Ayurveda (आयुर्वेद)

  • आयुर्वेद का इतिहास

    आयुर्वेद, या आयुर्वेदिक दवाइया, भारतीय सभ्यता के इतिहास से जुडी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसे एक पूरक चिकित्सा के रूप में सदियों से प्रयोग किया जाता रहा है, भूमंडलीकरण या आधुनिकीकरण के दौर में प्रचलित चिकित्सा पद्धतिया एक प्रकार की पूरक चिकित्सा पद्धतिया ही है, पश्चिमी देशो में आयुर्वेद के उपचार और प्रथाओं को सामान्य स्वास्थ्य अनुप्रयोगों में और कुछ मामलों में चिकित्सा उपयोग में एकीकृत किया गया है।

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  • आयुर्वेद का इतिहास – किसने शुरुआत की आयुर्वेद की जानते है इस भाग में

    ब्रम्हाजी पिताओं के पिता है इसलिये हम लोग इन्हें पितामह कहा करते हैं। कहा जाता है कि संततिपर पितासे भी बढ़कर पितामहका स्नेह होता हैं। ये कहावत अपने पितामह ब्रह्माजी पर ठीक ठीक चरितार्थ होती है। ये अपना स्नेह हमपर अनवरत बरसाते रहते है यदि कभी हम अपने पथ से विचलित होते है तो इनके हृदय को ठेस पहुँचती है और ये किसी न किसी रूप में हमें सावधान कर देते है।

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  • गुलाब के बेमिसाल फायदे

    गुलाब के बेमिसाल फायदे

    1- कान में दर्द होने पर गुलाब की पत्तियों के रस की थोड़ी बूंदे कान में डालने से कान के दर्द में राहत मिलेगी।

    2- गुलाब के अर्क में नींबू का रस मिलाकर दाद पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है। (more…)

  • Charnamrit क्या अंतर है ‘पंचामृत’ और ‘चरणामृत’ में

    मंदिर में या फिर घर/मंदिर पर जब भी कोई पूजन होती है, तो चरणामृत या पंचामृत दिया हैं। मगर हम में से ऐसे कई लोग इसकी महिमा और इसके बनने की प्रक्रिया को नहीं जानते होंगे। (more…)

  • Vetrilai पान के पत्ते के 15 आश्चर्यजनक स्वास्थ लाभ

    क्या आप जानते हैं कि पान खाने के भी बहुत फायदे हैं, बशर्ते यह तम्बाकू वाला न हो। पान खाना हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

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  • Image अलसी (जवस) एक चमत्कारी औषधि

    विविध नाम :- अलसी, मराठी् जवस.लेक्स सीड्स, लिन सिड्स वगैरा उसके नाम हैं। दोस्तो अलसी से सभी परिचित होंगे लेकिन उसके चमत्कारी फायदे से बहुत ही कम लोग जानते हैं।

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  • पीपल की कुछ अनसुनी बातें

    – यह 24 घंटे ऑक्सीजन देता है .
    – इसके पत्तों से जो दूध निकलता है उसे आँख में लगाने से आँख का दर्द ठीक हो जाता है .
    – पीपल की ताज़ी डंडी दातून के लिए बहुत अच्छी है .
    – पीपल के ताज़े पत्तों का रस नाक में टपकाने से नकसीर में आराम मिलता है।

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  • शयन विधान

    सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना।

    सोने की मुद्राऐं:
    उल्टा सोये भोगी, सीधा सोये योगी, दांऐं सोये रोगी, बाऐं सोये निरोगी।

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  • तुलसी के अद्भुत गुण।

    जब भी तुलसी में खूब फुल यानी मंजिरी लग जाए तो उन्हें पकने पर तोड़ लेना चाहिए ओर इन पकी हुई मंजिरियों को रख लें। इनमें से काले काले बीज अलग होंगे उसे एकत्र कर लें। यही सब्जा है। अगर आपके घर में नही है तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकान पर मिल जाएंगे।

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  • अपरिजिता: उपयोग एवं महत्त्व

    अपराजिता बहुत सामान्य सा पौधा है इसके आकर्षक फूलों के कारण इसे लान की सजावट के तौर पर भी लगाया जाता है. इसकी लताएँ होती हैं. ये इकहरे फूलों वाली बेल भी होती है और दुहरे फूलों वाली भी. फूल भी दो तरह के होते हैं -नीले और सफ़ेद आप लोग अपने घरों में सफ़ेद फूलों वाली अपराजिता ही लगाएं क्योंकि यही सांप के ज़हर की दुश्मन है.

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