Articles (लेख)

  • How to cure low blood pressure naturally?

    Cardamom is a spice with an intense, slightly sweet flavor that some people compare to mint. Originated in India but is available worldwide today and used in both sweet and savory recipes.

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  • Line of Marriage & Attachment – Jay Mahakaal

    A definite line exists for a nice marriage. Marriage is a custom uniting a man with a woman as life partner.

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  • Magical benefits of chanting Ganesha Mantra.

    According to the Hindu Religion, Lord Ganesha is the God of knowledge, wisdom, intelligence, and prosperity. He is considered the Head of all Gods and is worshiped first.

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  • Some amazing and interesting facts about Hinduism

    Few things a Hindu can do while using English language: – written by Francois Gautier (check his Facebook page. He knows more Hinduism than many of us)

    1. Please stop using the term “God fearing” – Hindus never ever fear God. For us, God is everywhere and we are also integral part of God. God is not a separate entity to fear.

    2. Please do not use the meaningless term “RIP” when someone dies. Use “Om Shanti”, “Sadgati” or “I wish this atma attains moksha/sadgati /uttama lokas”. Hinduism neither has the concept of “soul” nor its “resting”. The terms “Atma” and “Jeeva” are, in a way, antonyms for the word “soul”.(to be understood in detail)

    3. Please don’t use the word “Mythology” for our historic epics (Itihas) Ramayana and Mahabharata. Rama and Krishna are historical heroes, not just mythical characters.

    3. Please don’t be apologetic about idol worship and say “Oh, that’s just symbolic”. All religions have idolatry in kinds or forms – cross, words, letters (calligraphy) or direction. Also let’s stop using the words the words ‘idols’, ‘statues’ or ‘images’ when we refer to the sculptures of our Gods. Use the terms ‘Moorthi’ or ‘Vigraha’. If words like Karma, Yoga, Guru and Mantra can be in the mainstream, why not Moorthi or Vigraha?

    4. Please don’t refer to Ganesh and Hanuman as “Elephant god” and “Monkey god” respectively. You can simply write Shree Ganesh and Shree Hanuman.

    5. Please don’t refer to our temples as prayer halls. Temples are “devalaya” (abode of god) and not “prathanalaya” (Prayer halls).

    6. Please don’t wish your children “black birthday” by allowing them to blow off the candles that are kept on top of the birthday cake. Don’t throw spit on the divine fire (Agni Deva). Instead, ask them to pray: “Oh divine fire, lead me from darkness to light” (Thamasoma Jyotirgamaya) by lighting a lamp. These are all strong images that go deep into the psyche.

    7. Please avoid using the words “spirituality” and “materialistic”. For a Hindu, everything is divine. The words spirituality and materialism came to India through evangelists and Europeans who had a concept of Church vs State. Or Science vs Religion. On the contrary, in India, Sages were scientists and the foundation stone of Sanatan Dharma was Science.

    9. Please don’t use the word “Sin” instead of “Paapa”. We only have Dharma (duty, righteousness, responsibility and privilege) and Adharma (when dharma is not followed). Dharma has nothing to do with social or religious morality. ‘Papa’ derives from Adharma.

    10. Please don’t use loose translation like meditation for “dhyana” and ‘breathing exercise’ for “Pranayama”. It conveys wrong meanings. Use the original words.

    Remember, the world respects only those who respect themselves!
    Please circulate, share so that people can understand about their Hindu Dharma….

  • Special offerings for Devi Durga during these 9 days of Navratri.

    According to the Puranas, the goddess Durga becomes happy immediately after Offerings.

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  • What happens after death?

    Death is actually a very interesting process! Disconnection of the earth sole chakras
    Approximately 4-5 hours before death, the earth sole chakras situated below the feet gets detached symbolizing disconnection from the earth plane! (more…)

  • Why do people offer mustard or sesame oil to Lord Shani?

    Lord Shani refers to planet Saturn and is also one of the auspicious Navagraha as per the Hindu Astrology. He is Lord Sun’s son.

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  • Why is Lord Hanuman worshipped on Tuesday’s?

    Lord Hanuman, also known as Bajrang Bali, is the epitome of selfless service and devotion. He was born on the full moon day (Purnima) of the month Chaitra on Tuesday.

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  • Why we tie Mauli or Kalava in hand?

    Let us first understand, what does Mauli or Kalava mean? The literal meaning of Mauli in Sanskrit is ‘crown’, which means above all. Well, Mauli is a sanctified thread which is also known as ‘Kalava’. This thread is dyed in red and yellow combination.

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  • ॐ के उच्चारण का रहस्य

    ॐ को ओम लिखने की मजबूरी है अन्यथा तो यह ॐ ही है। अब आप ही सोचे इसे कैसे उच्चारित करें? ओम का यह चिन्ह ‘ॐ’ अद्भुत है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है। बहुत-सी आकाश गंगाएँ इसी तरह फैली हुई है। ब्रह्म का अर्थ होता है विस्तार, फैलाव और फैलना। ओंकार ध्वनि के १०० से भी अधिक अर्थ दिए गए हैं। यह अनादि और अनंत तथा निर्वाण की अवस्था का प्रतीक है।

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  • अपने भीतर की शक्ति को पहचानिए
  • अमरनाथ धाम से जुडी शिव पार्वती की गाथा

    एक बार देवी पार्वती ने देवों के देव महादेव से पूछा, ऐसा क्यों है कि आप अजर हैं, अमर हैं लेकिन मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरूप में आकर, फिर से बरसों तप के बाद आपको प्राप्त करना होता है । जब मुझे आपको पाना है तो मेरी तपस्या और इतनी कठिन परीक्षा क्यों? आपके कंठ में पडी़ नरमुंड माला और अमर होने के रहस्य क्या हैं?

