Month: November 2017

दैनिक राशिफल एवं पंचांग दिनांक १७.११.२०१७

दिनाँक -: 17/11/2017,शुक्रवार
मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष
चतुर्दशी
(समाप्ति काल)

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आयुर्वेद का इतिहास – किसने शुरुआत की आयुर्वेद की जानते है इस भाग में

ब्रम्हाजी पिताओं के पिता है इसलिये हम लोग इन्हें पितामह कहा करते हैं। कहा जाता है कि संततिपर पितासे भी बढ़कर पितामहका स्नेह होता हैं। ये कहावत अपने पितामह ब्रह्माजी पर ठीक ठीक चरितार्थ होती है। ये अपना स्नेह हमपर अनवरत बरसाते रहते है यदि कभी हम अपने पथ से विचलित होते है तो इनके हृदय को ठेस पहुँचती है और ये किसी न किसी रूप में हमें सावधान कर देते है।

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दैनिक राशिफल एवं पंचांग दिनांक १५.११.२०१७

सर्वार्थ सिद्धि योग कब से कब तक, जानिए आज के राशिफल में

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दैनिक राशिफल एवं पंचांग दिनांक १४.११.२०१७

***|| जय महाकाल ||***
अथ पंचांगम्

दिनाँक -: 14/11/2017,मंगलवार
मार्गशीष, कृष्ण पक्ष
एकादशी
(समाप्ति काल)

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आयुर्वेद का इतिहास

आयुर्वेद, या आयुर्वेदिक दवाइया, भारतीय सभ्यता के इतिहास से जुडी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसे एक पूरक चिकित्सा के रूप में सदियों से प्रयोग किया जाता रहा है, भूमंडलीकरण या आधुनिकीकरण के दौर में प्रचलित चिकित्सा पद्धतिया एक प्रकार की पूरक चिकित्सा पद्धतिया ही है, पश्चिमी देशो में आयुर्वेद के उपचार और प्रथाओं को सामान्य स्वास्थ्य अनुप्रयोगों में और कुछ मामलों में चिकित्सा उपयोग में एकीकृत किया गया है।

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दिनांक १२ नवंबर २०१७ का पंचांग एवं राशिफल

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दिनांक ११ नवंबर २०१७ का पंचांग एवं राशिफल

असली राशि रत्न, रुद्राक्ष, तंत्र मन्त्र सम्बन्धी वस्तुओ को उचित मूल्य पर पाने हेतु EMail: Jaymahakaal01@gmail.com पर संपर्क कर सकते है

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दिनांक १० नवंबर २०१७ का पंचांग एवं राशिफल

दिनाँक -: 10/11/2017,शुक्रवार
मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष
सप्तमी
(समाप्ति तक)

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दिनांक ०६ नवंबर २०१७ का पंचांग एवं राशिफल

दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार। शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार। अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार॥

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क्या हैं ध्यान और उसकी विधियाँ

ध्यान की विधियाँ कौन-कौन सी हैं? ध्यान की अनेकानेक एवं अनंत विधियाँ संसार में प्रचलित हैं. साधकों की सुविधा के लिए विभिन्न शास्त्रों व ग्रंथों से प्रमाण लेकर ध्यान की विधियाँ बताते हैं जिनका अभ्यास करके साधक शीघ्रातिशीघ्र ईश्वर साक्षात्कार को प्राप्त कर सकता है.

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