Articles (लेख)

  • ॐ के उच्चारण का रहस्य

    ॐ को ओम लिखने की मजबूरी है अन्यथा तो यह ॐ ही है। अब आप ही सोचे इसे कैसे उच्चारित करें? ओम का यह चिन्ह ‘ॐ’ अद्भुत है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है। बहुत-सी आकाश गंगाएँ इसी तरह फैली हुई है। ब्रह्म का अर्थ होता है विस्तार, फैलाव और फैलना। ओंकार ध्वनि के १०० से भी अधिक अर्थ दिए गए हैं। यह अनादि और अनंत तथा निर्वाण की अवस्था का प्रतीक है।

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  • अपने भीतर की शक्ति को पहचानिए
  • अमरनाथ धाम से जुडी शिव पार्वती की गाथा

    एक बार देवी पार्वती ने देवों के देव महादेव से पूछा, ऐसा क्यों है कि आप अजर हैं, अमर हैं लेकिन मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरूप में आकर, फिर से बरसों तप के बाद आपको प्राप्त करना होता है । जब मुझे आपको पाना है तो मेरी तपस्या और इतनी कठिन परीक्षा क्यों? आपके कंठ में पडी़ नरमुंड माला और अमर होने के रहस्य क्या हैं?

    महादेव ने पहले तो देवी पार्वती के उन सवालों का जवाब देना उचित नहीं समझा, लेकिन पत्नीहठ के कारण कुछ गूढ़ रहस्य उन्हें बताने पडे़। शिव महापुराण में मृत्यु से लेकर अजर-अमर तक के कर्इ प्रसंंग हैं, जिनमें एक साधना से जुडी अमरकथा बडी रोचक है। जिसे भक्तजन अमरत्व की कथा के रूप में जानते हैं।

    हर वर्ष हिम के आलय (हिमालय) में अमरनाथ, कैलाश और मानसरोवर तीर्थस्थलों में लाखों श्रद्घालु पहुंचते हैं। सैकडों किमी की पैदल यात्रा करते हैं, क्यों? यह विश्वास यूं ही नहीं उपजा। शिव के प्रिय अधिकमास, अथवा आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण मास तक की पूर्णिमा के बीच अमरनाथ की यात्रा भक्तों को खुद से जुडे रहस्यों के कारण और प्रासंगिक लगती है

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    जय माँ। जय महाकाल।

  • अवचेतन मन और उसकी शक्ति – भाग १

    न्यूटन ने गज़ब की खोजें की, आइंस्टीन ने अपनी खोजो से इतिहास रच दिया, गैलीलियो और उनकी खोजो के बारे में कौन नहीं जनता है, कभी आपने सोचने की कोशिश की कौन था उनकी खोजो और अविष्कारो के पीछे, ऐसे आविष्कार जिन्होंने सारी दुनिया को चमत्कृत कर दिया और विश्व को एक नयी क्रांति से अवगत कराया। ये सारा खेल उनके अवचेतन मन का था, जी हां सुनने में आपको अजीब जरूर लगेगा, लेकिन यही वो कटु सत्य है जिसके दम पर वो इन उचाईयो को छूने में कामयाब हो सके। (more…)

  • अवचेतन मन और उसकी शक्ति – भाग २

    जैसा की पिछले ब्लॉग में हमने अवचेतन मन की शक्तियों के बारे में बात की थी उसी कड़ी में आइये अब आगे बढ़ते है और कुछ और उदाहरण देखते है अवचेतन मन की शक्तियों के – (more…)

  • Shri Vishnu Ji इस तथ्य से जानिए क्या धरती पर भगवान हैं?

    आइये आपको “धरती पर भगवान हैं प्रमाणिकता सिद्ध किये गये लोगो के अनुभव देखे व परखे

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  • कथा शनि देव की।

    शनि देव को आज के युग मे कौन नही जानता।अक्सर शनि का नाम सुनते ही आफत नजर आने लगती है,लोग सहमने लग जाते हैं, शनि के प्रकोप का खौफ खा जाते हैं। कुल मिलाकर शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है लेकिन असल में ऐसा है नहीं।

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  • Kundalini कुंडलिनी चक्र की असीमित शक्ति से क्या संभव है?