    महादेव ने पहले तो देवी पार्वती के उन सवालों का जवाब देना उचित नहीं समझा, लेकिन पत्नीहठ के कारण कुछ गूढ़ रहस्य उन्हें बताने पडे़। शिव महापुराण में मृत्यु से लेकर अजर-अमर तक के कर्इ प्रसंंग हैं, जिनमें एक साधना से जुडी अमरकथा बडी रोचक है। जिसे भक्तजन अमरत्व की कथा के रूप में जानते हैं।

    हर वर्ष हिम के आलय (हिमालय) में अमरनाथ, कैलाश और मानसरोवर तीर्थस्थलों में लाखों श्रद्घालु पहुंचते हैं। सैकडों किमी की पैदल यात्रा करते हैं, क्यों? यह विश्वास यूं ही नहीं उपजा। शिव के प्रिय अधिकमास, अथवा आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण मास तक की पूर्णिमा के बीच अमरनाथ की यात्रा भक्तों को खुद से जुडे रहस्यों के कारण और प्रासंगिक लगती है

    यदि आपके पास वेद-पुराण, कुंडली से सम्बंधित सवाल हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं, हमारा ईमेल id है @jaymahakaal01@gmail.com

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    जय माँ। जय महाकाल।

  • अवचेतन मन और उसकी शक्ति – भाग १

    न्यूटन ने गज़ब की खोजें की, आइंस्टीन ने अपनी खोजो से इतिहास रच दिया, गैलीलियो और उनकी खोजो के बारे में कौन नहीं जनता है, कभी आपने सोचने की कोशिश की कौन था उनकी खोजो और अविष्कारो के पीछे, ऐसे आविष्कार जिन्होंने सारी दुनिया को चमत्कृत कर दिया और विश्व को एक नयी क्रांति से अवगत कराया। ये सारा खेल उनके अवचेतन मन का था, जी हां सुनने में आपको अजीब जरूर लगेगा, लेकिन यही वो कटु सत्य है जिसके दम पर वो इन उचाईयो को छूने में कामयाब हो सके। (more…)

  • अवचेतन मन और उसकी शक्ति – भाग २

    जैसा की पिछले ब्लॉग में हमने अवचेतन मन की शक्तियों के बारे में बात की थी उसी कड़ी में आइये अब आगे बढ़ते है और कुछ और उदाहरण देखते है अवचेतन मन की शक्तियों के – (more…)

  • Shri Vishnu Ji इस तथ्य से जानिए क्या धरती पर भगवान हैं?

    आइये आपको “धरती पर भगवान हैं प्रमाणिकता सिद्ध किये गये लोगो के अनुभव देखे व परखे

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  • एक दिलचस्प कहानी ‘वसीयत’ और ‘नसीयत’ की

    ध्यान से पढ़ना बहुत कुछ सीखने को मिलेगा

       “वसीयत और नसीहत”

    एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, “बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना। (more…)

  • कथा शनि देव की।

    शनि देव को आज के युग मे कौन नही जानता।अक्सर शनि का नाम सुनते ही आफत नजर आने लगती है,लोग सहमने लग जाते हैं, शनि के प्रकोप का खौफ खा जाते हैं। कुल मिलाकर शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है लेकिन असल में ऐसा है नहीं।

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  • Kundalini कुंडलिनी चक्र की असीमित शक्ति से क्या संभव है?

    सम्पूर्ण ब्रह्मांड से तारतम्य बनाकर हमारी ही आन्तरिक ऊर्जा को को संचालित करने का कार्य करते हैं … सप्त-चक्र।
    जब हमारे असंयमित व्यवहार से इन शक्ति केन्द्रों का संतुलन बिगड़ जाता है तो विभिन्न व्याधियों का सामना मनुष्य को करना पड़ता है चलिए आज हम यह जानते हैं की कौन से चक्र के असंतुलित होने का क्या परिणाम द्रष्टिगोचर होता हैं। (more…)

  • Sadhak कैसे बन जाते हैं हम स्वयं के दुश्मन

    आज कल देखा जा रहा है एक फैशन से चल गया है भगवान को बदलने का पूजा करने की विधि विधान को बदलने का ।। वैसे तो हमारे सनातन धर्म के तीन मुख्य देवी देव है (more…)

  • Image कैसे मृत्य के पश्चात शरीर जलाना है अर्थपूर्ण?

    हिंदू जलाते हैं शरीर को। क्योंकि जब तक शरीर जल न जाए, तब तक आत्मा शरीर के आसपास भटकती है। पुराने घर का मोह थोड़ा सा पकड़े रखता है। तुम्हारा पुराना घर भी गिर जाए तो

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  • कैसे हुई 51 शक्तिपीठों की स्थापना?

    ब्रह्मा के पुत्र प्रजापति दक्ष की पुत्री सती से भगवान शिव का विवाह हुआ। कुछ समय बाद दक्ष को पूरे ब्रह्माण्ड का अधिपति बना दिया गया। इससे दक्ष में अभिमान आ गया। वह अपने आपको सर्वश्रेष्ठ समझने लगे। एक यज्ञ में भगवान शिव द्वारा खुद को प्रणाम न करने पर दक्ष ने उन्हें अनेक अपशब्द कहे। दक्ष ने शिव को शाप दिया कि उन्हें देव यज्ञ में उनका हिस्सा नहीं मिलेगा।

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  • कौन बनता है भूत? कैसे रहें उनसे सुरक्षित?

