अपरिजिता: उपयोग एवं महत्त्व

अपराजिता बहुत सामान्य सा पौधा है इसके आकर्षक फूलों के कारण इसे लान की सजावट के तौर पर भी लगाया जाता है. इसकी लताएँ होती हैं. ये इकहरे फूलों वाली बेल भी होती है और दुहरे फूलों वाली भी. फूल भी दो तरह के होते हैं -नीले और सफ़ेद आप लोग अपने घरों में सफ़ेद फूलों वाली अपराजिता ही लगाएं क्योंकि यही सांप के ज़हर की दुश्मन है.


अंग्रेजी नाम – क्लितोरिया , हिन्दी नाम – कोयाला , संस्कृत नाम – कोकिला , बंगाली नाम – अपराजिता , गुजराती नाम – गरणी, मलयालम नाम – शंखपुष्पम, मराठी नाम – गोकर्णी, तमिल नाम – कक्कानम, तेलुगु नाम – शंखपुष्पम, यूनानी नाम – मेज़ेरिओन

अपराजिता पौधे के सभी भागों को औषधीय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं. अपराजिता पौधा सामान्य तौर पर आयुर्वेद के पंचकर्म उपचार में प्रयोग किया जाता है. आयुर्वेद का पंचकर्म उपचार शरीर में से टॉक्सिन्स को निकालकर शरीर के संतुलन में सहायता करता है.

आयुर्वेद में अपराजिता जड़ी बूटी को मेध्या श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है. मेध्या जड़ी बूटिया याददाश्त और लर्निंग सुधारने में मदद करती हैं. ये मस्तिष्क के विकास की समस्याओं और इम्पैरेड कॉग्निटिव फंक्शन की समस्याओं से पीड़ित बच्चों के लिए बहुत मददगार है.

  • भूत-प्रेत भगाने हेतु-शनिवार की रात्रि में नीली अपराजिता की जड़ को प्राप्त करके सिद्ध करके भूत-प्रेत बाधा से युक्त रोगी के गले में पहना देने से किसी भी प्रकार नकारात्क उर्जा एवं भूत-प्रेत बाधा दूर हो जाती है।
  • प्रसव कष्ट-यदि किसी गर्भवती महिला को प्रसव में कष्ट न हो तो उसके लिए उस स्त्री के कमर में सफेद अपराजिता की जड़ पहना दें
  • नकारात्मक उर्जा दूर करने के लिए-यदि आपके घर या आॅफिस में नाकारात्मक उर्जा का वास बना रहता है तो श्वेत अपराजिता की जड़ को शनिवार के दिन एक नीले कपड़े में बाॅधकर दरवाजे पर लटका देने से नकारात्मक उर्जा दूर हो जाती है।

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