    सम्पूर्ण ब्रह्मांड से तारतम्य बनाकर हमारी ही आन्तरिक ऊर्जा को को संचालित करने का कार्य करते हैं … सप्त-चक्र।
    जब हमारे असंयमित व्यवहार से इन शक्ति केन्द्रों का संतुलन बिगड़ जाता है तो विभिन्न व्याधियों का सामना मनुष्य को करना पड़ता है चलिए आज हम यह जानते हैं की कौन से चक्र के असंतुलित होने का क्या परिणाम द्रष्टिगोचर होता हैं। (more…)

  • Sadhak कैसे बन जाते हैं हम स्वयं के दुश्मन

    आज कल देखा जा रहा है एक फैशन से चल गया है भगवान को बदलने का पूजा करने की विधि विधान को बदलने का ।। वैसे तो हमारे सनातन धर्म के तीन मुख्य देवी देव है (more…)

  • Image कैसे मृत्य के पश्चात शरीर जलाना है अर्थपूर्ण?

    हिंदू जलाते हैं शरीर को। क्योंकि जब तक शरीर जल न जाए, तब तक आत्मा शरीर के आसपास भटकती है। पुराने घर का मोह थोड़ा सा पकड़े रखता है। तुम्हारा पुराना घर भी गिर जाए तो

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  • कौन बनता है भूत? कैसे रहें उनसे सुरक्षित?

    जिसका कोई वर्तमान न हो, केवल अतीत ही हो वही भूत कहलाता है। अतीत में अटका आत्मा भूत बन जाता है। जीवन न अतीत है और न भविष्य वह सदा वर्तमान है। जो वर्तमान में रहता है वह मुक्ति की ओर कदम बढ़ाता है। (more…)

  • कौन हैं अघोरी: कैसी है उनकी रहस्मयी दुनिया – भाग २

    क्यों जिद्दी और गुस्सैल होते हैं अघोरी

    अघोरियों के बारे में मान्यता है कि वे बड़े ही जिद्दी होते हैं। अगर किसी से कुछ मांगेंगे, तो लेकर ही जाएंगे। क्रोधित हो जाएंगे तो अपना तांडव दिखाएंगे या भलाबुरा कहकर उसे शाप देकर चले जाएंगे। एक अघोरी बाबा की आंखें लाल सुर्ख होती हैं लेकिन अघोरी की आंखों में जितना क्रोध दिखाई देता हैं बातों में उतनी ही शीतलता होती है।

    अघोरी की वेशभूषा

    कफन के काले वस्त्रों में लिपटे अघोरी बाबा के गले में धातु की बनी नरमुंड की माला लटकी होती है। नरमुंड हो तो वे प्रतीक रूप में उसी तरह की माला पहनते हैं। हाथ में चिमटा, कमंडल, कान में कुंडल, कमर में कमरबंध और पूरे शरीर पर राख मलकर रहते हैं ये साधु। ये साधु अपने गले में काली ऊन का एक जनेऊ रखते हैं जिसेसिलेकहते हैं। गले में एक सींग की नादी रखते हैं। इन दोनों कोसींगी सेलीकहते हैं।

    अघोरपंथ तांत्रिकों के तीर्थस्थल

    अघोरपंथ के लोग चार स्थानों पर ही श्मशान साधना करते हैं। चार स्थानों के अलावा वे शक्तिपीठों, बगलामुखी, काली और भैरव के मुख् स्थानों के पास के श्मशान में साधना करते हैं। यदि आपको पता चले कि इन स्थानों को छोड़कर अन्य स्थानों पर भी अघोरी साधना करते हैं तो यह कहना होगा कि वे अन्य श्मशान में साधना नहीं करते बल्कि यात्रा प्रवास के दौरान वे वहां विश्राम करने रुकते होंगे या फिर वे ढोंगी होंगे।

    तीन प्रमुख स्थान :