    जिसका कोई वर्तमान न हो, केवल अतीत ही हो वही भूत कहलाता है। अतीत में अटका आत्मा भूत बन जाता है। जीवन न अतीत है और न भविष्य वह सदा वर्तमान है। जो वर्तमान में रहता है वह मुक्ति की ओर कदम बढ़ाता है। (more…)

  • कौन हैं अघोरी: कैसी है उनकी रहस्मयी दुनिया – भाग २

    क्यों जिद्दी और गुस्सैल होते हैं अघोरी

    अघोरियों के बारे में मान्यता है कि वे बड़े ही जिद्दी होते हैं। अगर किसी से कुछ मांगेंगे, तो लेकर ही जाएंगे। क्रोधित हो जाएंगे तो अपना तांडव दिखाएंगे या भलाबुरा कहकर उसे शाप देकर चले जाएंगे। एक अघोरी बाबा की आंखें लाल सुर्ख होती हैं लेकिन अघोरी की आंखों में जितना क्रोध दिखाई देता हैं बातों में उतनी ही शीतलता होती है।

    अघोरी की वेशभूषा

    कफन के काले वस्त्रों में लिपटे अघोरी बाबा के गले में धातु की बनी नरमुंड की माला लटकी होती है। नरमुंड हो तो वे प्रतीक रूप में उसी तरह की माला पहनते हैं। हाथ में चिमटा, कमंडल, कान में कुंडल, कमर में कमरबंध और पूरे शरीर पर राख मलकर रहते हैं ये साधु। ये साधु अपने गले में काली ऊन का एक जनेऊ रखते हैं जिसेसिलेकहते हैं। गले में एक सींग की नादी रखते हैं। इन दोनों कोसींगी सेलीकहते हैं।

    अघोरपंथ तांत्रिकों के तीर्थस्थल

    अघोरपंथ के लोग चार स्थानों पर ही श्मशान साधना करते हैं। चार स्थानों के अलावा वे शक्तिपीठों, बगलामुखी, काली और भैरव के मुख् स्थानों के पास के श्मशान में साधना करते हैं। यदि आपको पता चले कि इन स्थानों को छोड़कर अन्य स्थानों पर भी अघोरी साधना करते हैं तो यह कहना होगा कि वे अन्य श्मशान में साधना नहीं करते बल्कि यात्रा प्रवास के दौरान वे वहां विश्राम करने रुकते होंगे या फिर वे ढोंगी होंगे।

    तीन प्रमुख स्थान :

    1. तारापीठ का श्मशान : कोलकाता से 180 किलोमीटर दूर स्थित तारापीठ धाम की खासियत यहां का महाश्मशान है। वीरभूम की तारापीठ (शक्तिपीठ) अघोर तांत्रिकों का तीर्थ है। यहां आपको हजारों की संख्या में अघोर तांत्रिक मिल जाएंगे। तंत्र साधना के लिए जानीमानी जगह है तारापीठ, जहां की आराधना पीठ के निकट स्थित श्मशान में हवन किए बगैर पूरी नहीं मानी जाती। कालीघाट को तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है, कालीघाट में होती हैं अघोर तांत्रिक सिद्धियां
    2. कामाख्या पीठ के श्मशान : कामाख्या पीठ भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो असम प्रदेश में है। कामाख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। प्राचीनकाल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्रसिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। कालिका पुराण तथा देवीपुराण मेंकामाख्या शक्तिपीठको सर्वोत्तम कहा गया है और यह भी तांत्रिकों का गढ़ है।
    3. रजरप्पा का श्मशान : रजरप्पा में छिन्नमस्ता देवी का स्थान है। रजरप्पा की छिन्नमस्ता को 52 शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है लेकिन जानकारों के अनुसार छिन्नमस्ता 10 महाविद्याओं में एक हैं। उनमें 5 तांत्रिक और 5 वैष्णवी हैं। तांत्रिक महाविद्याओं में कामरूप कामाख्या की षोडशी और तारापीठ की तारा के बाद इनका स्थान आता है।

    चक्रतीर्थ का श्मशान : मध्यप्रदेश के उज्जैन में चक्रतीर्थ नामक स्थान और गढ़कालिका का स्थान तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। उज्जैन में काल भैरव और विक्रांत भैरव भी तांत्रिकों का मुख् स्थान माना जाता है।

    सभी 52 शक्तिपीठ तो तांत्रिकों की सिद्धभूमि हैं ही इसके अलावा कालिका के सभी स्थान, बगलामुखी देवी के सभी स्थान और दस महाविद्या माता के सभी स्थान को तांत्रिकों का गढ़ माना गया है। कुछ कहते हैं कि त्र्यम्बकेश्वर भी तांत्रिकों का तीर्थ है।

    तांत्रिकों के देवीदेवताओं के नाम

    तंत्र की मुख्य 10 देवियां हैं जिन्हें 10 महाविद्या कहा जाता है

    1. काली, 2. तारा, 3. षोडशी, (त्रिपुरसुंदरी), 4. भुवनेश्वरी, 5. छिन्नमस्ता, 6. त्रिपुर भैरवी, 7. द्यूमावती, 8. बगलामुखी, 9. मातंगी और 10. कमला।

