कि यात्रा प्रवास के दौरान वे वहां विश्राम करने रुकते होंगे या फिर वे ढोंगी होंगे।

    तीन प्रमुख स्थान :

    1. तारापीठ का श्मशान : कोलकाता से 180 किलोमीटर दूर स्थित तारापीठ धाम की खासियत यहां का महाश्मशान है। वीरभूम की तारापीठ (शक्तिपीठ) अघोर तांत्रिकों का तीर्थ है। यहां आपको हजारों की संख्या में अघोर तांत्रिक मिल जाएंगे। तंत्र साधना के लिए जानीमानी जगह है तारापीठ, जहां की आराधना पीठ के निकट स्थित श्मशान में हवन किए बगैर पूरी नहीं मानी जाती। कालीघाट को तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है, कालीघाट में होती हैं अघोर तांत्रिक सिद्धियां
    2. कामाख्या पीठ के श्मशान : कामाख्या पीठ भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो असम प्रदेश में है। कामाख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। प्राचीनकाल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्रसिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। कालिका पुराण तथा देवीपुराण मेंकामाख्या शक्तिपीठको सर्वोत्तम कहा गया है और यह भी तांत्रिकों का गढ़ है।
    3. रजरप्पा का श्मशान : रजरप्पा में छिन्नमस्ता देवी का स्थान है। रजरप्पा की छिन्नमस्ता को 52 शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है लेकिन जानकारों के अनुसार छिन्नमस्ता 10 महाविद्याओं में एक हैं। उनमें 5 तांत्रिक और 5 वैष्णवी हैं। तांत्रिक महाविद्याओं में कामरूप कामाख्या की षोडशी और तारापीठ की तारा के बाद इनका स्थान आता है।

    चक्रतीर्थ का श्मशान : मध्यप्रदेश के उज्जैन में चक्रतीर्थ नामक स्थान और गढ़कालिका का स्थान तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। उज्जैन में काल भैरव और विक्रांत भैरव भी तांत्रिकों का मुख् स्थान माना जाता है।

    सभी 52 शक्तिपीठ तो तांत्रिकों की सिद्धभूमि हैं ही इसके अलावा कालिका के सभी स्थान, बगलामुखी देवी के सभी स्थान और दस महाविद्या माता के सभी स्थान को तांत्रिकों का गढ़ माना गया है। कुछ कहते हैं कि त्र्यम्बकेश्वर भी तांत्रिकों का तीर्थ है।

    तांत्रिकों के देवीदेवताओं के नाम

    तंत्र की मुख्य 10 देवियां हैं जिन्हें 10 महाविद्या कहा जाता है

    1. काली, 2. तारा, 3. षोडशी, (त्रिपुरसुंदरी), 4. भुवनेश्वरी, 5. छिन्नमस्ता, 6. त्रिपुर भैरवी, 7. द्यूमावती, 8. बगलामुखी, 9. मातंगी और 10. कमला।

    भैरव : भगवान भैरव को शिव का अंश अवतार माना जाता है और ये तांत्रिकों के प्रमुख पूजनीय भगवान हैं। इन्हें शिव के 10 रुद्रावतारों में से एक माना गया है। भैरव के 8 रूप हैं

    1. असितांग भैरव, 2. चंड भैरव, 3. रूरू भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाल भैरव, 7. भीषण भैरव, 8. संहार भैरव।

    भय को भगाए काल भैरव

    10 रुद्रावतार हैं

    1. महाकाल, 2. तार, 3. बाल भुवनेश, 4. षोडश श्रीविद्येश, 5. भैरव, 6. छिन्नमस्तक, 7. धूमवान, 8. बगलामुख, 9. मातंग और 10. कमल।

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