    1. तारापीठ का श्मशान : कोलकाता से 180 किलोमीटर दूर स्थित तारापीठ धाम की खासियत यहां का महाश्मशान है। वीरभूम की तारापीठ (शक्तिपीठ) अघोर तांत्रिकों का तीर्थ है। यहां आपको हजारों की संख्या में अघोर तांत्रिक मिल जाएंगे। तंत्र साधना के लिए जानीमानी जगह है तारापीठ, जहां की आराधना पीठ के निकट स्थित श्मशान में हवन किए बगैर पूरी नहीं मानी जाती। कालीघाट को तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है, कालीघाट में होती हैं अघोर तांत्रिक सिद्धियां
    2. कामाख्या पीठ के श्मशान : कामाख्या पीठ भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो असम प्रदेश में है। कामाख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। प्राचीनकाल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्रसिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। कालिका पुराण तथा देवीपुराण मेंकामाख्या शक्तिपीठको सर्वोत्तम कहा गया है और यह भी तांत्रिकों का गढ़ है।
    3. रजरप्पा का श्मशान : रजरप्पा में छिन्नमस्ता देवी का स्थान है। रजरप्पा की छिन्नमस्ता को 52 शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है लेकिन जानकारों के अनुसार छिन्नमस्ता 10 महाविद्याओं में एक हैं। उनमें 5 तांत्रिक और 5 वैष्णवी हैं। तांत्रिक महाविद्याओं में कामरूप कामाख्या की षोडशी और तारापीठ की तारा के बाद इनका स्थान आता है।

    चक्रतीर्थ का श्मशान : मध्यप्रदेश के उज्जैन में चक्रतीर्थ नामक स्थान और गढ़कालिका का स्थान तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। उज्जैन में काल भैरव और विक्रांत भैरव भी तांत्रिकों का मुख् स्थान माना जाता है।

    सभी 52 शक्तिपीठ तो तांत्रिकों की सिद्धभूमि हैं ही इसके अलावा कालिका के सभी स्थान, बगलामुखी देवी के सभी स्थान और दस महाविद्या माता के सभी स्थान को तांत्रिकों का गढ़ माना गया है। कुछ कहते हैं कि त्र्यम्बकेश्वर भी तांत्रिकों का तीर्थ है।

    तांत्रिकों के देवीदेवताओं के नाम

    तंत्र की मुख्य 10 देवियां हैं जिन्हें 10 महाविद्या कहा जाता है

    1. काली, 2. तारा, 3. षोडशी, (त्रिपुरसुंदरी), 4. भुवनेश्वरी, 5. छिन्नमस्ता, 6. त्रिपुर भैरवी, 7. द्यूमावती, 8. बगलामुखी, 9. मातंगी और 10. कमला।

    भैरव : भगवान भैरव को शिव का अंश अवतार माना जाता है और ये तांत्रिकों के प्रमुख पूजनीय भगवान हैं। इन्हें शिव के 10 रुद्रावतारों में से एक माना गया है। भैरव के 8 रूप हैं

    1. असितांग भैरव, 2. चंड भैरव, 3. रूरू भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाल भैरव, 7. भीषण भैरव, 8. संहार भैरव।

    भय को भगाए काल भैरव

    10 रुद्रावतार हैं

    1. महाकाल, 2. तार, 3. बाल भुवनेश, 4. षोडश श्रीविद्येश, 5. भैरव, 6. छिन्नमस्तक, 7. धूमवान, 8. बगलामुख, 9. मातंग और 10. कमल।

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  • Charnamrit क्या अंतर है ‘पंचामृत’ और ‘चरणामृत’ में

    मंदिर में या फिर घर/मंदिर पर जब भी कोई पूजन होती है, तो चरणामृत या पंचामृत दिया हैं। मगर हम में से ऐसे कई लोग इसकी महिमा और इसके बनने की प्रक्रिया को नहीं जानते होंगे। (more…)

  • hindutva क्या अन्धविश्वास है तंत्र मंत्र?

    जैसे ही कोई व्यक्ति किसी तंत्रवेत्ता के सम्पर्क मे आता है तो साधारणतः अधिकतर व्यक्तियों की समझ या सोच होती है कि मैं तंत्र मंत्र के मार्ग पर प्रविष्ट हो गया हुं और मेरा तो अब एक अच्छे गुरु जी से भी संपर्क हो गया है और गुरु जी की कृपा भी मुझ पर है ही अतः अब तो सारी सिद्धियां मेरे बांए हाथ की मुट्ठी में होंगी, बहुत सारी लक्ष्मी की प्राप्ति होगी, मैं अपने शत्रुओं को चुटकी बजाते ही परास्त कर दुंगा मेरे सब शत्रु परास्त होंगे मैं उनको जैसा चाहूं वैसा दंड भी दे दुंगा। (more…)

  • Image क्या आप जानते है इस दोहे का रहस्य – तृण धर ओट कहत वैदेही, सुमिरि अवधपति परम सनेही।

    रामायण में एक घास के तिनके का भी रहस्य है, जो
    हर किसी को नहीं मालूम क्योंकि आज तक किसी ने
    हमारे ग्रंथो को समझने की कोशिश नहीं की,सिर्फ पढ़ा
    है, देखा है, और सुना है, आज आप के समक्ष ऐसा ही एक रहस्य बताने जा रहा हूँ, रावण ने जब माँ सीता जी का हरण करके लंका ले गया।

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  • क्या है आत्मसाक्षात्कार?