    भैरव : भगवान भैरव को शिव का अंश अवतार माना जाता है और ये तांत्रिकों के प्रमुख पूजनीय भगवान हैं। इन्हें शिव के 10 रुद्रावतारों में से एक माना गया है। भैरव के 8 रूप हैं

    1. असितांग भैरव, 2. चंड भैरव, 3. रूरू भैरव, 4. क्रोध भैरव, 5. उन्मत्त भैरव, 6. कपाल भैरव, 7. भीषण भैरव, 8. संहार भैरव।

    भय को भगाए काल भैरव

    10 रुद्रावतार हैं

    1. महाकाल, 2. तार, 3. बाल भुवनेश, 4. षोडश श्रीविद्येश, 5. भैरव, 6. छिन्नमस्तक, 7. धूमवान, 8. बगलामुख, 9. मातंग और 10. कमल।

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  • कौन है भगवान शिव? – जय महाकाल

    शिव कौन हैं? क्या वे भगवान हैं? या वे एक मिथक हैं? या फिर शिव का एक गहरा अर्थ है, जो केवल उन्हीं के लिए उपलब्ध है जो सत्य के खोजी हैं?

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  • Charnamrit क्या अंतर है ‘पंचामृत’ और ‘चरणामृत’ में

    मंदिर में या फिर घर/मंदिर पर जब भी कोई पूजन होती है, तो चरणामृत या पंचामृत दिया हैं। मगर हम में से ऐसे कई लोग इसकी महिमा और इसके बनने की प्रक्रिया को नहीं जानते होंगे। (more…)

  • hindutva क्या अन्धविश्वास है तंत्र मंत्र?

    जैसे ही कोई व्यक्ति किसी तंत्रवेत्ता के सम्पर्क मे आता है तो साधारणतः अधिकतर व्यक्तियों की समझ या सोच होती है कि मैं तंत्र मंत्र के मार्ग पर प्रविष्ट हो गया हुं और मेरा तो अब एक अच्छे गुरु जी से भी संपर्क हो गया है और गुरु जी की कृपा भी मुझ पर है ही अतः अब तो सारी सिद्धियां मेरे बांए हाथ की मुट्ठी में होंगी, बहुत सारी लक्ष्मी की प्राप्ति होगी, मैं अपने शत्रुओं को चुटकी बजाते ही परास्त कर दुंगा मेरे सब शत्रु परास्त होंगे मैं उनको जैसा चाहूं वैसा दंड भी दे दुंगा। (more…)

  • Image क्या आप जानते है इस दोहे का रहस्य – तृण धर ओट कहत वैदेही, सुमिरि अवधपति परम सनेही।

    रामायण में एक घास के तिनके का भी रहस्य है, जो
    हर किसी को नहीं मालूम क्योंकि आज तक किसी ने
    हमारे ग्रंथो को समझने की कोशिश नहीं की,सिर्फ पढ़ा
    है, देखा है, और सुना है, आज आप के समक्ष ऐसा ही एक रहस्य बताने जा रहा हूँ, रावण ने जब माँ सीता जी का हरण करके लंका ले गया।

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  • क्या है अध्यात्म??

    यदि आप आध्यात्मिक हैं तो एक बात समझने की जरूरत है कि आध्यत्म एक ऊर्जा है उसकी ऊर्जा को जब तक आप अपने अंदर नही समेट लेते तक तक आपका अध्यात्म सम्पूर्ण नही हो सकता। आध्यत्म में सबसे बडी बाधा ही आपका क्रोध आपकी दुर्भावना और आपका मन भटकाने वाली भावना है। (more…)

  • क्या है आत्मसाक्षात्कार?

    प्रायः सबकी दृष्टि आत्मसाक्षात्कार पर रहती है कि यह कैसे हो,इसके लिये क्या करना चाहिए?
    सच यह है कि आत्मसाक्षात्कार हरेक मे हर वक्त उपलब्ध है जरूरत केवल नि:संकल्प होने की है। (more…)

  • क्या है गुड़ी पड़वा पूजन समय?

    गुड़ी पड़वा का पर्व महाराष्‍ट्र, आंध्र प्रदेश और गोवा के अलावा देश के कई दक्षिण भारतीय राज्‍यों में हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाता है। यह त्‍योहार चैत्र मास के शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले नए साल की शुरुआत को ही मनाने की परंपरा है। गुड़ी का अर्थ होता है ध्‍वज और पड़वा का अर्थ होता है प्रतिपदा।

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  • क्या है चंद्र रेखा?

    प्रेम, कवित्व, कला, रहस्य; रेखा चंद्र की, यात्रा में
    प्राप्ति अप्राप्ति स्पष्ट बताती शीतल, शांति मात्रा में ।

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  • क्या है दरवाज़े पर नींबू लटकाने के पीछे वैज्ञानिक तथ्य?

    लोग नजर से बचने के लिए बहुत सारे तरीको को अपनाते हैं। अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने घरों अौर दुकानों पर नींबू मिर्च टांगते हैं। ऐसा अपने घर अौर व्यापार को बुरी नजर से बचाने के लिए किया जाता है। इस प्रकार नींबू मिर्च लटकाने के पीछे तंत्र-मंत्र अौर मनोविज्ञान से संबंधित कारण भी होते हैं।

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  • क्या हैं ध्यान और उसकी विधियाँ

    ध्यान की विधियाँ कौन-कौन सी हैं? ध्यान की अनेकानेक एवं अनंत विधियाँ संसार में प्रचलित हैं. साधकों की सुविधा के लिए विभिन्न शास्त्रों व ग्रंथों से प्रमाण लेकर ध्यान की विधियाँ बताते हैं जिनका अभ्यास करके साधक शीघ्रातिशीघ्र ईश्वर साक्षात्कार को प्राप्त कर सकता है. (more…)

  • क्या है पंच विकार, कैसे मुक्ति मिलेगी उन विकारो से

    श्री बाबा हनुमानजी के स्वरूप, चरित्र, आचरण की महिमा ऐसी है कि उनका मात्र नाम ही मनोबल और आत्मविश्वास से भर देता है। रुद्र अवतार होने से हनुमान का स्मरण दु:खों का अंत करने वाला भी माना गया है। (more…)

  • क्या है फाल्गुन मास का धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व?

    फाल्गुन या फागुन का महीना हिन्दू पंचांग का अंतिम महीना है. इस महीने की पूर्णिमा को फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण इस महीने का नाम फाल्गुन है. इस महीने से धीरे धीरे गरमी की शुरुआत होती है , और सर्दी कम होने लगती है.

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  • Hanuman क्या है भक्ति?

    ” भक्ति “

    कोई भी इंसान गुस्सैल नहीं होता, कोई भी इंसान कष्ट में या आनंद में नहीं होता, कोई इंसान प्रेम में या भक्ति में नहीं होता, लेकिन वह खुद को इनमें से किसी में भी विकसित कर सकता है। (more…)

  • क्या है मंदिर में घंटी बजाने के पीछे का वैज्ञानिक तथ्य?

    कहते हैं, पूजा करते वक्त घंटी जरूर बजानी चाहिए. ऐसा मानना है कि इससे ईश्वर जागते हैं और आपकी प्रार्थना सुनते हैं. लेकिन हम आपको यहां बता रहे हैं कि घंटी बजाने का सिर्फ भगवान से ही कनेक्शन नहीं है, बल्क‍ि इसका साइंटिफिक असर भी होता है.

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  • Meditation क्या है मानव जीवन और क्या है साधक जीवन में भेद?

    आज कल देखा जा रहा है सब भेद बकरी बने हुए है जो सामने वाला करता है वही करना स्वम् को भी अच्छा लगता उसका निंर्णय क्या होगा हमारे प्रति सही या गलत इसका विचार तक नही करते है बस लगे हुए है करने किसी भी तरह हो जाये किन्तु कभी सोचा है ऐसा करने से 99 प्रतिशत आपके विपरीत ही कार्य होता है क्योंकि हर मनुष्य के कर्म ऊर्जा विचार सब अलग है तो ये कैसे संभव है इस सोच से स्वम् को हटाना होगा तभी कुछ प्राप्त होना संभव है (more…)

  • Tantr क्या है सत्य आज के तांत्रिक शिविरों का

    आजकल एक चलन सा हो गया है तीन दिन मे, सात दिन मे दीक्षा का, आओ और तांत्रिक बन जाओ। कई तो इतने मास्टर है की दुसरो के शब्दो को कॉपी पोस्ट करके वाहवाही लूटते है। यह उस तरह का ही होता है जैसे अपना बच्चा तो है नही पडोसी के बच्चे को अपना बताना, (more…)

  • Lord Hanuman क्या है हनुमान के विवाह की गाथा

    हनुमान जी के बारे में माना जाता है की वो बाल ब्रह्मचारी है। पर भारत के कुछ हिस्सों खासकर तेलंगाना में हनुमान जी को विवाहित माना जाता है।  (more…)

  • goddess_kali_lord_shiva क्यों आये थे भगवान शिव महाकाली के पैरों के नीचे?

    भगवती दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक हैं महाकाली। जिनके काले और डरावने रूप की उत्पति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी। यह एक मात्र ऐसी शक्ति हैं जिन से स्वयं काल भी भय खाता है।

    दैत्य रक्तबिज ने कठोर तप के बल पर वर पाया था की अगर उसके खून की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी तो उस से अनेक दैत्य पैदा हो जाएंगे। उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग निर्दोष लोगों पर करना शुरू कर दिया।

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  • क्यों कहते हैं केदारनाथ को “जागृत महादेव”?

    एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता।

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  • Saraswati क्यों किया था ब्रह्मा ने अपनी ही पुत्री से विवाह

    हिन्दू धर्म के दो ग्रंथों ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का अपनी ही बेटी सरस्वती से विवाह करने का प्रसंग है जिसके फलस्वरूप इस धरती के प्रथम मानव ‘मनु’ का जन्म हुआ। लेकिन ब्रह्मा ने अपनी ही पुत्री से विवाह जैसा निन्दनीय काम क्यों किया इसका जवाब जानने के लिए पढ़ते है पुराणों में वर्णित कथा। (more…)

  • क्यों खाया था पांडवों ने अपने मृत पिता के शरीर का मांस?

    पाण्डु के पांच पुत्र युधिष्ठर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव थे।  इनमे से युधिष्ठर, भीम और अर्जुन की माता कुंती तथा नकुल और सहदेव की माता माद्री थी। पाण्डु इन पाँचों पुत्रों के पिता तो थे पर इनका जनम पाण्डु के वीर्य तथा सम्भोग से नहीं हुआ था क्योंकि पाण्डु को श्राप था की जैसे ही वो सम्भोग करेगा उसकी मृत्यु हो जाएगी। इसलिए पाण्डु के आग्रह पर यह पुत्र कुंती और माद्री ने भगवान का आहवान करके प्राप्त किये थे। (more…)

  • क्यों चढ़ाते हैं हनुमान जी को सिंदूर का चोला?

    हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। सिंदूर का हिन्दू धर्म में पूजा पाठ में भी महत्तव है। कई देवी देवताओं को सिंदूर चढ़ाया जाता है। लेकिन गणेश जी, भैरू जी (भैरव जी) और हनुमान जी को तो सिंदूर का पूरा चोला चढाने की परम्परा है। हर परम्परा के पीछे कोई कारण, कहानी जरूर होती है। हनुमान जी को भी ऊपर से नीचे तक सिंदूर चढाने के पीछे एक कहानी है जिसका वर्णन तुलसीदास जी ने भी रामचरित मानस में किया है। (more…)

  • Jai Shri Ram क्यों दिया था राम ने लक्ष्मण को मृत्युदंड?

    रामायण में एक घटना का वर्णन आता है की श्री राम को न चाहते हुए भी जान से प्यारे अपने अनुज लक्ष्मण को मृत्युदंड देना पड़ता है। परंतु क्यों? आखिर क्यों भगवान राम को लक्ष्मण को मृत्युदंड देना पड़ा? (more…)

  • क्यों पिया था श्री कृष्ण ने राधा के पैरों का चरणामृत

    चरणामृत से सम्बन्धित एक पौराणिक गाथा काफी प्रसिद्ध है जो हमें श्रीकृष्ण एवं राधाजी के अटूट प्रेम की याद दिलाती है। कहते हैं कि एक बार नंदलाल काफी बीमार पड़ गए। कोई दवा या जड़ी-बूटी उन पर बेअसर साबित हो रही थी। तभी श्रीकृष्ण ने स्वयं ही गोपियों से एक ऐसा उपाय करने को कहा जिसे सुन गोपियां दुविधा में पड़ गईं। (more…)

  • क्यों प्रिय है श्री कृष्ण को बांसुरी?

    आपने श्रीकृष्ण की बांसुरी बजाते हुए प्रतिमा जरूर देखी होगी. श्रीकृष्ण के द्वारा धारण किए गए प्रतीकों में बांसुरी हमेशा से सभी लोगों के लिए ज्ञिज्ञासा का केंद्र रही है.

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  • क्यों मानते हैं गणगोर का पर्व?

    गणगौर का त्यौहार मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाने वाला त्योहार है. गणगौर का अर्थ है गण माने तो शिव एवं गौर यानी गौरी मां. इस दिन भोले नाथ और गौरा की पूजा की जाती है.

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  • क्यो रविवार को तुलसी को स्पर्श एवं पूजन करना निषेद होता है?

    आपने अपने घर के बड़ो से सुन रखा होगा की तुलसी के पौधे को ना तो रविवार के दिन पानी से सींचा जाता है और ना ही उसके पत्ते तोड़े जाते है| आइए जानते हैं कि ऐसा ना करने के पीछे का कारण क्या है?

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  • क्यों लिया था देवी माँ ने भ्रामरी का अवतार??

    देवताओं की सहायता के लिए देवी ने अनेक अवतार लिए। भ्रामरी देवी का अवतार लेकर देवी ने अरुण नामक दैत्य से देवताओं की रक्षा की। पूर्व समय की बात है। अरुण नामक दैत्य ने कठोर नियमों का पालन कर भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव प्रकट हुए और अरुण से वर मांगने को कहा। अरुण ने वर मांगा कि कोई युद्ध में मुझे नहीं मार सके न किसी अस्त्र-शस्त्र से मेरी मृत्यु हो, स्त्री-पुरुष के लिए मैं अवध्य रहूं और न ही दो व चार पैर वाला प्राणी मेरा वध कर सके। साथ ही मैं देवताओं पर विजय प्राप्त कर सकूं। (more…)

  • क्यों लिया था देवी माँ ने शाकंभरी का अवतार??

    कथा यूँ प्रारंभ होती… दानवों के उत्पात से त्रस्त भक्तों ने जब कई वर्षों तक सूखा एवं अकाल से ग्रस्त होकर देवी से प्रार्थना की तब देवी ऐसे अवतार में प्रकट हुई, जिनकी हजारों आखें थी। अपने भक्तों को इस हाल में देखकर देवी की इन हजारों आंखों से नौ दिनों तक लगातार आंसुओं की बारिश हुई, जिससे पूरी पृथ्वी पर हरियाली छा गई तथा जीवन रस से परिपूर्ण हो गया। (more…)

  • क्यों वर्जित है तुलसी, भगवान गणेश के पूजन में?

    भगवान गणपति के प्राकट्य उनकी लीलाओं तथा उनके मनोरम विग्रह के विभिन्न रूपों का वर्णन पुराणों और शास्त्रों में प्राप्त होता है। हाथी जैसा सिर और बड़ा-सा पेट गणेश जी की पहचान है। गणेशजी का नाम हिन्दू शास्त्रो के अनुसार किसी भी कार्य के लिए पहले पूज्य है। (more…)

  • क्यों वर्जित है शनिवार को खरीदना लोहा?