    प्रायः सबकी दृष्टि आत्मसाक्षात्कार पर रहती है कि यह कैसे हो,इसके लिये क्या करना चाहिए?
    सच यह है कि आत्मसाक्षात्कार हरेक मे हर वक्त उपलब्ध है जरूरत केवल नि:संकल्प होने की है। (more…)

  • Hanuman क्या है भक्ति?

    ” भक्ति “

    कोई भी इंसान गुस्सैल नहीं होता, कोई भी इंसान कष्ट में या आनंद में नहीं होता, कोई इंसान प्रेम में या भक्ति में नहीं होता, लेकिन वह खुद को इनमें से किसी में भी विकसित कर सकता है। (more…)

  • Meditation क्या है मानव जीवन और क्या है साधक जीवन में भेद?

    आज कल देखा जा रहा है सब भेद बकरी बने हुए है जो सामने वाला करता है वही करना स्वम् को भी अच्छा लगता उसका निंर्णय क्या होगा हमारे प्रति सही या गलत इसका विचार तक नही करते है बस लगे हुए है करने किसी भी तरह हो जाये किन्तु कभी सोचा है ऐसा करने से 99 प्रतिशत आपके विपरीत ही कार्य होता है क्योंकि हर मनुष्य के कर्म ऊर्जा विचार सब अलग है तो ये कैसे संभव है इस सोच से स्वम् को हटाना होगा तभी कुछ प्राप्त होना संभव है (more…)

  • Tantr क्या है सत्य आज के तांत्रिक शिविरों का

    आजकल एक चलन सा हो गया है तीन दिन मे, सात दिन मे दीक्षा का, आओ और तांत्रिक बन जाओ। कई तो इतने मास्टर है की दुसरो के शब्दो को कॉपी पोस्ट करके वाहवाही लूटते है। यह उस तरह का ही होता है जैसे अपना बच्चा तो है नही पडोसी के बच्चे को अपना बताना, (more…)

  • Lord Hanuman क्या है हनुमान के विवाह की गाथा

    हनुमान जी के बारे में माना जाता है की वो बाल ब्रह्मचारी है। पर भारत के कुछ हिस्सों खासकर तेलंगाना में हनुमान जी को विवाहित माना जाता है।  (more…)

  • goddess_kali_lord_shiva क्यों आये थे भगवान शिव महाकाली के पैरों के नीचे?

    भगवती दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक हैं महाकाली। जिनके काले और डरावने रूप की उत्पति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी। यह एक मात्र ऐसी शक्ति हैं जिन से स्वयं काल भी भय खाता है।

    दैत्य रक्तबिज ने कठोर तप के बल पर वर पाया था की अगर उसके खून की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी तो उस से अनेक दैत्य पैदा हो जाएंगे। उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग निर्दोष लोगों पर करना शुरू कर दिया।

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  • Saraswati क्यों किया था ब्रह्मा ने अपनी ही पुत्री से विवाह

    हिन्दू धर्म के दो ग्रंथों ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का अपनी ही बेटी सरस्वती से विवाह करने का प्रसंग है जिसके फलस्वरूप इस धरती के प्रथम मानव ‘मनु’ का जन्म हुआ। लेकिन ब्रह्मा ने अपनी ही पुत्री से विवाह जैसा निन्दनीय काम क्यों किया इसका जवाब जानने के लिए पढ़ते है पुराणों में वर्णित कथा। (more…)

  • क्यों चढ़ाते हैं हनुमान जी को सिंदूर का चोला?

    हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। सिंदूर का हिन्दू धर्म में पूजा पाठ में भी महत्तव है। कई देवी देवताओं को सिंदूर चढ़ाया जाता है। लेकिन गणेश जी, भैरू जी (भैरव जी) और हनुमान जी को तो सिंदूर का पूरा चोला चढाने की परम्परा है। हर परम्परा के पीछे कोई कारण, कहानी जरूर होती है। हनुमान जी को भी ऊपर से नीचे तक सिंदूर चढाने के पीछे एक कहानी है जिसका वर्णन तुलसीदास जी ने भी रामचरित मानस में किया है। (more…)

  • Jai Shri Ram क्यों दिया था राम ने लक्ष्मण को मृत्युदंड?

    रामायण में एक घटना का वर्णन आता है की श्री राम को न चाहते हुए भी जान से प्यारे अपने अनुज लक्ष्मण को मृत्युदंड देना पड़ता है। परंतु क्यों? आखिर क्यों भगवान राम को लक्ष्मण को मृत्युदंड देना पड़ा? (more…)

  • क्यों प्रिय है श्री कृष्ण को बांसुरी?

    आपने श्रीकृष्ण की बांसुरी बजाते हुए प्रतिमा जरूर देखी होगी. श्रीकृष्ण के द्वारा धारण किए गए प्रतीकों में बांसुरी हमेशा से सभी लोगों के लिए ज्ञिज्ञासा का केंद्र रही है.

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  • क्यों हारे थे हनुमान से शनि

    शनि के नाम से ही हर व्यक्ति डरने लगता है। शनि की दशा एक बार शुरू हो जाए तो साढ़ेसात साल बाद ही पीछा छोड़ती है। लेकिन हनुमान भक्तों को शनि से डरने की तनिक भी जरूरत नहीं। शनि ने हनुमान को भी डराना चाहा लेकिन मुंह की खानी पड़ी आइए जानें कैसे… (more…)

  • जन्म के हिंदू मास से जानिए कैसे हैं आप?

    जिस माह में जन्मे हैं आप उस के गुण हैं आपमें

    ग्रहों, नक्षत्रों, वारों, तिथियों आदि के आधार पर मनुष्य का भविष्य फल बनाया जाता है। इनमें मासों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। मासों की संख्या 12 है। मासों का प्रारंभ चैत्र मास से होता है। (more…)

  • Queen द्रौपदी की कुछ अनोखी बातें

    भविष्य पुराण में बताया गया है कि युधिष्ठिर जब जुआ में सबकुछ हार कर वन में जा रहे थे उस समय मैत्रेय ऋषि ने अपने दिव्य दृष्टि से इस बात को जाना था।

    मैत्रेय ने बताया पाण्डवों को बताया कि द्रौपदी ने पूर्व जन्म में ऐसे पुण्य किए हैं जिससे यह जहां भी रहेगी वहां अन्नपूर्णा की तरह इनका भंडार भरा रहेगा। इसलिए वन में रहते हुए आपको कभी भी भोजन और अन्न की चिंता नहीं करनी होगी।

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  • पाँच मुखी रुद्राक्ष के महत्त्व, लाभ और धारण मन्त्र

    पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे ज्यादा मिलने वाला रुद्राक्ष है, पंचमुखी रुद्राक्ष में भगवान शिव की सभी शक्तियां समाहित होती है। इस धरा के पंच तत्व और पांच पांडव इस रुद्राक्ष के देव माने गए हैं। इस रुद्राक्ष को धारण करने से वर्जित कार्यो द्वारा उत्प्पन्न पापो से मुक्ति दिलाता है। (more…)

  • maxresdefault भगवान भैरव के आठ रूप

    ॐ शिवगोरक्ष योगी आदेश

    ये है भगवान भैरव के 8 रूप, जानिए किसकी पूजा से मिलता है कौन सा फल। (more…)

  • शाबर मंत्र सिद्धि रहस्य

    शाबर मंत्र सिद्धि करने से पहले एक बार इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें

    शाबर मंत्र के विषय मे पता नही वो कौन सा महाज्ञानी रहा होगा जिसने ऐसा लिखा है कि मंत्र जैसा जिस भाषा मे लिखा है उसे वैसा ही पढ़े किसी भी प्रकार का मंत्र में संशोधन ना करे, शाबर मंत्र सिद्धि की आवश्यकता नही होती वे स्वयं सिद्ध है, शाबर दीक्षा नही लेनी होती वे सीधे किताबो से पढ़कर सिद्ध किये जा सकते है। (more…)

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