    शनिदेव के अशुभ प्रभावों की शांति या साढ़े साती या ढैय्या से बचाव हेतु लोहा धारण किया जाता है किन्तु यह लौह मुद्रिका सामान्य लोहे की नहीं बनाई जाती।

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  • क्यों हारे थे हनुमान से शनि

    शनि के नाम से ही हर व्यक्ति डरने लगता है। शनि की दशा एक बार शुरू हो जाए तो साढ़ेसात साल बाद ही पीछा छोड़ती है। लेकिन हनुमान भक्तों को शनि से डरने की तनिक भी जरूरत नहीं। शनि ने हनुमान को भी डराना चाहा लेकिन मुंह की खानी पड़ी आइए जानें कैसे… (more…)

  • गृह शांति के कुछ अचूक उपाय।

    दान, पूजा, ध्यान करें; जो ग्रह हो , उसकी विधि से
    संतुलित हो ग्रह-प्रभाव; तृप्त होये सब निधि से ।
    ग्रह-विशेष के दिन, विशेष जिस में अधिक प्रभावित करता;

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  • चैत्र नवरात्र के यह 9 दिन भूलकर भी नही खाएँ यह चीजें।

    कल से चैत्र नवरात्र का प्रारंभ हुआ है कई लोग नौ दिनों तक उपवास रखते हैं तो वहीं कुछ लोग नवरात्र के पहले और आखिरी दिन ही उपवास रखते हैं। उपवास के दिनों में वैसे तो आमतौर पर फलाहार या साबूदाना जैसी चीजें ही खाई जाती हैं, लेकिन इन नौ दिनों में लोग तला-भुना व्रत का आहार भी खूब लेते हैं।

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  • जन्म के हिंदू मास से जानिए कैसे हैं आप?

    जिस माह में जन्मे हैं आप उस के गुण हैं आपमें

    ग्रहों, नक्षत्रों, वारों, तिथियों आदि के आधार पर मनुष्य का भविष्य फल बनाया जाता है। इनमें मासों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। मासों की संख्या 12 है। मासों का प्रारंभ चैत्र मास से होता है। (more…)

  • जानिए कब है गुप्त नवरात्री एवं उसके महत्व

    माघ गुप्त नवरात्र 18 जनवरी 2018 से लेकर 26 जनवरी 2018 तक रहेगी।

    हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है। (more…)

  • जानिये महिषासुर वध में क्या था भगवान गणेश का योगदान

    एक बार माता पार्वती की एक छोटी सी गलती से रुष्ट होकर भगवान शंकर ने उन्हें प्रायश्चित रूप में ऋषि कात्यायन के यहाँ जन्म लेने का आदेश दे दिया, उसी समय महिषासुर ने भगवान् ब्रम्हा से ये वरदान प्राप्त कर लिया की वो किसी भी नर से हार नहीं सकता, उसके बाद (more…)

  • जानें, किसी भी शुभ कार्य के पूर्व क्यों खिलाते हैं दही-शक्कर?

    अक्सर देखा जाता है कि जब भी घर का कोई सदस्य किसी शुभ काम के लिए घर से बाहर जाता है तो उसे दही खिलाई जाती है। हमारे समाज में ये पंरपरा सदियों से चली आ रही है। इसकी मुख्य वजह है, हिंदू धर्म में दही को पांच अमृत माना जाना।

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  • तंत्र साधना में फिटकरी का प्रयोग – भाग १

    आज हम आपको फिटकरी के तांत्रिक प्रयोग वशीकरण टोटके बताने जा रहे हैं जिसे अपनाकर आप जरूर ही लाभान्वित होंगे। यह तो आप जानते ही हैं कि फिटकरी नमक जैसी दिखने वाली एक सफेद रंग की वस्तु होती है जो हमारे घरेलू उपयोग में भी काम में आती है। परंतु, यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि यह तांत्रिक प्रयोग में भी काम में आती है, वशीकरण की क्रिया में भी काम में आती है।

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  • Queen द्रौपदी की कुछ अनोखी बातें

    भविष्य पुराण में बताया गया है कि युधिष्ठिर जब जुआ में सबकुछ हार कर वन में जा रहे थे उस समय मैत्रेय ऋषि ने अपने दिव्य दृष्टि से इस बात को जाना था।

    मैत्रेय ने बताया पाण्डवों को बताया कि द्रौपदी ने पूर्व जन्म में ऐसे पुण्य किए हैं जिससे यह जहां भी रहेगी वहां अन्नपूर्णा की तरह इनका भंडार भरा रहेगा। इसलिए वन में रहते हुए आपको कभी भी भोजन और अन्न की चिंता नहीं करनी होगी।

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  • धर्म का हो रहा व्यापार

    वक़्त बहुत तेज़ी से बदल रहा है। पहले आध्यात्म का अर्थ था अपना और समाज का कल्याण, प्रभु तक पहुचने का मार्ग, किन्तु कुछ लोगो ने आध्यात्म का मतलब ही बदल दिया,उनकी नज़र में अध्यात्म का अर्थ है भगवान का भय दिखा कर धन कमाना। धन बिना धर्म नही ये सत्य है। (more…)

  • नवरात्र के कुछ अनकहे, दिलचस्प तथ्य।

    चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा के साथ ही हमारे भारतवर्ष में हिन्दू नव वर्ष का शुभारम्भ हो गया है, नवरात्र का पर्व भारतवर्ष में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है, नवरात्र के दिनों में भक्त देवी माँ की विशेष कृपा प्राप्ति हेतु विभ्भिन्न प्रकार की उपासना और साधना करते है, माता के इस पावन पर्व पर हर कोई उनकी अनुकम्पा पाना चाहता है।

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  • पाँच मुखी रुद्राक्ष के महत्त्व, लाभ और धारण मन्त्र

    पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे ज्यादा मिलने वाला रुद्राक्ष है, पंचमुखी रुद्राक्ष में भगवान शिव की सभी शक्तियां समाहित होती है। इस धरा के पंच तत्व और पांच पांडव इस रुद्राक्ष के देव माने गए हैं। इस रुद्राक्ष को धारण करने से वर्जित कार्यो द्वारा उत्प्पन्न पापो से मुक्ति दिलाता है। (more…)

  • बिल्ली का रास्ता काटना शुभ होता है या अशुभ?

    कहा जाता है मानो तो सब है नहीं मनो तो कुछ भी नहीं। यही कथन सभी चीजों में निर्भर करता है जैसे शुभ अशुभ, शगुन – अपशकुन , भला बुरा सब हमारे विचारों पर निर्भर है और हमारी मान्यता पर।

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  • maxresdefault भगवान भैरव के आठ रूप

    ॐ शिवगोरक्ष योगी आदेश

    ये है भगवान भैरव के 8 रूप, जानिए किसकी पूजा से मिलता है कौन सा फल। (more…)

  • रात में नाखून क्यों नही काटते?

    पुराने ज़माने में नाखून काटने के लिए मना किया जाता था। नाखून काटना हाइजीन से जुड़ी एक प्रैक्टिस है और रेगुलर बेसिस पर नाखून काटने से नाखून और उंगलियों के बीच में गंदगी जमा नही होती।

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  • शमशान से लौटने पर नहाना क्यों जरूरी है?

    जन्म और मृत्यु प्रकृति के अटल सत्यों में सबसे प्रमुख है। जीवन-मरण के फेर में इंसान तभी बंध जाता है जब ईश्वर उसकी रचना करता है। मनुष्य जीवन में 16 संस्कारों को समाहित किया गया है, जो जन्म के साथ शुरू होते हैं और मृत्यु पर्यंत साथ रहते हैं।

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  • शाबर मंत्र सिद्धि रहस्य

    शाबर मंत्र सिद्धि करने से पहले एक बार इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें

    शाबर मंत्र के विषय मे पता नही वो कौन सा महाज्ञानी रहा होगा जिसने ऐसा लिखा है कि मंत्र जैसा जिस भाषा मे लिखा है उसे वैसा ही पढ़े किसी भी प्रकार का मंत्र में संशोधन ना करे, शाबर मंत्र सिद्धि की आवश्यकता नही होती वे स्वयं सिद्ध है, शाबर दीक्षा नही लेनी होती वे सीधे किताबो से पढ़कर सिद्ध किये जा सकते है। (more…)

  • सूर्य रेखा

    पृथक, स्वार्थरत जीने वाला ;
    कारण को बिसराने वाला
    कर्त्ता कहीं नहीं होता
    ऊसर में दाने बोता । (more…)

  • हथेली से सूर्य रेखा की जानकारी।

    हाथों में सूर्य-ग्रह स्थान
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    यश का मुकुट, विद्या का भूषण
    और सफलता साथ लिए है;
    अनामिका के मूल में बसता
    सूर्य हमारा सबसे प्रिय है ।

    अति उच्च हो ग्रह-बिम्ब स्थल, ग्रह-गुण से अति संतृप्त करेगा;
    विद्या दे, पर दम्भ भरे; यश-रेखा में रोक करेगा ।
    तेज सूर्य से मिले सफलता, ग्रह-बिम्ब हो जब उभरा ;
    कर्मों से ही भाग्य बनेगा, यदि हस्तरेख में रवि सुधरा ।

    सूर्य दबा नहीं हो सकता सफल, प्रतिष्ठित मानव का;
    धूमिल, कटी सूर्य रेखा से कल्याण कहाँ है मानव का ।
    ऊँचे पद आसीन है कोई, कार्य-कुशल यशस्वी है,
    निश्चय उसके हस्तरेख में सूर्य-स्थान तेजस्वी है।
    जय महाकाल !

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  • हस्तक्षेत्र में विद्युत् – चुम्बकीय रेखाएँ

    स्वतंत्र जीवन, प्रकृति के सारे नियम-विनियम को जानता और समझता हुआ स्वच्छंद कार्य, व्यव्हार और विचरण करता है।

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  • हस्तरेखा में चंद्रमा का महत्व।

    प्रेम, शांति, रहस्य, चपलता; यात्रा, यादें, लेख का स्वामी
    कलाई ऊपर उगे चन्द्रमा; संगीत, कलामय, निष्कामी ।

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  • हाथों में शुक्र ग्रह का स्थान।

    सुंदरता, काया और माया
    ऐश्वर्य, परिजन, जीवन-साथी;
    अंगूठे का आधार सूर्य है,
    सुख-भोग कराता है प्राप्ति ।

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  • होलिका दहन के पीछे वैज्ञानिक तथ्य।

    हमारे ऋषि-मुनियों ने जो भी त्यौहार बनाये उनके पीछे कई वैज्ञानिक तथ्य छुपे मिले ऐसे ही कपोल कल्पित त्यौहार हमारी संस्कृति में नहीं हैं उसके पीछे कई गूढ़ रहस्य छुपे हैं ।

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  • होली के दिन क्या करें, क्या ना करें?

    होली का उत्सव आनंद और ख़ुशी के लिए पुरे देश में मनाया जाता है | बंगाल राजू को छोड़ के सभी जगह पर होली का उत्सव मनाया जाता है|अगर आप होली के दिन इन बातो को करते है तो आप को कही कठिनाई का सामना करना पडेगा | इसलिए आज हम आपको बता रहे है होली के दिन क्या करे और क्या ना करे ?

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